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MPRDC में ‘कुनबा-तंत्र’: संविदा से आए अफसर ने खड़ा किया करोड़ों का ‘फर्नीचर साम्राज्य’, पब्लिक वाणी के खुलासे के बाद MD ने बैठाई जांच

2 फरवरी को 'पब्लिक वाणी' ने किया MPRDC के DGM संजय वर्णवाल का भंडाफोड़। पत्नी और साले की बोगस कंपनियों के जरिए करोड़ों का फर्नीचर घोटाला। MD भरत यादव ने बैठाई जांच। पढ़ें पूरी स्टोरी।

​मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। मामला एक ऐसे रसूखदार अफसर से जुड़ा है जिसने सरकारी कुर्सी पर बैठकर ‘सेवा’ जनता की नहीं, बल्कि अपने परिवार की तिजोरियों की करी। ‘पब्लिक वाणी’ अखबार ने अपने 2 फरवरी 2026 के अंक में इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
​2 फरवरी का वो धमाका जिसने हिला दिया सिस्टम
​पब्लिक वाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, MPRDC के उप महाप्रबंधक (DGM) संजय वर्णवाल पर पद का दुरुपयोग कर अपने रिश्तेदारों को करोड़ों का आर्थिक लाभ पहुँचाने के संगीन आरोप लगे हैं। खबर के प्रकाशित होते ही और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत सामने आने के बाद, MPRDC के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) भरत यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
​पत्नी और साले के नाम पर ‘बोगस’ कंपनियों का खेल
​इस पूरे घोटाले का केंद्र ‘फर्नीचर और उपकरण खरीदी’ को बनाया गया। आरोप है कि संजय वर्णवाल ने अपनी पत्नी और साले के नाम पर ‘स्मूभ यूनिटी एलएलपी’ (Smubh Unity LLP) और ‘महावीर सेल्स’ जैसी फर्जी कंपनियां खड़ी कीं। नियम कायदों को ताक पर रखकर, इन पारिवारिक फर्मों को विभाग में फर्नीचर सप्लाई के बड़े-बड़े ऑर्डर दिलवाए गए। आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए करोड़ों रुपयों का ट्रांजेक्शन सीधा इन निजी खातों में किया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उल्लंघन है।
​फर्जी दस्तावेजों पर टिकी है करियर की बुनियाद?
​अखिलीक्स की जांच में यह भी सामने आया है कि वर्णवाल का पूरा करियर ही विवादों और संदिग्ध दस्तावेजों के साये में रहा है। उनकी मूल नियुक्ति राघोगढ़ के एक शक्कर कारखाने में संविदा (Contract) पर हुई थी। आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षरों और कूट रचित पत्रों के सहारे MPRDC में प्रतिनियुक्ति (Deputation) हासिल की। इतना ही नहीं, विधानसभा में भी यह मामला गूंजा है (प्रश्न क्रमांक 70-2025), जहाँ सरकार ने माना है कि शक्कर कारखाने से ऐसी प्रतिनियुक्ति का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं था। बावजूद इसके, वर्णवाल ने खुद HR प्रमुख रहते हुए खुद को नियमित (Civilian) करवा लिया।
​MD भरत यादव का कड़ा एक्शन, 15 दिन में माँगी रिपोर्ट
​भ्रष्टाचार की यह फाइल अब बंद कमरों से बाहर निकल चुकी है। MD भरत यादव ने इस घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें तकनीकी सलाहकार आर.के. मेहरा, महाप्रबंधक राजेश ठाकुर और मयंक शुक्ला शामिल हैं। कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 15 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपी जाए। शिकायतकर्ता सतीश कुमार डोंगरे ने इस मामले के दस्तावेज लोकायुक्त, EOW और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी भेजे हैं, जिससे वर्णवाल की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
​अखिलीक्स का सवाल: क्या नपेंगे जिम्मेदार?
​अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 15 दिन की यह जांच किसी ठोस नतीजे पर पहुँचेगी या हमेशा की तरह रसूख के आगे फाइलें दबा दी जाएंगी? मध्य प्रदेश की जनता के टैक्स का पैसा जिस तरह से ‘पारिवारिक बिजनेस’ में झोंका गया, वह प्रशासनिक शुचिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। akhileaks.com इस पूरी जांच और आने वाली रिपोर्ट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

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