बिजली दफ्तरों के चक्करों से आज़ादी: सीएम मोहन यादव के ‘संपर्क अभियान 2026’ में 2.82 लाख उपभोक्ताओं को मिली ‘ऑन-द-स्पॉट’ राहत
क्या आपको भी महीने के आखिर में बिजली का भारी-भरकम बिल देखकर करंट लगता है या फिर खराब मीटर को ठीक कराने के लिए बिजली ऑफिस के चक्कर काट-काटकर आप थक चुके हैं? अगर आपका जवाब हाँ है, तो मध्य प्रदेश सरकार का नया एक्शन प्लान आपके लिए किसी बड़े ‘पावर बैकअप’ से कम नहीं है। अक्सर आम जनता सरकारी सिस्टम की लेटलतीफी और दफ्तरी झमेलों को कोसती नजर आती है, लेकिन जब सरकार खुद चलकर आपके दरवाजे पर समाधान लेकर आ जाए, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सीधा और स्पष्ट विजन है कि आम आदमी को अपनी रोजमर्रा की छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों में धक्के न खाने पड़ें। इसी जन-हितैषी विजन को हकीकत में बदलने के लिए पूरे मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान’ जोरों पर चलाया जा रहा है, जिसके तहत बिजली विभाग द्वारा शुरू किए गए “संपर्क अभियान 2026” ने सिस्टम और जनता के बीच की दूरी को पाटने में एक अभूतपूर्व काम किया है।
बीती 14 मई से शुरू हुए इस महा-अभियान के नतीजे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि आम उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर एक बड़ी राहत देने वाले साबित हुए हैं। इस अभियान के व्यापक असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल भोपाल और ग्वालियर रीजन के 16 जिलों में 6,495 से ज्यादा विशेष कैंप लगाए गए, जहां फाइलों को अटकाने के बजाय 2 लाख 82 हजार से ज्यादा लोगों की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि अपनी जायज शिकायत को लेकर बाबू से लेकर साहब तक भटकने वाली वो पुरानी और थका देने वाली कहानी अब खत्म हो रही है। अगर सिर्फ भोपाल रीजन के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अकेले बैतूल जिले में 36 हजार और नर्मदापुरम में 32 हजार से ज्यादा लोगों की बिजली संबंधी टेंशन मिनटों में दूर की गई है, जबकि विदिशा, रायसेन और भोपाल शहर में भी हजारों उपभोक्ताओं को इन कैंपों के जरिए तुरंत राहत पहुंचाई गई।
इसी तरह ग्वालियर रीजन में भी इस अभियान ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी, जहां मुरैना और अशोकनगर जैसे जिलों ने बाजी मारते हुए 40 हजार से ज्यादा लोगों को बिजली ऑफिस की लंबी और उबाऊ लाइनों से हमेशा के लिए छुट्टी दिला दी। इन विशेष कैंपों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहां सिर्फ औपचारिकता के लिए शिकायत फॉर्म जमा नहीं किए गए, बल्कि टेबल के उस पार बैठे अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया। सबसे बड़ी और क्रांतिकारी राहत किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को मिली, जिन्हें सिर्फ पांच रुपये की मामूली फीस यानी एक कप चाय की कीमत में नया घरेलू और कृषि कनेक्शन थमा दिया गया। इसके अलावा खराब मीटरों को हाथों-हाथ बदलना, बिलों में हुई गड़बड़ी को तुरंत सुधारना, कनेक्शन में नाम बदलवाना, बिजली का लोड बढ़वाना, केबल के फाल्ट ठीक करना या फिर नए स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के बीच फैले कन्फ्यूजन को दूर करना, यह सब कुछ एक ही जगह बिना किसी माथापच्ची के सीधे तौर पर सुलझा लिया गया।
अखिलीक्स के इस विस्तृत विश्लेषण का लब्बोलुआब यही है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह जन-केंद्रित एक्शन प्लान अब सिर्फ सरकारी फाइलों और कोरे आश्वासनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर आम आदमी को वास्तविक राहत देता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी सिस्टम और पब्लिक के बीच सालों से जो भरोसे की एक बड़ी कमी पनप रही थी, वह इस ‘संपर्क अभियान 2026’ जैसी पारदर्शी और त्वरित कार्यप्रणाली से खत्म होती नजर आ रही है। अगर मध्य प्रदेश का बिजली विभाग और अन्य सरकारी महकमे इसी एक्टिव और प्रो-पब्लिक मोड में काम करते रहें, तो वह दिन दूर नहीं जब प्रदेश के किसी भी नागरिक को सरकारी दफ्तर जाने के नाम से कोई मानसिक तनाव नहीं होगा। सिस्टम की जवाबदेही और जनता से जुड़े हर उस अहम मुद्दे की जमीनी हकीकत अखिलीक्स इसी तरह बेबाकी से आपके सामने लाता रहेगा।



