संघमित्र भार्गव का वायरल भाषण: CM मोहन यादव और तोमर के सामने मोदी सरकार की पोलखोल
आज की पड़ताल एक ऐसे भाषण की है, जिसने बीजेपी के भीतर हलचल मचा दी है और पूरे मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली दरबार तक गूंज सुनाई दे रही है।
मंच का दृश्य
जगह — इंदौर का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय।
मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मंत्री, सांसद और स्थानीय नेता बैठे हैं।
लेकिन माइक संभालते हैं मेयर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र भार्गव।
पहली लाइन ही बिजली की तरह गिरी:
“सबका साथ, सबका विकास नहीं… हो रहा है दलालों का साथ और जनता का विनाश।”
तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
सीएम ने हल्की मुस्कान से असहजता छुपाई।
मेयर के माथे पर पसीना छलका।
और सोशल मीडिया पर ये क्लिप आग की तरह फैल गई।
हमला दर हमला
संघमित्र रुके नहीं।
रेलवे की बदहाली पर बोले —
हर साल 50 लाख लोग टिकट के बावजूद सफर नहीं कर पाते।
दलालों का खेल जारी है, जनता लाचार।
बुलेट ट्रेन पर तंज कसा —
“2022 तक ट्रेन चलाने का वादा था, लेकिन 2025 में भी यह सिर्फ़ PowerPoint स्लाइड्स में कैद है। करोड़ों खर्च हो गए, घोटाले हो गए… लेकिन ट्रेन सिर्फ़ सपना रह गई।”
सुरक्षा पर हमला और तीखा था —
“रेल की पटरियों पर सिर्फ़ डिब्बे नहीं टूटते… घर टूटते हैं, सपने बिखरते हैं।”
उन्होंने याद दिलाया — 10 साल में 20,000 से ज़्यादा मौतें रेल हादसों में हुईं।
स्टेशन पुनर्विकास की हकीकत भी सामने रखी —
400 एयरपोर्ट जैसे स्टेशन का वादा… लेकिन सुधरे मुश्किल से 20।
बाकी जगह वही भीड़, वही गंदगी, वही महंगा पानी।
और फिर आया सबसे बड़ा धमाका — CAG रिपोर्ट।
1.25 लाख करोड़ का बजट, 80% प्रोजेक्ट अधूरे।
सुरक्षा मद का 78% पैसा दूसरी जगह खर्च।
300 करोड़ की कैटरिंग सिर्फ़ एक कंपनी को।
संघमित्र ने सीधा कहा —
“ये सबका विकास नहीं… सबका विनाश है।”
नेताओं की चुप्पी
इतने तीखे हमलों के बावजूद मंच पर बैठे बड़े नेता चुप रहे।
सीएम मोहन यादव ने बस इतना कहा —
“संघमित्र ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए अच्छा बोला… लेकिन चोर की दाढ़ी में तिनका तो होता है।”
नरेंद्र सिंह तोमर मुस्कुराए।
पुष्यमित्र भार्गव ताली बजाते दिखे, मगर चेहरे पर असहजता साफ़ थी।
पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूंज उठा।
सोशल मीडिया पर आग
वीडियो वायरल हो गया।
Twitter (X) पर #BulletTrain और #RailScam ट्रेंड करने लगे।
WhatsApp ग्रुप्स में क्लिप्स घूमने लगीं।
Instagram और Facebook पर मीम्स की बाढ़ आ गई।
लोग लिखने लगे:
“मेयर का बेटा बोल गया… जो जनता सोच रही थी।”
विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया —
“यह है नया भारत की सच्चाई… इंदौर का बेटा सरकार की पोल खोल रहा है।”
विपक्ष ने इसे बीजेपी की अंदरूनी बेचैनी का सबूत बताया।
और बीजेपी की परेशानी और बढ़ गई।
असली दिक्कत बीजेपी के भीतर
बीजेपी में अनुशासन सबसे अहम है।
लेकिन जब महापौर का बेटा ही विपक्षी भाषा बोले… तो पार्टी इसे कैसे पचाए?
क्या कार्रवाई होगी?
नोटिस?
पब्लिक डिस्टेंसिंग?
या फिर इसे “वाद-विवाद का जोश” कहकर इग्नोर कर दिया जाएगा?
याद रखिए — बीजेपी में एक छोटा-सा ट्वीट भी अनुशासन तोड़ने जैसा माना जाता है।
यहाँ तो सीधा मंच से, सीएम और विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में, मोदी सरकार पर हमला हुआ।
सबसे बड़ा असर
इस घटना का सबसे बड़ा असर मेयर पुष्यमित्र भार्गव पर पड़ सकता है।
उनकी पार्टी में साख पर सवाल उठे।
भविष्य में विधानसभा/लोकसभा टिकट की संभावना प्रभावित हो सकती है।
और सबसे अहम — जनता में यह धारणा बनी कि “बीजेपी के भीतर भी विरोध की आवाज़ है।”
घर और मंच पर सवाल
क्या संघमित्र ने यह भाषण घर पर याद नहीं किया होगा?
क्या उनके पिता ने उसे समझाया नहीं?
और मंच पर बैठे वरिष्ठ नेताओं ने रोका क्यों नहीं?
माइक छीना जा सकता था।
टोका जा सकता था।
भाषण काटा जा सकता था।
लेकिन कुछ नहीं हुआ।
सब मुस्कुराते रहे।
और यही मुस्कान अब बीजेपी के लिए सबसे बड़ी पॉलिटिकल प्रॉब्लम बन गई है।
क्लाइमेक्स सवाल
जब मोदी के महापौर का बेटा ही केंद्र सरकार की इतनी कड़ी आलोचना कर रहा है, और मंच पर बड़े नेता भी उसे रोक नहीं रहे… तो अब बीजेपी क्या करेगी?
अनुशासन का डंडा चलेगा?
या इसे हंसी-मज़ाक में टाल दिया जाएगा?
—निष्कर्ष
दोस्तों, इस पूरी कहानी ने तीन बातें साफ़ कर दीं:
1. सच बोलने के लिए उम्र या पद नहीं, हिम्मत चाहिए।
2. सबसे बड़ा वार कभी-कभी विपक्ष से नहीं, घर के भीतर से आता है।
3. और अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ा इम्तिहान है — अनुशासन या इग्नोर?
इंदौर का यह भाषण अब महज़ वायरल क्लिप नहीं रहा।
यह मोदी सरकार और बीजेपी के अनुशासन मॉडल पर सीधा सवाल बन चुका है।
नमस्कार, मैं हूँ अखिलेश सोलंकी… और आप देख रहे थे Akhileaks।
हम मिलेंगे अगली पड़ताल में।



