अखिलीक्स एक्सक्लूसिव: दिल्ली में तैयार हुई ‘मेगा पॉलिटिकल क्लीन-अप’ की सीक्रेट स्क्रिप्ट, मुख्यमंत्रियों से लेकर विपक्ष तक मचेगा सियासी भूचाल!
दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान के सबसे भीतरी और रहस्यमयी गलियारों में इस वक़्त एक ऐसी विस्फोटक स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है, जो बहुत जल्द देश की सियासत में एक जबरदस्त भूचाल लाने वाली है। ‘अखिलीक्स’ की एक्सक्लूसिव और इनसाइड पड़ताल से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि आलाकमान के स्तर पर एक ‘मेगा पॉलिटिकल क्लीन-अप’ का फाइनल ब्लूप्रिंट पूरी तरह से तैयार हो चुका है। सत्ता के इस सबसे बड़े और गुप्त ऑपरेशन का असर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कुर्सी से लेकर राजभवनों और विपक्ष के खेमे तक दिखाई देने वाला है।
राज्यों में ‘परफॉर्म या पेरिश’: मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों पर गिरेगी गाज
इस बड़े सियासी ऑपरेशन की सबसे पहली गाज राज्यों के नेतृत्व पर गिरने जा रही है। हमारी पुख्ता जानकारी के मुताबिक, ‘परफॉर्म या पेरिश’ के सख्त फॉर्मूले और जमीनी समीकरणों को कसौटी पर रखते हुए राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की कुर्सी पर खतरे के बेहद घने बादल मंडरा रहे हैं। यह लगभग तय माना जा रहा है कि इन राज्यों में अब नेतृत्व परिवर्तन ही एकमात्र रास्ता बचा है।
लेकिन यह सियासी तूफान सिर्फ मुख्यमंत्रियों के बंगलों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है; राजभवनों की पूरी बिसात भी पलटी जा रही है। बहुत जल्द देश के पांच राज्यपालों की छुट्टी होने वाली है। इस विदाई सूची में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम है, वह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का है। इसके साथ ही दक्षिण भारत के भी दो राज्यपाल हटाए जा रहे हैं। इन खाली हो रहे राजभवनों का सियासी रुतबा बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार अपने ही दो कद्दावर केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली से बाहर भेजकर राज्यपाल बनाने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
सरकार और संगठन में अभूतपूर्व ‘जेनरेशनल शिफ्ट’
राजभवनों और मुख्यमंत्रियों के इस व्यापक फेरबदल के समानांतर, दिल्ली में बैठी सरकार और पार्टी संगठन के भीतर भी एक अभूतपूर्व जेनरेशनल शिफ्ट (पीढ़ीगत बदलाव) की जमीन तैयार हो चुकी है। बहुत जल्द केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक अहम विस्तार होने वाला है, जिसमें आठ नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस विस्तार की सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी यह है कि ये सभी आठ चेहरे पचास वर्ष से कम उम्र के होंगे, जिनमें से ज्यादातर की उम्र महज 40 से 45 साल के बीच है। यह सीधे तौर पर एक युवा और आक्रामक कैबिनेट तैयार करने का मास्टरस्ट्रोक है।
वहीं, सत्ता की इस चुनाव मशीनरी को और धारदार बनाने के लिए संगठन में भी बड़ी और गहरी सर्जरी हो रही है। इस बदलाव के तहत संगठन में पांच नए महासचिव और पांच नए उपाध्यक्ष नियुक्त किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य के चुनावी महासमर के लिए एक नई और अचूक फौज खड़ी की जा सके।
विपक्ष में बड़ी सेंधमारी और ‘मिशन 360’ का सीक्रेट प्लान
सरकार और संगठन को इस कदर मज़बूत करने की इस पूरी कवायद के पीछे असल में वो ख़ामोश और मारक रणनीति है, जिसने विपक्ष की रातों की नींद उड़ा दी है। ‘अखिलीक्स’ आपको बता रहा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और जो कुछ शिवसेना बची है, उसके भीतर एक बहुत बड़ी टूट की पटकथा लिखी जा चुकी है। दलबदल कानून के हर लूपहोल का बारीकी से इस्तेमाल करते हुए, एक ‘डमी पार्टी’ के जरिए कई विपक्षी सांसदों का सत्ता पक्ष के खेमे में सीधा विलय कराने का अचूक मास्टरप्लान तैयार कर लिया गया है।
आखिर इतनी बड़ी राजनीतिक सेंधमारी की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल, इस पूरी किलेबंदी और पावर डायनामिक्स के पीछे का असली मकसद संसद में 360 सांसदों के उस जादुई और ‘सुपर मेजॉरिटी’ वाले आंकड़े को हासिल करना है।
निशाने पर देश की तस्वीर बदलने वाले ऐतिहासिक ‘महा-बिल’
एक बार यह नंबर गेम पूरा हो गया, तो आने वाले सत्रों में देश की तस्वीर और तकदीर बदलने वाले ‘महा-बिल’ संसद के पटल पर होंगे। इनमें महिला आरक्षण को धरातल पर लागू करना, परिसीमन (Delimitation) की जटिल प्रक्रिया को पूरा करना, समान नागरिक संहिता (UCC) और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ जैसे वो ऐतिहासिक बिल शामिल हैं, जो देश की राजनीतिक जमीन को हमेशा के लिए बदल कर रख देंगे।
सत्ता के इस सबसे बड़े और गुप्त ऑपरेशन के हर नए सियासी दांव और दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान की हर अंदरूनी हलचल की एक्सक्लूसिव जानकारी के लिए, जुड़े रहिए अखिलीक्स (akhileaks.com) के साथ।



