मध्य प्रदेश की सियासत में ‘टोटल ओवरहॉल’ का ब्लूप्रिंट
भोपाल से दिल्ली–नागपुर तक तैयार हो चुकी है बदलाव की स्क्रिप्ट
मध्य प्रदेश में दिसंबर की ठंड अपने चरम पर है, लेकिन अगर आप भोपाल के वीआईपी रोड, 74 बंगले या चार इमली इलाक़ों से गुज़रें, तो हवा में एक अजीब-सी तपिश महसूस होगी। यह गर्मी मौसम की नहीं—यह उस सियासी ज्वालामुखी की है, जो फटने के लिए तैयार खड़ा है। राजनीति में कहा जाता है कि इशारे शब्दों से ज़्यादा शोर मचाते हैं, और इस वक्त एमपी के पावर कॉरिडोर्स में जो संकेत मिल रहे हैं, वे किसी छोटे बदलाव के नहीं बल्कि ‘पूर्ण कायाकल्प’ (Total Overhaul) के हैं।
पिछले कुछ हफ्तों से वल्लभ भवन की लिफ्ट से लेकर बीजेपी दफ्तर की कैंटीन तक बस एक ही सवाल गूंज रहा है—
“क्या वो जा रहे हैं? और क्या वो आ रहे हैं?”
आज Akhileaks आपको उन चर्चाओं के पीछे छिपा ब्लूप्रिंट दिखा रहा है—जो भोपाल में नहीं, बल्कि दिल्ली और नागपुर के बंद कमरों में तैयार हो चुका है। यह कहानी सिर्फ कुर्सी बदलने की नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की है। और इस लड़ाई में वे दो लोग साथ आ गए हैं, जिनके बारे में कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।
भाग 2: ‘मामा–महाराज’—2020 का रिप्ले या नई डील?
इस पूरे बदलाव की धुरी बनी है एक अप्रत्याशित केमिस्ट्री—Shivraj Singh Chouhan और Jyotiraditya Scindia।
याद कीजिए 2018–19 का दौर, जब दोनों एक-दूसरे की आंख की किरकिरी हुआ करते थे। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है। 2025 के अंत में एक दिलचस्प ‘मौन सहमति’ आकार ले चुकी है।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में मंत्री बनने के बावजूद मामा का दिल आज भी मध्य प्रदेश की राजनीति में धड़कता है। उन्हें एहसास है कि मौजूदा नेतृत्व (Mohan Yadav) के रहते उनका बनाया वोट-बैंक और सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। दूसरी तरफ महाराज जानते हैं कि संगठन की मजबूत पकड़ के बिना सीएम की कुर्सी सपना ही रहेगी।
यहीं खेला गया मास्टरस्ट्रोक—
यह 2020 का रिप्ले नहीं, बल्कि उसका अपग्रेडेड वर्ज़न है। इस बार लक्ष्य सरकार गिराना नहीं, बल्कि 2028 की हार से सरकार को बचाना है। दोनों दिग्गजों की बॉडी लैंग्वेज—एक-दूसरे के क्षेत्रों में जाना, सार्वजनिक तारीफ़—यह सब संयोग नहीं, बल्कि वेल-प्लान्ड स्क्रिप्ट का हिस्सा है।
भाग 3: मोदी की ‘खामोशी’—सबसे बड़ा सबूत
इस स्क्रिप्ट का सबसे बड़ा ट्विस्ट एक्शन से नहीं, बल्कि इन-एक्शन से आया है—Narendra Modi की मध्य प्रदेश से बढ़ती दूरी।
इतिहास गवाह है—जहां सब कुछ ठीक चलता है, वहां पीएम खुद ब्रांड एम्बेसडर बनते हैं। लेकिन पिछले 6–8 महीनों में क्या आपने पीएम मोदी को किसी बड़े मंच से मौजूदा सीएम की पीठ थपथपाते देखा?
दिल्ली के गलियारों में चर्चा आम है कि PMO को एमपी से जो फीडबैक मिल रहा है, वह संतोषजनक नहीं—योजनाओं का क्रियान्वयन हो या जनता का मूड, ग्राफ नीचे है। और मोदी परफॉरमेंस से समझौता नहीं करते।
राजनीति में नज़रअंदाज़ होना, बर्ख़ास्तगी से भी खतरनाक होता है। यह वही कोल्ड शोल्डर है, जो आने वाले बड़े फैसले का संकेत देता है।
भाग 4: शाह का ‘मिशन मोड’ और रात की बैठकें
जहां पीएम ने चुप्पी साधी है, वहां चाणक्य ने मोर्चा संभाला है—Amit Shah।
जब-जब शाह किसी राज्य में बार-बार उतरते हैं, वहां सरकार की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। एमपी में भी तस्वीर यही है—हवाई अड्डे के लाउंज, होटल के बंद कमरे, कोर टीम के साथ वन-टू-वन मीटिंग्स।
सूत्र बताते हैं कि शाह ने साफ संदेश दे दिया है—Status Quo नहीं चलेगा।
यहां तक कि कई विधायकों से सीधा सवाल किया गया—
“अगर चेहरा बदला जाए, तो आपका रुख क्या होगा?”
यह सवाल अपने आप में जवाब है। दिल्ली मान चुकी है कि अब मरम्मत नहीं, इंजन बदलना पड़ेगा।
भाग 5: वो सीक्रेट सर्वे जिसने नींद उड़ा दी
इतनी हड़बड़ी क्यों? जवाब है उस गोपनीय रिपोर्ट में, जिसे Rashtriya Swayamsevak Sangh और एक निजी एजेंसी ने मिलकर तैयार किया—Akhileaks की भाषा में ‘रेड रिपोर्ट’।
‘घोस्ट ऑब्ज़र्वर्स’ ने प्रदेश के अलग-अलग संभागों में जाकर तीन बड़े अलार्म बजाए—
अफसरशाही का अहंकार: कलेक्टर–एसपी विधायकों तक के फोन नहीं उठाते।
लॉ एंड ऑर्डर: अपराध बढ़ने से व्यापारी–मध्यम वर्ग नाराज़।
ब्रांड फ़टीग: नेतृत्व में वह आक्रामक तेवर नहीं, जो एमपी को चाहिए।
यह रिपोर्ट नागपुर और दिल्ली—दोनों जगह Alarm Bell बनकर गूंजी है। संदेश साफ है: 2028 का रिस्क 2025 में ही खत्म करो।
निष्कर्ष: उलटी गिनती शुरू—सरप्राइज़ तय!
कड़ियां जोड़िए—
मोदी की खामोशी
शाह का मिशन मोड
सीक्रेट सर्वे का डर
मामा–महाराज की नई केमिस्ट्री
जब ये चारों एक लाइन में आते हैं, तो नतीजा एक ही होता है—परिवर्तन।
भोपाल के आसमान में कोहरा जल्द छंटेगा। चर्चा है कि 26 जनवरी के आसपास या बजट सत्र से पहले मध्य प्रदेश को एक बड़ा सरप्राइज़ मिल सकता है।
क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया एमपी का नया, आक्रामक और विकास-उन्मुख चेहरा बनेंगे?
और क्या शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका में लौटेंगे?
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क्योंकि खेल अब आख़िरी ओवर में है, और अगली खबर ब्रेकिंग होने वाली है।



