अखिलीक्स एक्सक्लूसिव: अफवाहें धड़ाम, 29 सीटों का मिला ‘रिटर्न गिफ्ट’ और दिल्ली दरबार में बज रहा ‘मोहन मैजिक’ का डंका
नमस्कार, ‘अखिलीक्स’ (Akhileaks.com) की इस एक्सक्लूसिव और बेबाक रिपोर्ट में आपका स्वागत है। मैं हूँ अखिलेश सोलंकी। मध्य प्रदेश की सियासत में पिछले कई दिनों से नेताओं के लगातार हो रहे दिल्ली दौरों को देखकर यह अफवाह बड़ी तेजी से उड़ रही थी कि भोपाल में कोई बड़ा ‘तख्तापलट’ होने वाला है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कुर्सी खतरे में है। लेकिन आज ‘अखिलीक्स’ इन तमाम सियासी अटकलों और कोरी अफवाहों का फाइनल ‘दी एंड’ कर रहा है। सियासत के इस शोर में जरा तार्किक नजरिए से देखिए—जिस मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की झोली में लोकसभा की 29 की 29 सीटें डालकर एक ऐतिहासिक ‘क्लीन स्वीप’ दिया हो, क्या दिल्ली दरबार उसे हटाएगा या उसे सबसे बड़ा ‘इनाम’ देगा? सच यही है कि डॉ. मोहन यादव की कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित है और उनका रसूख अब केंद्र में पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है।
मुख्यमंत्री बदलने की इन बेसिर-पैर की अटकलों को पूरी तरह से खारिज करने वाला सबसे बड़ा और पुख्ता सुबूत भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम है, जिसमें ‘मोहन मैजिक’ का डंका साफ बजता हुआ दिखाई दे रहा है। राजनीति का सीधा और पुराना नियम है कि जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री आलाकमान की नजरों में कमजोर होता है, तो दिल्ली के संगठन में उस राज्य का कोटा अपने आप सिकुड़ जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के मामले में यहाँ बाजी पूरी तरह से पलट गई है। पुरानी टीम में जहाँ मध्य प्रदेश से केवल चार चेहरे शामिल थे, वहीं अब आलाकमान ने डॉ. मोहन यादव के इस शानदार चुनावी प्रदर्शन को ‘रिटर्न गिफ्ट’ देते हुए सीधे सात महारथियों को राष्ट्रीय टीम की अहम कुर्सियों पर बिठाया है। यह अपने आप में एक स्पष्ट संदेश है कि मध्य प्रदेश का संगठनात्मक वजन दिल्ली में काफी बढ़ गया है और सत्ता की डोर मजबूती से थामी गई है।
इस नई टीम के स्वरूप और पदों के बंटवारे को देखें तो संगठन के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले सौदान सिंह सह-संगठन महामंत्री के पद पर बरकरार हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता वीडी शर्मा को संगठन के माइक्रो-लेवल विस्तार के लिए ‘प्रकोष्ठ संकुल’ का राष्ट्रीय सह-संयोजक बनाकर एक बिल्कुल नया और ऐतिहासिक टास्क सौंपा गया है। इसके साथ ही, बिना किसी शोर-शराबे के गजेंद्र पटेल को सीधे राष्ट्रीय महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। अनुभवी लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कविता पाटीदार को राष्ट्रीय मंत्री, बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और भोपाल में पार्टी की मुखर आवाज रहे आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी बनाकर दिल्ली में मध्य प्रदेश का परचम पूरी शान से लहरा दिया गया है।
अब इस पूरी सियासी बिसात के पीछे छिपी असली ‘इनसाइड स्टोरी’ को समझना बेहद जरूरी है। दिल्ली दरबार ने मध्य प्रदेश के इन सात महारथियों की नियुक्ति बिना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति और उनके साथ किए गए ‘परफेक्ट’ तालमेल के नहीं की है। दरअसल, दिल्ली और भोपाल ने मिलकर एक ऐसी अचूक सोशल इंजीनियरिंग और जातीय समीकरण की बिसात बिछाई है, जिसने पार्टी के भीतर और बाहर उठने वाली हर सुगबुगाहट को हमेशा के लिए शांत कर दिया है। आदिवासी समाज को साधने के लिए सीधे गजेंद्र पटेल को महामंत्री का सबसे बड़ा पद दिया गया, दलित वर्ग के समीकरण लाल सिंह आर्य से साधे गए, ओबीसी और महिला कोटे से कविता पाटीदार को जगह मिली, मजबूत ब्राह्मण चेहरे के रूप में वीडी शर्मा को कमान सौंपी गई और किसान-गुर्जर राजनीति के लिए बंसीलाल गुर्जर को मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया। ये वो सटीक जातीय समीकरण हैं जो आलाकमान और मुख्यमंत्री के बीच की ‘सुपर-सिंक’ केमिस्ट्री से ही तय हुए हैं।
लब्बोलुआब यह है कि जो सियासी पंडित मध्य प्रदेश के नेताओं के दिल्ली दौरों को देखकर ‘तख्तापलट’ की दूरबीन लगाए बैठे थे, उन्हें अब यह सच्चाई स्वीकार कर लेनी चाहिए कि मध्य प्रदेश में सत्ता की स्टेयरिंग पूरी मजबूती के साथ डॉ. मोहन यादव के ही हाथों में है। वो बिना किसी शोर-शराबे के आलाकमान के हर एजेंडे को जमीन पर उतार रहे हैं और इसी कार्यशैली ने उन्हें दिल्ली का भरोसेमंद पॉवर-सेंटर बना दिया है। मध्य प्रदेश की सियासत, सत्ता के गलियारों की हर पक्की अंदरूनी खबर और उसके सबसे सटीक विश्लेषण के लिए लगातार जुड़े रहिए ‘अखिलीक्स डॉट कॉम’ के साथ।



