Exclusive

अखिलीक्स एक्सक्लूसिव: भोपाल में मोहरे, दिल्ली में बिसात… सत्ता के ‘रिमोट कंट्रोल’ की इनसाइड स्टोरी

“सत्ता के गलियारों में जो दिखता है, वो होता नहीं… और जो हकीकत है, वो फाइलों और बंद कमरों की खामोशी में दफ्न है। आप टीवी स्क्रीन पर विपक्ष का हंगामा देख रहे हैं, लेकिन ‘अखिलीक्स’ की इस डीप डाइव में आज हम आपको उस बिसात के पीछे का खेल बताएंगे, जहां मोहरे भले ही भोपाल में पीटे जा रहे हों, लेकिन शह और मात की असली बाजी दिल्ली और लखनऊ में खेली जा रही है।”

मध्य प्रदेश का ‘प्रॉक्सी वॉर’ और निशाने पर योगी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर हाल ही में छोड़े गए ‘रियल एस्टेट’ के सियासी तीरों को महज राज्य स्तर का राजनीतिक विरोध समझने की भूल मत कीजिएगा। यह दरअसल एक बेहद सधा हुआ ‘प्रॉक्सी वॉर’ है। राफेल और हिंडनबर्ग जैसे मुद्दों के बेअसर होने के बाद, विपक्ष ने अब सीधे तौर पर राम मंदिर के नैरेटिव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने के लिए मध्य प्रदेश को अपना नया कुरुक्षेत्र चुना है। डॉ. यादव को अस्थिर करने की यह सोची-समझी कोशिश असल में उस ‘हिंदुत्व’ के अभेद्य किले में सेंध लगाने की साजिश है, जिसके सबसे मुखर और मजबूत स्तंभ खुद योगी आदित्यनाथ माने जाते हैं। यह कोई साधारण आरोप-प्रत्यारोप नहीं है, बल्कि हिंदी पट्टी के सबसे बड़े पॉलिटिकल तिलिस्म को तोड़ने का एक खामोश ‘बैकडोर ऑपरेशन’ है।

दिल्ली मुख्यालय में ‘पावर गेम’ और अड़तालीस घंटे का सस्पेंस
सियासत का असली और सबसे बड़ा भूकंप तो दिल्ली के मुख्यालय में आकार ले रहा है। अगले अड़तालीस घंटे बेहद अहम हैं। नई लिस्ट पूरी तरह से तैयार है, लेकिन पेंच उस जगह फंसा है जहां आम जनता या मीडिया की नजर नहीं है। संगठन के सबसे ताकतवर चेहरे बीएल संतोष को यूपी चुनाव तक ‘एक्सटेंशन’ देना कोई रूटीन प्रशासनिक फैसला नहीं था। यह साफ तौर पर शीर्ष स्तर के उन टॉप 5 नेताओं के बीच चल रही अघोषित खींचतान और ‘पावर बैलेंसिंग’ का सीधा नतीजा है, जिसे आलाकमान हर हाल में साधना चाहता है।
पर्दे के पीछे की सबसे खूंखार और निर्णायक लड़ाई तो सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड की उस एक कुर्सी के लिए लड़ी जा रही है, जिस पर योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस के बीच आमने-सामने का सीधा मुकाबला है। यह सिर्फ एक पद की रेस नहीं है, बल्कि यह तय करने की ऐतिहासिक जंग है कि 2026 के बाद पार्टी के भीतर सत्ता का असली ‘रिमोट कंट्रोल’ और निर्णय लेने की सर्वोच्च ताकत आखिर किसकी मुट्ठी में होगी।

बंगाल में ‘क्लोनिंग प्रोजेक्ट’ और नया योगी मॉडल
इस आंतरिक वर्चस्व की जंग और बदलती ‘पावर डायनेमिक्स’ के बीच, आलाकमान एक नए ‘क्लोनिंग प्रोजेक्ट’ पर बहुत तेजी से काम कर रहा है। ‘योगी मॉडल’ अब सिर्फ उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी अब सिर्फ एक क्षेत्रीय नेता नहीं रहे, बल्कि उन्हें उसी ‘योगी मॉडल’ की कार्बन कॉपी के रूप में गढ़ा जा रहा है। मुगलों के नाम मिटाने से लेकर आक्रामक हिंदुत्व की नई पिच तैयार करने तक, बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण का एक नया ‘चेहरा’ और नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।

तमिलनाडु से पंजाब तक सियासी चक्रव्यूह
राष्ट्रीय राजनीति की इस बिसात का असर राज्यों की क्षेत्रीय हलचलों पर भी साफ दिख रहा है। एक तरफ दक्षिण के तमिलनाडु में अभिनेता विजय की आक्रामक सियासी आंधी ने डीएमके जैसे स्थापित और कद्दावर दलों की जड़ें हिला दी हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान डीपफेक वीडियो और अकाल तख्त के राजनीतिक चक्रव्यूह में बुरी तरह छटपटाते नजर आ रहे हैं।
इन तमाम क्षेत्रीय हलचलों और राजनीतिक बवंडरों का लब्बोलुआब सिर्फ एक है— देश की राजनीति की दशा और दिशा अब विपक्षी दलों के हमलों से नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही इसी वर्चस्व और ‘पॉवर डायनेमिक्स’ की खामोश लड़ाई से तय हो रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button