नितिन नवीन की नई टीम और मध्य प्रदेश का बढ़ता सियासी भौकाल: ‘अखिलीक्स’ एक्सक्लूसिव
सियासत के गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ी सुगबुगाहट इसी बात की है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मानसून सत्र के बाद जब अपनी नई टीम का ऐलान करेंगे, तो उसमें मध्य प्रदेश का रुतबा कितना बड़ा होगा। नई टीम के गठन की आहट मिलते ही मध्य प्रदेश की सियासत में दिल्ली की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में डेरा डालकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकातें तेज कर दी हैं। ये मुलाकातें महज कोई शिष्टाचार भेंट नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय संगठन में संभावित बड़ी जिम्मेदारियों को लेकर की जा रही मजबूत लॉबिंग का हिस्सा मानी जा रही हैं।
इस ‘दिल्ली दौड़’ में सबसे ज्यादा चर्चा उन सियासी दिग्गजों की है जो लगातार हाईकमान के सीधे संपर्क में हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली जाकर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और इसके बाद भोपाल लौटकर पार्टी मुख्यालय में बंद कमरे में लंबी चर्चाएं भी कीं। वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री के साथ-साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी अहम मुलाकातें की हैं। इन ताबड़तोड़ बैठकों ने राजनीतिक हलकों में संभावित फेरबदल की हवा को और भी तेज कर दिया है।
पर्दे के पीछे की असली कहानी यह है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने राष्ट्रीय टीम के लिए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए 15 नेताओं के नाम दिल्ली भेजे हैं। इनमें से पांच नाम सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में हैं, जिनमें वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, युवा नेता गौरव तिवारी और विधायक अभिलाष पांडे शामिल हैं। महिला प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर भी मध्य प्रदेश अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और भोपाल की भक्ति शर्मा में से किसी एक को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की पक्की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरी रेस में कैलाश विजयवर्गीय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है, क्योंकि उनके पास पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रहने का लंबा अनुभव है। ऐसे में उन्हें संसदीय बोर्ड या राष्ट्रीय संगठन में कोई बहुत महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी जा सकती है। हालांकि, नई नियुक्तियों का सीधा मतलब यह भी है कि कुछ पुराने चेहरों की या तो विदाई होगी या उनकी भूमिका में बड़ा बदलाव किया जाएगा। इस लिहाज से मध्य प्रदेश से संसदीय बोर्ड के सदस्य सत्यनारायण जटिया, राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धुर्वे और एससी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त कर, संगठन में किसी नई भूमिका में फिट किया जा सकता है।
इन सबके बीच एक और बड़ा पेंच प्रदेश संगठन महामंत्री के पद को लेकर फंसा हुआ है, जो लंबे समय से खाली चल रहा है। चित्रकूट में चल रही संघ और भाजपा की समन्वय बैठक को इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में एक व्यापक और रणनीतिक बदलाव की जमीन पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि दिल्ली दरबार के इस नए बंटवारे में मध्य प्रदेश के हिस्से में कितनी अहम और दमदार जिम्मेदारियां आती हैं।
मध्य प्रदेश की सियासत से जुड़ी हर अंदरूनी खबर और सटीक विश्लेषण के लिए पढ़ते रहिए ‘अखिलीक्स’।



