एमपी में अचानक गहराया बिजली संकट, 17 हजार मेगावाट पहुंची मांग, जानें सरकार का ‘मेगा रेस्क्यू प्लान’
मध्य प्रदेश इस वक्त एक अप्रत्याशित बिजली संकट से जूझ रहा है, जहां रूठे मानसून के कारण बिजली की अधिकतम मांग पिछले साल के 11,874 मेगावाट से छलांग लगाकर सीधे 17,124 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बारिश कम होने से खेतों में पलेवा और सिंचाई के लिए कृषि क्षेत्र की बिजली निर्भरता दोगुनी से अधिक होकर 3701 मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई है। एक तरफ मांग आसमान छू रही है, तो दूसरी तरफ गांधीसागर और इंदिरा सागर जैसे बांधों में जलस्तर गिरने से 1500 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन और तकनीकी व कोयले की कमी के चलते 1000 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन ठप पड़ गया है।
मांग में रिकॉर्ड उछाल और उत्पादन में 2500 मेगावाट की कमी से पैदा हुए इस परफेक्ट स्टॉर्म से निपटने के लिए राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग ने वॉर-रूम स्तर पर डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। सरकार पावर एक्सचेंज और अन्य राज्यों से 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली जुटाने के मेगा प्लान पर काम कर रही है, जिसके तहत खंडवा व बीरसिंहपुर से 1000 मेगावाट और एनटीपीसी गाडरवारा से 600 मेगावाट की बंद इकाइयों को जल्द सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही तकनीकी खामी वाली 1200 मेगावाट की इकाइयों को युद्धस्तर पर सुधारते हुए 16 अक्टूबर से 500 मेगावाट बैंकिंग बिजली की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर ली गई है।
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में भारी मांग और बेहद कम उपलब्धता के कारण बिजली के दाम 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गए हैं, लेकिन गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बावजूद सरकार ने उत्तर प्रदेश से ऑफ-पीक घंटों में 500 मेगावाट बिजली का पक्का इंतजाम कर लिया है। तात्कालिक संकट से निपटने के साथ ही ऊर्जा विभाग ने अपनी दूरदर्शी रणनीति के तहत आगामी रबी सीजन (नवंबर 2026 से मार्च 2027) की जरूरत को भांपते हुए अभी से 225 मिलियन यूनिट बिजली की अग्रिम बैंकिंग कर ली है। यह त्वरित संकट प्रबंधन स्पष्ट करता है कि प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद सरकार प्रदेश के किसानों और आम जनता को इस पावर शॉक से सुरक्षित निकालने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।



