मध्य प्रदेश को बदनाम करने की गहरी साजिश: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के 335 एकड़ के फर्जी जमीन घोटाले का ‘अखिलीक्स’ पर पर्दाफाश
क्या मध्य प्रदेश की ‘एमपी अजब है, सबसे गजब है’ वाली सकारात्मक पहचान को जानबूझकर एक नेगेटिव नैरेटिव में बदलने की कोशिश की जा रही है? ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली में बैठे कुछ लोग और वल्लभ भवन के पुराने मठाधीश एक सोची-समझी ‘हिट-जॉब’ के तहत हमारे राज्य की छवि खराब कर रहे हैं। इसी कड़ी में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 335 एकड़ के तथाकथित ‘जमीन घोटाले’ का एक बड़ा हौव्वा खड़ा कर दिया है। लेकिन आज सरकार की आधिकारिक फैक्ट-शीट और ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेजों ने इस भ्रामक खबर की एक-एक पन्ने की धज्जियां उड़ा दी हैं। अखिलीक्स (Akhileaks) में आज हम आपके सामने वो अकाट्य सत्य रख रहे हैं, जो साबित करते हैं कि यह पूरा मामला तथ्यों से परे महज एक प्रायोजित एजेंडा है।
‘लैंड बैंक’ में बेतहाशा वृद्धि का सबसे बड़ा और सफेद झूठ
इस फर्जी नैरेटिव का सबसे बड़ा झूठ यह फैलाया गया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद डॉ. मोहन यादव के ‘लैंड बैंक’ में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लेकिन सरकारी दस्तावेजों का पुख्ता सच यह है कि मुख्यमंत्री की कृषि भूमि में एक इंच का भी इजाफा नहीं हुआ है। नवंबर 2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 17.967 एकड़ जमीन थी और आज जून 2026 में भी यह आंकड़ा बिल्कुल उतना ही है। यही नहीं, उनकी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के नाम पर दर्ज 12.292 एकड़ जमीन का अधिकांश हिस्सा डॉ. यादव के मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले, वर्ष 2008 से 2019 के बीच ही खरीदा जा चुका था। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने के बाद जमीनें बढ़ने का दावा पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद है।
‘सिद्धि विनायक देवकॉन’ और परिवार को लेकर बुना गया भ्रमजाल
साजिश का दूसरा बड़ा हिस्सा ‘सिद्धि विनायक देवकॉन’ कंपनी को लेकर रचा गया। हकीकत यह है कि डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी लगभग नौ साल पहले, वर्ष 2017 में ही इस कंपनी के निदेशक पद से अलग हो चुके थे और मार्च 2026 में उन्होंने अपने सभी शेयर भी पूरी तरह त्याग दिए हैं। अखबार ने झूठा दावा किया कि कंपनी ने अपनी जमीनें बढ़ाईं हैं, जबकि ऑन-रिकॉर्ड सच यह है कि नवंबर 2023 में कंपनी के पास 68.43 एकड़ भूमि थी, जो अब बढ़ने के बजाय घटकर 65.69 एकड़ रह गई है। अगर बात मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यादव की करें, तो उन्होंने जो लगभग 16 एकड़ जमीन खरीदी थी, वह भी 2019 से मार्च 2023 के बीच खरीदी गई थी—यानी उज्जैन मास्टर प्लान लागू होने और डॉ. यादव के मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले। वहीं, पुत्रवधू शालिनी यादव की वर्ष 2025 में गंगेड़ी वाली 10 एकड़ जमीन पूरी तरह से कृषि भूमि है, जो मास्टर प्लान के व्यावसायिक या विकसित क्षेत्र से बिल्कुल बाहर स्थित है।
335 एकड़ का छलावा और ‘उज्जैन मास्टर प्लान’ का सच
अब आते हैं उस 335 एकड़ के ‘लैंड बैंक’ और ‘उज्जैन मास्टर प्लान 2035’ के सबसे बड़े छलावे पर, जिसे लेकर ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ का आरोप गढ़ा गया। यह विशाल जमीन दरअसल उनके विस्तृत परिवार और चचेरे भाइयों की है। ये सभी स्वतंत्र इकाइयां हैं और अपना-अपना व्यवसाय व आर्थिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं। किसी भी स्थापित बिल्डर के निजी लेन-देन या स्वतंत्र व्यवसाय को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ देना तथ्यात्मक रूप से सरासर गलत है। रही बात मास्टर प्लान में फेरबदल की, तो उज्जैन का मास्टर प्लान मई 2023 से ही प्रभावशील हो चुका था, जबकि डॉ. मोहन यादव ने इसके पूरे सात महीने बाद, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया था। इसलिए उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद सड़क या हाईवे योजनाओं को प्रभावित करने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
मध्य प्रदेश के सम्मान के लिए फैक्ट-चेक जरूरी
डॉ. मोहन यादव की हर संपत्ति विधानसभा चुनाव 2023 के शपथ-पत्र में पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। एक मध्य प्रदेश वासी होने के नाते यह हमारा फर्ज है कि हम किसी भी ऐसी भ्रामक खबर पर भरोसा करने या उसे आगे बढ़ाने से पहले उसके फैक्ट्स जरूर चेक करें। यह बात अब सिर्फ एक मुख्यमंत्री की नहीं है और न ही यह बात बीजेपी या कांग्रेस की है; यह हमारे मध्य प्रदेश के सम्मान की बात है, जिसे इस तरह के प्रायोजित नैरेटिव चलाकर बार-बार कटघरे में खड़ा किया जाता है।
अखिलेश सोलंकी की अपील: इस फर्जी नैरेटिव को तोड़ें और अपने एमपी के सम्मान में इस सच्चाई को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। सत्ता की असली इनसाइड स्टोरी और पुख्ता फैक्ट्स के लिए पढ़ते और देखते रहें—अखिलीक्स (Akhileaks)!



