Exclusive

सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट का ‘तगड़ा झटका’: मोहन सरकार की प्रशासनिक बिसात में फंसा शराब साम्राज्य!

नमस्कार, ‘Akhileaks’ की इस एक्सक्लूसिव डीप डाइव रिपोर्ट में आपका स्वागत है। मध्य प्रदेश के सत्ता गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा आबकारी विभाग के उस ‘चक्रव्यूह’ की है, जिसने प्रदेश के बड़े शराब कारोबारी समूह सोम डिस्टिलरीज को पूरी तरह से उलझा कर रख दिया है। 23 जून 2026 को आए जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश ने सोम डिस्टिलरीज की टेंडर रेस में बने रहने की आखिरी उम्मीद को भी धराशायी कर दिया है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध डी-1 (D-1) शराब लाइसेंस के कंपनी 2026-27 के देसी शराब आपूर्ति टेंडर की वित्तीय बोली में शामिल होने की हकदार नहीं है। सरकार की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत के सामने यह साफ कर दिया कि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही खारिज हो चुकी है, जिसे उन्होंने चुनौती तक नहीं दी है। यह न केवल सोम के लिए एक बड़ा व्यावसायिक झटका है, बल्कि इसे मोहन सरकार की उस प्रशासनिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने बड़े कारोबारी घरानों के दबाव में आए बिना नियमों की सख्त दीवार खड़ी कर दी है।

लेकिन, 23 जून को कोर्ट में मिली इस हार की पटकथा तो 18 जून को ही लिख दी गई थी, जब आबकारी विभाग ने एक ‘एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्राइक’ के जरिए कंपनी के लाइसेंस नवीनीकरण पर ही ताला लगा दिया था। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के नेतृत्व में विभाग ने जो तेवर दिखाए, वे मोहन सरकार की ‘कड़े फैसले’ लेने की नई कार्यशैली को बयां करते हैं। विभाग ने नवीनीकरण के सामान्य नियमों को दरकिनार करते हुए विशेष रूप से एक चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। 12 जून को नोटिस जारी हुआ और 17 जून की देर शाम तक कंपनी ने जवाब दाखिल किया, लेकिन विभाग की फुर्ती देखिए कि जवाब मिलने के महज 24 घंटे के भीतर, 18 जून को ही आबकारी आयुक्त ने 175 पन्नों का भारी-भरकम आदेश पारित कर कंपनी का लाइसेंस नवीनीकरण खारिज कर दिया। कंपनी का आरोप है कि यह एक प्री-प्लान्ड कार्रवाई थी, लेकिन विभाग की दलील यह रही कि कंपनी की गंभीर अनियमितताओं ने उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया।

इस पूरी घेराबंदी की नींव में देपालपुर सत्र न्यायालय का दिसंबर 2023 का वह फैसला है, जिसमें पांच लोग धोखाधड़ी और फर्जी परमिट के मामलों में दोषी ठहराए गए थे। आबकारी विभाग ने इसी को आधार बनाते हुए कंपनी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और अन्य अनियमितताओं—जैसे करोड़ों का लंबित वैट (VAT) बकाया—को ढाल बनाकर नवीनीकरण की फाइल हमेशा के लिए बंद कर दी। हालाँकि, टेंडर की रेस से बाहर होने के बाद अब सोम डिस्टिलरीज के लिए कानूनी लड़ाई के दरवाजे सिमट गए हैं। खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया है कि आबकारी आयुक्त के 18 जून के उस विवादास्पद आदेश को चुनौती देने वाली याचिका अब केवल सिंगल बेंच में ही सुनी जाएगी।

अब पूरी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सिंगल बेंच के सामने कंपनी आबकारी विभाग की इस अभेद्य प्रशासनिक किलेबंदी को भेद पाएगी, या फिर सत्ता के गलियारों से चला यह तीर उन्हें लंबे समय तक शराब कारोबार से दूर रखेगा। मोहन सरकार ने अपनी नीति से यह साफ कर दिया है कि शासन और प्रशासन पर उनकी पकड़ अटूट है। प्रशासनिक शक्ति-प्रदर्शन और अंदरूनी दांवपेच की हर परत को उधेड़ने के लिए जुड़े रहिए ‘Akhileaks’ के साथ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button