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अखिलीक्स एक्सक्लूसिव: जेन-जी वोट बैंक पर कब्जे की महाजंग, राहुल गांधी का ‘गूंज’ प्लान और पीएम मोदी का सॉलिड काउंटर स्ट्रोक

देश की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा दांव जेन-जी यानी युवा वोटर्स पर लगाया जा रहा है। एक तरफ 56 साल के राहुल गांधी हैं, जो ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए युवाओं की नब्ज पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ 76 साल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जो सेल्फी वीडियो और ‘OG’ या ‘Flex’ जैसे जेन-जी स्लैंग्स के जरिए खुद को युवाओं से सीधे कनेक्ट कर रहे हैं। पिछले तीन लोकसभा चुनावों का चुनावी गणित साफ बताता है कि देश का हर तीसरा युवा वोटर बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा है, जबकि कांग्रेस के खाते में बमुश्किल हर पांचवां युवा वोटर आता है। इसी बड़े गैप को भरने और बीजेपी के कोर युवा वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस ने एक बेहद आक्रामक ‘यूथ सेंट्रिक’ रणनीति तैयार की है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘पैन-इंडिया यूथ लीडर’ के खाली स्पेस को भरा जा सके।
इस रणनीति की धुरी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान है, जिसके तहत राहुल गांधी ने बीते तीन महीनों में कोटा, देहरादून, प्रयागराज, पुणे से लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर तक पांच बड़े यूथ इवेंट किए हैं। 20 जुलाई को संसद मार्च और नीट (NEET) जैसे सुलगते मुद्दों पर एकजुट हुए छात्रों के आक्रोश को देखते हुए कांग्रेस ने युवाओं की आवाज बनने का फैसला किया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने देशभर में ऐसे 800 कार्यक्रम आयोजित करने का खाका खींचा है, जिसका मुख्य फोकस राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे उन राज्यों पर है, जहां बीजेपी सत्ता में है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में खड़ी है। राहुल गांधी अपने कैजुअल पहनावे से लेकर छात्रों के साथ मार्शल आर्ट करने और स्कूटी की सवारी तक, खुद को युवाओं के एक सहज और सुलभ प्रतिनिधि के तौर पर पेश कर रहे हैं।

इस भारी चुनौती से निपटने के लिए बीजेपी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है, बल्कि उसने तुरंत एक नई डिजिटल और ग्राउंड स्ट्रैटेजी अपना ली है। पुरानी ‘टॉप-डाउन’ अप्रोच को छोड़कर बीजेपी की नई सोशल मीडिया टीम अब फेसबुक और एक्स (X) की बजाय इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और रेडिट पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां ट्रेंडिंग बैकग्राउंड म्यूजिक और मीम्स के जरिए जेन-जी को साधा जा रहा है। ‘वन कैंपस, वन मिनिस्टर’ अभियान के तहत केंद्रीय मंत्री सीधे कॉलेज परिसरों में जा रहे हैं। हाल ही में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से लेकर वडोदरा तक पीएम मोदी का युवाओं के बीच जाना इसी आक्रामक आउटरीच का हिस्सा है। इसके समानांतर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी पूरी तरह सक्रिय है। 17 से 19 सितंबर को उज्जैन में आयोजित ‘युवा धर्म संसद’ में संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1700 युवाओं से सीधा संवाद कर यह कड़ा संदेश दे दिया है कि उनका यह कोर वोट बैंक इतनी आसानी से खिसकने वाला नहीं है।

इस सियासी खींचतान के बीच विवादों और जमीनी हकीकत के अलग ही रंग देखने को मिल रहे हैं। 19 सितंबर को इंदौर के IDA मैदान में राहुल गांधी के मंच से एक कॉमेडियन द्वारा पीएम मोदी और उनकी दिवंगत माता को लेकर की गई टिप्पणी ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी जैसे दिग्गज नेताओं ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। वहीं, इन तमाम राजनीतिक रणनीतियों का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट 19 सितंबर को आए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों में देखने को मिला। कांग्रेस के दावों के विपरीत, यहां ABVP ने तीन अहम पदों पर शानदार जीत दर्ज की और NSUI का खाता तक नहीं खुल सका। चुनाव विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं में बेचैनी जरूर है, लेकिन जेन-जी का वोट बैंक अब भी बुरी तरह बंटा हुआ है। जब तक आरक्षण और जातिगत राजनीति जैसे फैक्टर्स हावी हैं, तब तक महज आयोजनों की गूंज से युवा मन को पढ़ना और उसे ठोस वोटों में तब्दील करना कांग्रेस के लिए एक लंबी और बेहद चुनौतीपूर्ण लड़ाई रहने वाली है।

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