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अखिलीक्स एक्सक्लूसिव: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव – कांग्रेस में बगावत की आहट और भाजपा का ‘तीसरा’ चक्रव्यूह

नमस्कार! ‘अखिलीक्स डॉट कॉम’ (Akhileaks.com) की इस एक्सक्लूसिव इनसाइड स्टोरी में आपका स्वागत है। मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा का रण अब महज एक चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक वर्चस्व और भीतरघात की सबसे खौफनाक जंग में तब्दील हो चुका है। अखिलीक्स की पुख्ता रिपोर्ट और हमारे विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है, वह कांग्रेस के लिए किसी बड़े सियासी बवंडर का साफ इशारा कर रही है।
एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने कोटे से **तरुण चुघ** और **रजनीश अग्रवाल** के नाम पर मुहर लगाकर अपना ‘सेफ गेम’ खेल लिया है, वहीं कांग्रेस ने **मीनाक्षी नटराजन** को चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन, राजनीति के इस भारी-भरकम पर्दे के पीछे असल खेल तीसरी सीट का है। इस सीट के लिए बिसात बिछाई जा चुकी है और मोहरे अपनी चाल चलने को बेताब हैं। आइए, अखिलीक्स के साथ इस सियासी थ्रिलर के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।

कांग्रेस के भीतर मचेगा सियासी भूचाल?
सबसे बड़ा सियासी भूचाल इस वक्त कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में सुलग रहा है। अखिलीक्स के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी हाईकमान ने जिस बेदर्दी से मध्य प्रदेश के बड़े क्षत्रपों और चेहरों को किनारे किया है, उसने पार्टी के भीतर एक भयानक असंतोष को जन्म दे दिया है।
चाहे वे पूर्व मुख्यमंत्री **कमलनाथ** हों, कद्दावर नेता **दिग्विजय सिंह** हों, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष **जीतू पटवारी** हों या फिर **कमलेश्वर पटेल**—चुनाव हारने और गुटबाजी के आरोपों से घिरे इन सभी दिग्गजों को दरकिनार कर दिया गया है। मीनाक्षी नटराजन को टिकट देना भले ही राहुल गांधी की कोर टीम का फैसला हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक अक्सर पार्टी से ज्यादा अपने-अपने स्थानीय नेताओं के ‘वफादार’ माने जाते हैं।
ऐसे में जब इन दिग्गज नेताओं की राजनीतिक साख और दावेदारी को दिल्ली दरबार ने सिरे से खारिज कर दिया है, तो बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नेताओं का ‘मौन समर्थन’ आने वाली **18 जून** को किसी बड़ी बगावत को हवा नहीं देगा? इस सवाल ने कांग्रेस आलाकमान की रातों की नींद उड़ा दी है।

मीनाक्षी नटराजन का सफर और ‘क्रॉस-वोटिंग’ का खौफ
गुटबाजी और अंदरूनी कलह के इस माहौल में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या मीनाक्षी नटराजन के लिए यह राज्यसभा का सफर सुरक्षित रह पाएगा? आंकड़ों का गणित समझें तो भाजपा को अपनी दो सीटें पक्की करने के बाद तीसरी सीट छीनने के लिए अपने **49 अतिरिक्त (सरप्लस) विधायकों** के अलावा सिर्फ **9 और वोटों** की दरकार है।
कांग्रेस के भीतर मचे इस हाहाकार और दिग्गजों की गहरी नाराजगी को देखते हुए अखिलीक्स के सूत्र यह दावा कर रहे हैं कि 18 जून के मतदान में कांग्रेस के अंदर 9 से कहीं ज्यादा विधायकों की टूट देखने को मिल सकती है। इस बात की पूरी संभावना है कि अपने-अपने आकाओं के इशारे पर कांग्रेसी विधायक क्रॉस-वोटिंग का वह अदृश्य खेल खेल जाएं, जो सीधे तौर पर मीनाक्षी नटराजन के राजनीतिक सफर पर भारी पड़ सकता है।

भाजपा का अगला कदम: ‘ऑपरेशन लोटस’ या सेफ पैसेज?
अब पूरी तरह से गेंद भाजपा के पाले में आ चुकी है। अखिलीक्स की पैनी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा नेतृत्व का अगला कदम क्या होगा:
* **क्या भाजपा शराफत दिखाएगी?** क्या भाजपा तीसरी सीट पर कोई उम्मीदवार न उतारकर कांग्रेस को ‘सेफ पैसेज’ (सुरक्षित रास्ता) देगी? राजनीति के जानकारों की मानें तो मौजूदा दौर की सियासत में ऐसा कम ही होता है।
* **क्या एक्टिव होगा ‘ऑपरेशन लोटस’?** यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा कांग्रेस के इस पनपते असंतोष को भुनाने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ को सक्रिय करेगी।
* **किस पर लगेगा दांव?** सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या भाजपा **कैलाश विजयवर्गीय** जैसे किसी सीनियर, कद्दावर और माहिर रणनीतिकार पर दांव लगाएगी, जो पलक झपकते ही कांग्रेस के खेमे में सेंधमारी करने का माद्दा रखते हैं? या फिर किसी अन्य अप्रत्याशित और धनबली/बाहुबली नेता को इस रेस में खड़ा करके कांग्रेस की मुश्किलें इस कदर बढ़ा दी जाएंगी कि उनका बचा-खुचा कुनबा भी ताश के पत्तों की तरह बिखर जाए।

18 जून का महासंग्राम
18 जून का दिन मध्य प्रदेश की राजनीति में दगाबाजी और रणनीतिक महारत का एक नया अध्याय लिख सकता है। क्या मीनाक्षी नटराजन अपनों के ही बिछाए इस चक्रव्यूह को सफलता से भेद पाएंगी, या फिर भारतीय जनता पार्टी कोई ‘तीसरा’ मास्टरस्ट्रोक खेलकर मध्य प्रदेश कांग्रेस को हमेशा के लिए सियासी वेंटिलेटर पर भेज देगी?
यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व और भाजपा के अचूक राजनीतिक प्रबंधन का लिटमस टेस्ट है।
‘अखिलीक्स’ इस पूरी राजनीतिक थ्रिलर पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। मध्य प्रदेश की सियासत का हर पल-पल का अपडेट और पर्दे के पीछे की हर एक्सक्लूसिव खबर के लिए जुड़े रहें सिर्फ Akhileaks.com के साथ!

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