दिल्ली के पावर कॉरिडोर में गूंज रहे 3 नाम: नितिन नवीन की टीम या मोदी कैबिनेट, कहां होगी इन ‘सुपर परफॉर्मर्स’ की एंट्री?
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सियासत का एक सीधा और स्पष्ट नियम है—इनाम उसी को मिलता है, जो मुश्किल चुनौतियों के बीच ‘रिजल्ट’ देता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर इन दिनों एक ऐसा ही बड़ा और बेहद दिलचस्प नैरेटिव आकार ले रहा है। दिल्ली के पावर कॉरिडोर और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच संगठन के तीन ऐसे पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के प्रमोशन की फाइल लगभग फाइनल हो चुकी है, जिन्होंने अपने-अपने राज्यों में पार्टी को अकल्पनीय जीत का स्वाद चखाया। ये तीन कद्दावर नाम हैं— मध्य प्रदेश के रणनीतिकार वीडी शर्मा, दिल्ली का वनवास खत्म करने वाले वीरेंद्र सचदेवा और महाराष्ट्र में ‘महायुति’ के शिल्पकार चंद्रशेखर बावनकुळे। अंदरखाने की पुख्ता खबर यह है कि इन तीनों दिग्गजों का प्रमोशन अब ओवरड्यू हो चुका है और इन्हें बहुत जल्द दिल्ली में एक बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। अब सवाल यह नहीं है कि इन्हें प्रमोशन मिलेगा या नहीं, बल्कि राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात पर गर्म है कि इनकी शानदार एंट्री नितिन नवीन की नई और ताकतवर केंद्रीय कार्यकारिणी में होगी, या फिर सीधे मोदी कैबिनेट में इन्हें मंत्री पद से नवाजा जाएगा।
वीडी शर्मा: मध्य प्रदेश के अजेय ‘संगठन शिल्पी’
चूंकि बात विशुद्ध ‘परफॉर्मेंस’ की हो रही है, तो इस फेहरिस्त में मध्य प्रदेश के लिहाज से सबसे बड़ा और प्रभावशाली नाम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का है। फरवरी 2020 से जुलाई 2025 तक मध्य प्रदेश भाजपा की कमान संभालने वाले वीडी शर्मा ने राज्य में संगठन को जिस माइक्रो-लेवल पर जाकर मजबूत किया, उसकी मिसाल आज पूरे देश में दी जाती है। साल 2020 का वह सियासी भूचाल याद कीजिए, जब शर्मा ने अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाली ही थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ऐतिहासिक बगावत के चलते कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार भरभरा कर गिर गई थी। उस नाजुक वक्त में नई नवेली शिवराज सरकार और संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव थे, जिन पर भाजपा की सत्ता का पूरा भविष्य टिका था। वीडी शर्मा ने अपने कार्यकाल की उस पहली अग्निपरीक्षा को शानदार तरीके से पार किया और उपचुनावों में बेहतरीन जीत दर्ज कर सरकार को पूर्ण स्थायित्व प्रदान किया।
उनका अभियान यहीं नहीं रुका; बल्कि उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर के तमाम कयासों को ध्वस्त करते हुए 163 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई। वीडी शर्मा का असली मास्टरस्ट्रोक 2024 का लोकसभा चुनाव साबित हुआ, जहां उन्होंने अपने अचूक जमीनी प्रबंधन से मध्य प्रदेश की सभी 29 की 29 सीटें भाजपा की झोली में डाल दीं। कांग्रेस के अजेय माने जाने वाले ‘छिंदवाड़ा किले’ को ढहाकर 100% का स्ट्राइक रेट हासिल करना एक ऐसा कारनामा था, जिसने उन्हें केंद्रीय नेतृत्व की पहली पसंद बना दिया है।
वीरेंद्र सचदेवा: जिन्होंने खत्म किया दिल्ली का 27 साल का वनवास
वीडी शर्मा के साथ-साथ जिन दो अन्य नामों पर दिल्ली की मुहर लगने वाली है, उनका ट्रैक रिकॉर्ड भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने राजधानी में वो कर दिखाया है, जिसका इंतजार भाजपा पिछले 27 सालों से कर रही थी। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के तिलिस्म को पूरी तरह तोड़ते हुए, सचदेवा ने भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई और सत्ता में गौरवपूर्ण वापसी कराई। यह सफलता रातों-रात नहीं मिली थी; इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उनके आक्रामक विरोध प्रदर्शनों और सटीक बूथ मैनेजमेंट के दम पर भाजपा ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था। सचदेवा ने साबित कर दिया कि जमीनी संघर्ष से किसी भी अजेय किले को भेदा जा सकता है।
चंद्रशेखर बावनकुळे: महाराष्ट्र की भूलभुलैया में ‘महायुति’ के सारथी
वहीं दूसरी तरफ, महाराष्ट्र जैसे सियासी भूलभुलैया वाले जटिल राज्य में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुळे ने जिस कुशलता से ‘महायुति’ के रथ को प्रचंड जीत तक पहुंचाया है, उसने आलाकमान को उनका मुरीद बना दिया है। अगस्त 2022 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद बावनकुळे ने रणनीति और जनसंपर्क का अनूठा उदाहरण पेश किया। उन्होंने न सिर्फ खुद नागपुर की कामठी सीट से शानदार जीत दर्ज की, बल्कि बड़े पैमाने पर युवाओं को जोड़कर 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन को एकतरफा बहुमत दिलाया। विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन के साथियों को साथ लेकर चलने का उनका कौशल उन्हें एक बेहतरीन रणनीतिकार बनाता है।
आगे क्या: संगठन का सिरमौर या सरकार में हिस्सेदारी?
कुल मिलाकर, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब ‘डिलीवर’ करने वाले इन तीनों नेताओं को उनके शानदार काम का रिटर्न गिफ्ट देने जा रहा है। वीडी शर्मा, वीरेंद्र सचदेवा और चंद्रशेखर बावनकुळे—इन तीनों ने एक बात स्पष्ट रूप से साबित की है कि चुनाव सिर्फ हवा-हवाई दावों या सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि जमीन पर संगठन की मजबूती से जीते जाते हैं। अब राजनीतिक पंडितों और कार्यकर्ताओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी आलाकमान इनकी अद्वितीय सांगठनिक क्षमता का इस्तेमाल नितिन नवीन की टीम में बड़े ओहदे देकर करता है, या फिर इनके रणनीतिक कौशल और अनुभव को देखते हुए इन्हें मोदी कैबिनेट में जगह देकर सरकार का अहम हिस्सा बनाता है।
दोनों ही सूरतों में, यह तस्वीर बिल्कुल साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति और भाजपा के राष्ट्रीय परिदृश्य में इन तीनों ‘सुपर परफॉर्मर्स’ का कद बहुत बड़ा होने वाला है। राजनीतिक हलचलों की ऐसी ही सटीक और अंदरूनी खबरों के लिए जुड़े रहिए अखिलीक्स (Akhileaks) के साथ।



