अखिलीक्स एक्सक्लूसिव डीप डाइव: महाकौशल के सियासी रण में ‘सड़क’ पर संग्राम, भ्रष्टाचार पर अपनों की ही बगावत
सत्ता के दावों और जमीनी हकीकत का तीखा टकराव
मध्य प्रदेश की सियासत में ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम’ के बड़े-बड़े दावों के बीच, जबलपुर से उठी एक बगावती चिंगारी ने सत्ता के गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है। पाटन से कद्दावर भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने अपनी ही सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। यह कदम परोक्ष रूप से PWD मंत्री राकेश सिंह की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा और तीखा सवालिया निशान है। शहपुरा-पाटन मार्ग पर पुल टूटने और खस्ताहाल सड़कों के कारण बने डायवर्जन ने जनता का जो हाल बेहाल किया है, विश्नोई का सोशल मीडिया पर छलका दर्द उसी जनआक्रोश की उपज है। यह महज एक आम शिकायत भर नहीं है, बल्कि उस जमीनी हकीकत का एक बेबाक कबूलनामा है, जहां आम नागरिक अपनी परेशानी के लिए सीधे तौर पर स्थानीय विधायक का कॉलर पकड़ते हैं और सरकार को कोसते हैं, जबकि असल खेल पर्दे के पीछे चल रहा होता है।
कमीशनखोरी का नेक्सस और हाईकोर्ट की मुहर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक विस्फोटक वह आरोप है, जो सीधे तौर पर संस्थागत भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है। विश्नोई ने बिना किसी लाग-लपेट के यह स्पष्ट कर दिया है कि काम लेने की अंधी होड़ में ठेकेदार कम दरों पर टेंडर तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद ‘ठेकेदार के मुनाफे’ और ‘विभागीय रिश्वत’ का जो अनैतिक कॉकटेल तैयार होता है, वह सड़कों की गुणवत्ता को पूरी तरह निगल जाता है।
यह बयान तब और भी गंभीर हो जाता है, जब हम देखते हैं कि हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी प्रदेश की बदहाल सड़कों को लेकर राज्य सरकार और PWD विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। विश्नोई ने बड़ी चतुराई से न्यायपालिका के इसी कड़े रुख का समर्थन करते हुए अपनी ही सरकार के विभागीय अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह स्पष्ट करता है कि कमीशनखोरी का यह दीमक अब बर्दाश्त की सीमा पार कर चुका है।
राकेश सिंह की खामोशी और जवाबदेही पर सीधे सवाल
इस पूरे विवाद में अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल सूबे के ताकतवर PWD मंत्री राकेश सिंह की जवाबदेही पर आकर टिक गया है। जब विपक्ष आरोप लगाता है, तो उसे राजनीतिक बयानबाजी कहकर आसानी से खारिज किया जा सकता है, लेकिन जब आपकी ही पार्टी का एक वरिष्ठ नेता सरेआम यह कहे कि “ठेकेदार की कमाई और विभाग की रिश्वत” के कारण सड़कें बदहाल हैं, तो मंत्री महोदय मौन कैसे साध सकते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि जबलपुर राकेश सिंह का भी अपना राजनीतिक गढ़ है। ऐसे में उनके ही प्रभार वाले विभाग पर अपनों द्वारा लगाए गए इतने संगीन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण न आना, व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि विश्नोई के दावों के अनुसार विभागीय भ्रष्टाचार दिनों-दिन बढ़ रहा है, तो क्या राकेश सिंह इस ‘कमीशनराज’ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जनता और अपने विधायक को जवाब देंगे? सत्ताधारी दल के एक दिग्गज का यह प्रहार महज एक ट्वीट नहीं है, बल्कि यह सीधे मंत्री जी के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है कि ‘सिस्टम’ में चल रहे इस खेल पर अब उन्हें अपनी चुप्पी तोड़कर सामने आना ही होगा।



