राज्यसभा का ‘नंबर गेम’: 25 के जाल में फंसी कांग्रेस, MP में ‘ऑपरेशन 3-0’ का खतरा
क्या खड़गे की LoP कुर्सी जाएगी और मोदी सरकार बनेगी ‘अजेय’?
नई दिल्ली/भोपाल | Akhileaks Exclusive
देश की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं रहे, बल्कि सत्ता के भविष्य का फैसला करने वाले हथियार बन चुके हैं। दिल्ली के लुटियंस जोन से लेकर भोपाल के सत्ता गलियारों तक एक ऐसी ‘फाइल’ चर्चा में है, जिसने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। यह कहानी है राज्यसभा के उस ‘नंबर गेम’ की, जो सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी के वजूद और उसकी राष्ट्रीय राजनीति में हैसियत पर सवाल खड़ा कर रहा है।
दरअसल, कांग्रेस इस वक्त राज्यसभा में उस ‘डेंजर ज़ोन’ में पहुंच चुकी है, जहाँ से एक छोटी सी चूक भी उसे भारी नुकसान पहुंचा सकती है। सबसे बड़ा संकट उस ‘25 के जादुई आंकड़े’ का है, जो विपक्ष के नेता (LoP) के पद के लिए जरूरी माना जाता है। अगर कांग्रेस इस संख्या से नीचे गिरती है, तो सिर्फ एक पद नहीं जाएगा, बल्कि उसके साथ वो राजनीतिक रसूख भी खत्म हो जाएगा, जो अब तक उसे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का चेहरा बनाए हुए था।
हालिया राज्यसभा चुनावों के नतीजों ने इस खतरे को और भी गहरा कर दिया है। 37 सीटों के लिए हुए चुनाव में केवल 11 सीटों पर ही वोटिंग हुई, लेकिन इन 11 में से 9 सीटें अकेले एनडीए ने जीत लीं। कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक सीट आई। इस जीत के बाद बीजेपी की संख्या राज्यसभा में 101-102 के आसपास पहुंच चुकी है, और नामांकित व निर्दलीय सदस्यों के समर्थन के साथ यह आंकड़ा 116 के पार जा चुका है। वहीं पूरे एनडीए गठबंधन की ताकत 141 के पार पहुंच चुकी है।
अखिलीक्स को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 तक होने वाले अगले चुनावों के बाद यह आंकड़ा 155 के पार जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि बीजेपी को भविष्य में टीडीपी या जेडीयू जैसे सहयोगियों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राज्यसभा में भी मोदी सरकार एक ऐसी स्थिति में पहुंच सकती है, जहाँ वह अपने दम पर बड़े से बड़े फैसले लेने में सक्षम होगी।
अब बात करते हैं उस राज्य की, जहाँ इस पूरे खेल का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ तैयार हो रहा है—मध्य प्रदेश। यहां राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से एक सीट दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की है, जो 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही है। 230 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए करीब 58 वोटों की जरूरत होती है। बीजेपी के पास 163 विधायक हैं, यानी दो सीटें तो उसके लिए लगभग तय मानी जा रही हैं। लेकिन असली खेल तीसरी सीट का है, जहाँ बीजेपी के पास 47 अतिरिक्त वोट मौजूद हैं।
यहीं से शुरू होता है बीजेपी का संभावित ‘ऑपरेशन 3-0’। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी की नजर कांग्रेस के उन विधायकों पर है, जो पार्टी से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। अगर बीजेपी सिर्फ 11 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम कर लेती है, तो तीसरी सीट भी उसके खाते में जा सकती है। यही वह स्थिति होगी, जो कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो सकती है।
भोपाल के राजनीतिक गलियारों में ‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगर बीजेपी ने मध्य प्रदेश की तीनों सीटें जीत लीं, तो कांग्रेस राज्यसभा में 25 के आंकड़े से नीचे जा सकती है। इसका सीधा असर मल्लिकार्जुन खड़गे के विपक्ष के नेता पद पर पड़ेगा, जो कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा रखता है।
मोदी सरकार के लिए राज्यसभा में बढ़ती ताकत का मतलब सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन बड़े और लंबे समय से अटके हुए विधेयकों को पारित करना भी है, जो अब तक राज्यसभा में बहुमत की कमी के कारण अटके हुए थे। इनमें यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन और वक्फ बोर्ड संशोधन जैसे अहम बिल शामिल हैं। अगर बीजेपी को राज्यसभा में पूर्ण बहुमत मिल जाता है, तो इन कानूनों को पारित करना काफी आसान हो जाएगा।
इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इस गिरते हुए ग्राफ को संभाल पाएगी? क्या राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व अपने विधायकों को एकजुट रख पाएंगे? और सबसे अहम—क्या मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सीट बीजेपी के ‘ऑपरेशन 3-0’ की भेंट चढ़ जाएगी?
राजनीति के इस बदलते समीकरण में एक बात साफ है—अब लड़ाई सिर्फ चुनावी मैदान में नहीं, बल्कि आंकड़ों और रणनीति के स्तर पर भी लड़ी जा रही है। राज्यसभा का यह ‘नंबर गेम’ आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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