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एमपी में 23 IAS अफसरों के तबादले की ‘इनसाइड स्टोरी’, सीएम मोहन का ‘परफॉर्म या आउट’ का सख्त मैसेज

मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में मंगलवार देर रात हुए 23 आईएएस अधिकारियों के तबादले महज एक रूटीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों के लिए एक बेहद सख्त संदेश हैं। इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के जरिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय में कोताही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, फिर चाहे उनका कार्यकाल कितना भी अल्प क्यों न हो।

सरकार अब पूरी तरह से ‘काम करने वालों को इनाम और ढिलाई बरतने वालों पर एक्शन’ के फॉर्मूले पर आगे बढ़ रही है। इस फेरबदल की सबसे अहम कड़ी मुख्यमंत्री कार्यालय है, जहां बेहतर परफॉरमेंस का सीधा इनाम सुखवीर सिंह को मिला है और उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाकर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है। वहीं, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को देखते हुए वरिष्ठ एसीएस रश्मि अरुण शमी को इस विभाग की कमान सौंपी गई है, जबकि जनसंपर्क विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार देकर एमपीआईडीसी के एमडी भरत यादव का कद सरकार में और बढ़ा दिया गया है।

प्रशासनिक कसावट के साथ-साथ सरकार का पूरा फोकस अब आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की तैयारियों पर टिक गया है और इसी रणनीति के तहत उद्योग विभाग को सुदृढ़ करने के बड़े कदम उठाए गए हैं। अब लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम (MSME) को एक स्वतंत्र सचिव मिल गया है और उद्योग विभाग की कमान नए सचिव को सौंप दी गई है। निवेश को पंख लगाने की इसी कवायद के बीच कुमार पुरुषोत्तम को अन्य अतिरिक्त प्रभारों से मुक्त करते हुए पूर्णकालिक MSME आयुक्त बनाया गया है, जो औद्योगिक विकास को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

मैदानी स्तर पर 11 जिलों के कलेक्टरों को बदलने की इनसाइड स्टोरी भी पूरी तरह से ‘परफॉरमेंस और एक्शन’ के इर्द-गिर्द ही घूमती है। हरदा और नर्मदापुरम में किसानों के मूंग खरीदी आंदोलन के दौरान प्रभावी कार्रवाई न कर पाने का खामियाजा वहां के तत्कालीन कलेक्टरों को उठाना पड़ा है, जिन्हें महज छह महीने के अल्प कार्यकाल के बाद ही हटा दिया गया। दूसरी ओर, जटिल मैदानी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है।

पन्ना में उलझे केन-बेतवा परियोजना के भू-अर्जन विवाद और बालाघाट में स्वास्थ्य विभाग की लचर स्थिति से निपटने के लिए वहां अनुभवी कलेक्टर तैनात किए गए हैं। इस तबादला सूची से जहां 2017 बैच के युवा अधिकारियों के लिए अपनी पहली जिले की पदस्थापना के दरवाजे खुले हैं, वहीं आदित्य सिंह और रोहित सिसोनिया जैसे अधिकारी एक बार फिर से मुख्यधारा में लौटकर अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

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