साइंस हाउस मेडिकल घोटाला: स्वास्थ्य जांचों के नाम पर GST की 180 करोड़ की लूट
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेक्टर का सबसे बड़ा घोटाला अब सामने है। यह सिर्फ़ एक कंपनी की चालबाजी नहीं बल्कि पूरे सरकारी सिस्टम की नाकामी और अफसरशाही की मिलीभगत की कहानी है। नाम है — साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड (SHMPL)।
पांच साल में इस कंपनी ने मरीजों की बीमारी को पैसा कमाने का धंधा बना दिया। टैक्स फ्री स्वास्थ्य जांचों पर 18% जीएसटी वसूली की गई और 180 करोड़ रुपए से ज्यादा लूट लिए गए।
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टेंडर से लेकर घोटाले तक
2019 के अंत में साइंस हाउस मेडिकल और उसकी पार्टनर कंपनी POCT सर्विसेज़ को राज्य सरकार ने बड़ा टेंडर दिया।
85 सरकारी अस्पतालों की लैब इनके हवाले की गईं।
बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की लैब भी इन्हें दे दी गईं।
शर्त साफ़ थी कि सिर्फ़ USFDA मान्यता प्राप्त रिएजेंट इस्तेमाल होंगे।
लेकिन शुरुआत से ही खेल शुरू हो गया।
मरीजों की जांचों पर 25% तक अतिरिक्त वसूली।
घटिया और लोकल फैक्ट्री में बने रिएजेंट की सप्लाई।
और सबसे बड़ा घोटाला — GST Fraud।
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जीएसटी घोटाला — 180 करोड़ रुपए की लूट
भारत सरकार ने 28 जून 2017 को आदेश दिया था कि मेडिकल जांचें जीएसटी मुक्त होंगी।
लेकिन साइंस हाउस ने हर बिल में 18% GST जोड़ा:
9% CGST + 9% SGST
औसतन हर माह ₹3 करोड़
साल भर में ₹36 करोड़
5 साल में लगभग ₹180 करोड़ रुपए
यह रकम पूरी तरह गैरकानूनी वसूली थी।
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ओवरबिलिंग और फर्जी इनवॉइस
कंपनी ने 5 साल में 500–700 करोड़ रुपए की बिलिंग की।
इसमें से लगभग 300 करोड़ रुपए ओवरबिलिंग सामने आई।
यानी —
₹180 करोड़ सिर्फ GST घोटाला
₹120 करोड़ ओवरचार्जिंग
कुल मिलाकर लगभग ₹500 करोड़ का खेल
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घटिया रिएजेंट = मरीजों से खिलवाड़
टेंडर की शर्त थी — सिर्फ़ USFDA मान्यता प्राप्त रिएजेंट।
जांच में खुलासा हुआ:
कंपनी ने लोकल रिएजेंट सप्लाई किए।
गुणवत्ता मानकों की पूरी तरह अनदेखी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक यही घटिया रसायन प्रयोग किए गए।
नतीजा —
मरीजों की जांच की विश्वसनीयता खतरे में।
कैंसर, शुगर, ब्लड रिपोर्ट — सब कुछ फर्जी क्वालिटी वाले टेस्ट पर निर्भर।
अफसरशाही की मिलीभगत
इतना बड़ा घोटाला बिना अफसरों की मदद के संभव नहीं।
HSN/SAC कोड का वेरिफिकेशन नहीं हुआ।
इनवॉइस में गलत टैक्स डालने पर भी सिस्टम ने ब्लॉक नहीं किया।
DDO और अकाउंट ऑफिसर ने टैक्स रेट नहीं देखा।
ट्रेजरी ऑफिसर ने सिर्फ़ बजट हेड चेक किया, टेक्निकल वैलिडेशन नहीं।
कंपनी ने फर्जी वर्क ऑर्डर, फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट और गलत इनवॉइस लगाए।
और अफसरों ने बिना जांचे भुगतान कर दिया।
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आयकर छापे और खुलासा
सितंबर 2025 की शुरुआत में आयकर विभाग ने भोपाल और इंदौर समेत 30 ठिकानों पर छापे मारे।
₹200 करोड़ से ज्यादा की बोगस बिलिंग का खुलासा।
साइंस हाउस के ऑफिस से ₹2 करोड़ नकद बरामद।
राजेश गुप्ता और जितेंद्र तिवारी के ठिकानों से टैक्स चोरी के कागज़ और लॉकर की जानकारी मिली।
इनपुट यह भी कि कंपनी विदेश से सस्ते उपकरण मंगाकर महंगे दाम पर बेच रही थी।
यानी यह सिर्फ़ GST घोटाला नहीं बल्कि इंपोर्ट-एक्सपोर्ट फ्रॉड और टैक्स चोरी का भी मामला है।
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बड़े सवाल
1. जब 2017 से मेडिकल जांचें GST मुक्त थीं, तो 5 साल तक अफसर सोते क्यों रहे?
2. क्या स्वास्थ्य विभाग ने जानबूझकर आंखें मूंदी?
3. क्या अफसरों और कंपनी के बीच सीधी साझेदारी थी?
4. मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा?
5. क्या सरकार अब रिकवरी करेगी?
निष्कर्ष
साइंस हाउस का मामला सिर्फ़ एक कंपनी का घोटाला नहीं है। यह दिखाता है कि पूरा सिस्टम बीमार है।
सरकार कहती है — “हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार रहे हैं।”
लेकिन हकीकत — GST वसूली, घटिया रिएजेंट और ओवरबिलिंग।
Akhileaks की मांग:
इस घोटाले की CBI जांच हो।
शामिल अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
कंपनी से हर रुपए की रिकवरी हो।
और मरीजों की सुरक्षा के लिए USFDA स्टैंडर्ड की मॉनिटरिंग अनिवार्य हो।
अंतिम शब्द
स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार किसी वायरस से कम नहीं।
यह वायरस न सिर्फ़ मरीजों की जेब खाली करता है, बल्कि उनकी जिंदगी भी छीन लेता है।
मैं हूँ अखिलेश सोलंकी और आप पढ़ रहे थे Akhileaks की विशेष रिपोर्ट।
सवाल पूछते रहिए, क्योंकि लोकतंत्र में चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है।



