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दतिया का डैमेज कंट्रोल और ‘मिशन 2028’ का शंखनाद: ओरछा में सजेगा भाजपा का सबसे बड़ा रणनीतिक दरबार

दतिया के चुनावी रण में पड़ा सियासी तमाचा और सवर्णों की सुलगती नाराजगी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। जब जमीन खिसकती हुई महसूस होती है, तो सियासत को अक्सर फिर उसी चौखट की याद आती है जहां से कभी सत्ता का शिखर नापा गया था। अखिलीक्स (Akhileaks) की इस खास रिपोर्ट में आपका स्वागत है, मैं हूं अखिलेश सोलंकी। पूरे चौदह महीने के लंबे और बेचैन कर देने वाले सन्नाटे के बाद, मध्य प्रदेश भाजपा का सबसे बड़ा रणनीतिक दरबार अब बुंदेलखंड की अयोध्या यानी ‘ओरछा’ में सजने जा रहा है। आगामी 30 और 31 अगस्त को जहां एक तरफ भगवान ‘राजा राम’ की शरण में हिंदुत्व के कोर एजेंडे को नई धार दी जाएगी, वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अगुवाई में जुटने वाले करीब 300 कद्दावर नेता ‘मिशन 2028’ का सबसे आक्रामक ब्लूप्रिंट भी तैयार करेंगे।

दतिया की हार और सवर्णों की नाराजगी का निर्मम पोस्टमार्टम

कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल और राकेश सिंह जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में जब ओरछा के बंद कमरों में मंथन शुरू होगा, तो सबसे गहरी और निर्मम चीरफाड़ दतिया उपचुनाव की हार की होगी। ऐन वक्त पर प्रत्याशी बदलने का जो आत्मघाती प्रयोग संगठन ने किया था, उसकी टीस आज भी नेतृत्व के चेहरे पर साफ पढ़ी जा सकती है। यह हार सिर्फ एक सीट का हाथ से फिसलना नहीं था, बल्कि भाजपा के सबसे पक्के वोट बैंक यानी सवर्ण वर्ग की उबलती हुई नाराजगी का सीधा अलार्म था, जिसकी गूंज अब तक शांत नहीं हुई है। इसी डैमेज कंट्रोल के तहत अब यह तय हो चुका है कि पार्टी के सभी मोर्चों और प्रकोष्ठों को एसी कमरों की सुरक्षित राजनीति से निकालकर सीधे धूल-भरी जमीन पर उतारा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सुलग रही एंटी-इनकंबेंसी को वक्त रहते काबू करना और नेताओं की जमीनी जवाबदेही तय करना है।

जेन-जी (Gen-Z) वोटर और ‘सेवा संकल्प अभियान’ का मेगा प्लान

मौजूदा बिसात पर भाजपा के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द सिर्फ रूठे हुए सवर्ण नहीं हैं, बल्कि वह ‘जेन-जी’ (Gen-Z) वोटर है जो पारंपरिक सियासी नारों और समीकरणों की पकड़ से बिल्कुल बाहर है। ओरछा के इस सियासी महाकुंभ का एक बेहद अहम फोकस इसी नई पीढ़ी की नब्ज थामने पर होगा। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पार्टी जिस ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शंखनाद करने जा रही है, उसका पूरा एक्शन प्लान भी यहीं फाइनल होना है। युवा मोर्चा और जमीनी कैडर को यह दो टूक टारगेट दिया जाएगा कि वे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलें और ग्राउंड पर जाकर युवाओं के बीच डॉ. मोहन यादव सरकार के विजन का सीधा नैरेटिव सेट करें।

सत्ता और संगठन की नई आक्रामक जुगलबंदी

31 अगस्त की दोपहर जब ओरछा का यह सियासी दरबार समेटा जाएगा, तो यह पूरी तरह से तय हो चुका होगा कि मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन की जुगलबंदी अब किस आक्रामक घेराबंदी के साथ आगे बढ़ने वाली है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ओरछा के इस मंथन से निकला अमृत भाजपा के लिए 2028 की राह को कितना आसान बनाता है, या फिर दतिया की हार से उठे सवाल संगठन का यूं ही पीछा करते रहेंगे। क्या आपको लगता है कि सिर्फ बैठकों और अभियानों से भाजपा जेन-जी वोटर्स और नाराज सवर्णों को वापस अपने पाले में ला पाएगी?

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