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सिंधिया का ‘सुपर-हिट’ रिपोर्ट कार्ड और बीजेपी संगठन में महा-बदलाव की पूरी कहानी

अखिलीक्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पावर कॉरिडोर में इस वक्त राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन और मोदी कैबिनेट—दोनों ही मोर्चों पर एक बड़े ‘महा-ऑपरेशन’ की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस पूरे पावर गेम और सत्ता के नए समीकरणों में जो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है, वह है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का। आने वाले दिनों में दिल्ली दरबार में उनका कद और भी विशाल होने जा रहा है।

क्यों पीएम मोदी के पसंदीदा बने ज्योतिरादित्य सिंधिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा मंत्रियों की कतार में सिंधिया अब सबसे आगे खड़े नजर आ रहे हैं। इसके पीछे की असल वजह उनका वह ‘सुपर-हिट’ रिपोर्ट कार्ड है, जिसने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को खासा प्रभावित किया है। उड्डयन से लेकर संचार और नॉर्थ ईस्ट तक, सिंधिया ने जहां भी जिम्मेदारी संभाली है, वहां जमीन पर ठोस नतीजे देकर दिखाए हैं। साल 2021 से 2024 तक नागरिक उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा संभालते हुए उन्होंने भारतीय एविएशन सेक्टर की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। एयरपोर्ट्स पर ‘डिजी यात्रा’ (Digi Yatra) की शुरुआत कर उन्होंने हवाई सफर को हाई-टेक और टेंशन-फ्री बनाया। इसके साथ ही ‘उड़ान योजना’ के जरिए देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को सीधे हवाई नक्शे से जोड़ने और देश में हवाई अड्डों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि करने का श्रेय भी उन्हीं के विजन को जाता है।
संचार और आईटी मंत्रालय में भी उनका काम जमीन पर साफ दिखाई दिया है। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने और ग्रामीण स्तर तक सस्ते डेटा की पहुंच सुनिश्चित करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ‘ड्रोन-आधारित डाक सेवा’ शुरू करने का उनका अभिनव प्रयोग एक वास्तविक गेम-चेंजर साबित हुआ।
वर्तमान में उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) की जिम्मेदारी संभाल रहे सिंधिया ने पूर्वोत्तर भारत को मोदी सरकार के ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में स्थापित करने का बीड़ा उठाया है। कृषि, बांस और अगरवुड (Agarwood) जैसे नॉर्थ ईस्ट के स्थानीय व्यवसायों को उन्होंने सीधे ग्लोबल मार्केट से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। ‘पूर्वोत्तर विकास सेतु’ के माध्यम से पूरी परियोजनाओं में जो वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता वह लेकर आए हैं, उसने पीएम मोदी को बेहद प्रभावित किया है। इसी शानदार परफॉरमेंस का सीधा इनाम उन्हें आगामी कैबिनेट विस्तार में एक और भारी-भरकम प्रोफाइल के रूप में मिलने वाला है।

संगठन की नई बिसात: 18 से 25 जून के बीच होगा बड़ा फेरबदल
सरकार में किसी भी तरह के बदलाव से पहले पार्टी संगठन की नई बिसात बिछाई जाएगी। राजनीतिक गलियारों की अंदरूनी खबरों के मुताबिक, 18 जून से 25 जून के बीच इन्हीं सात दिनों में संगठन के भीतर बड़े फेरबदल देखने को मिलेंगे। इसी हफ्ते नितिन नवीन की टीम को फाइनल कर लिया जाएगा। टीवी पर पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रवक्ताओं की सूची में भी बड़ी कैंची चलने वाली है, जिससे कई नए चेहरों की एंट्री होगी।
राज्यों के प्रभारियों के नाम और काम बदलने के साथ-साथ संगठन में 5 नए महासचिव और 3 नए उपाध्यक्ष भी शामिल किए जाएंगे। इस सांगठनिक सर्जरी की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर यह है कि संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को भी बदले जाने की पूरी संभावना है। उनकी जगह लेने के लिए सुनील बंसल रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, हालांकि इसके अलावा अरविंद मेनन और सुनील आंबेकर के नामों की भी दिल्ली में जोरों से चर्चा है।

मोदी कैबिनेट की सर्जरी और सत्ता के नए समीकरण
25 जून तक संगठन का यह पूरा ढांचा कस दिए जाने के बाद, फोकस सीधे मोदी कैबिनेट की सर्जरी पर शिफ्ट हो जाएगा। संगठन के बाद जब कैबिनेट का विस्तार होगा, तो उसमें सिंधिया का नया कद और दिल्ली का नया समीकरण आधिकारिक रूप से तय हो जाएगा। इस नए राजनीतिक समीकरण में गृह मंत्री अमित शाह के करीबियों का भी पूरा जलवा देखने को मिलेगा। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव जैसे कद्दावर नेताओं का भी केंद्र सरकार में कद और अधिक बढ़ाया जाएगा।
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