Exclusive

3 लाख करोड़ का महा-निवेश और 6 लाख नौकरियां, सीएम मोहन का ‘जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ कैसे बदलेगा एमपी की तकदीर

मध्य प्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य की अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर भारत का नया औद्योगिक इंजन बनने की राह पर तेजी से निकल पड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजनरी मास्टरस्ट्रोक ‘जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ (JIIC) ने प्रदेश के औद्योगिक नक्शे को हमेशा के लिए बदलने का ऐतिहासिक खाका तैयार कर दिया है। यह महायोजना महज एक सड़क या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि महाकौशल और मालवा को विकास के एक ही धागे में पिरोकर प्रदेश के युवाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के महा-निवेश और 6 लाख नई नौकरियों का एक मजबूत द्वार खोलने जा रही है।

इस मेगा प्लान को जमीन पर उतारने के लिए मोहन कैबिनेट ने फुल एक्शन मोड में काम करते हुए 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ ‘जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ (SPV) का गठन किया है। लालफीताशाही और लेटलतीफी को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इस कंपनी की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष होंगे। निवेशकों के लिए यह एक बेहद स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के रास्ते में कोई भी ब्यूरोक्रेटिक अड़चन बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

योजना का स्केल और रोडमैप बेहद महत्वाकांक्षी है, जिसके पहले चरण में लगभग 10 हजार एकड़ जमीन पर 3 से 5 विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल हब विकसित किए जाएंगे। सरकार ने मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित करने का आक्रामक लक्ष्य रखा है। पूर्ण विकास के बाद यह कॉरिडोर 3 लाख करोड़ रुपये का विशाल निवेश लाएगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 6 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा और उन्हें नौकरी के लिए पुणे या बेंगलुरु जैसे शहरों की तरफ पलायन नहीं करना पड़ेगा।

यह कॉरिडोर शानदार भौगोलिक संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है, जो प्रदेश के 7 जिलों की तकदीर बदलने जा रहा है। इस योजना के तहत जबलपुर को डिफेंस और भारी मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बनाया जाएगा, जबकि नरसिंहपुर और रायसेन में फूड प्रोसेसिंग के जरिए किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जाएगा। वहीं, राजधानी भोपाल को आईटी का नर्व सेंटर, सीहोर और देवास को लॉजिस्टिक्स हब और ‘मिनी मुंबई’ इंदौर को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

यह पूरा ब्लूप्रिंट एकदम स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी है, जहां उद्योगों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के साथ-साथ श्रमिकों के लिए आवास और ग्रीन जोन जैसी सुविधाएं मिलेंगी। प्रोजेक्ट की फंडिंग के लिए वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसी संस्थाओं के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर काम होगा। सरकार ने इसके लिए बेहद सख्त टाइमलाइन तय की है, जिसमें 30 दिन में कंपनी का गठन, 6 महीने में GIS मैपिंग और 12 महीने के भीतर मास्टर प्लान तैयार करना शामिल है। अखिलीस एनालिसिस का स्पष्ट निष्कर्ष है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मजबूत इच्छाशक्ति से जन्मा यह ‘जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ मध्य प्रदेश को देश की नई औद्योगिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button