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मुकुंदपुर का टाइगर अब सियासत में दहाड़ रहा है! — BJP के भीतर बगावत, विंध्य की राजनीति में भूचाल

भूमिका: जंगल से सियासत तक

मुकुंदपुर टाइगर सफारी… कभी विंध्य की शान और मैहर की पहचान।
लेकिन आज ये सिर्फ टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं — बल्कि विंध्य की सत्ता के पावर मैप को बदलने वाला मुद्दा बन चुका है।
रीवा जिले में मिलाने के प्रस्ताव ने न सिर्फ भूगोल की लकीर बदली, बल्कि BJP के भीतर ही बगावत भड़का दी है।
सबसे हैरानी की बात — यह विरोध विपक्ष से नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं से आ रहा है।

मामला क्या है?

27 जनवरी 2025: सीएम हाउस से मैहर कलेक्टर को आदेश — “प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के परिसीमन के जरिए मुकुंदपुर टाइगर सफारी समेत 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने पर अभिमत दें।”

प्रस्तावित पंचायतें: मुकुंदपुर, धोबहट, आमिन, परसिया, आनंदगढ़, पपरा — वर्तमान में मैहर जिले की अमरपाटन विधानसभा में आती हैं।

आदेश की चेन: CM हाउस → कलेक्टर → ADM → SDM → पंचायतों से रिपोर्ट।

मतलब: सीमा बदलना सिर्फ नक्शा नहीं बदलता — यह वोट, विकास फंड और राजनीतिक पकड़ भी बदल देता है।

 

मुकुंदपुर टाइगर सफारी का इतिहास

योजना: 2011–12

उद्घाटन: 2016

व्हाइट टाइगर की कहानी: 1951 में महाराजा मार्तंड सिंह ने ‘मोहन’ नाम का व्हाइट टाइगर पकड़ा — आज मुकुंदपुर का प्रतीक।

MP टूरिज़्म डेटा: सालाना 1.5–2 लाख विज़िटर्स।

लोकल इकोनॉमी: होटल, गाइड, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, महिला SHG हैंडीक्राफ्ट बिज़नेस, किसानों की सब्ज़ियों की सप्लाई।

लोकल भावना: “ये सिर्फ जंगल नहीं… ये विंध्य के गौरव और रोज़गार की नसों में बहने वाला खून है।”

परिसीमन विवादों का इतिहास

2008: सीधी-रीवा बाउंड्री विवाद, गांवों की वापसी।

2014: छतरपुर-पन्ना पंचायत ट्रांसफर पर जन आंदोलन।
सबक: लोकल अस्मिता पर चोट, सत्ता के लिए घाव का काम करती है।

 

BJP में खुला विद्रोह

गणेश सिंह (BJP सांसद, सतना): फेसबुक पोस्ट और CM को पत्र — “अखंडता बचाओ, प्रस्ताव निरस्त करो।”

रामखिलावन पटेल (पूर्व मंत्री, BJP): पब्लिक प्लेटफॉर्म पर विरोध।

यह सिर्फ भूगोल का झगड़ा नहीं — यह सतना बनाम रीवा पावर कैंप का संघर्ष है।

 

 

गणेश बनाम शुक्ल की अदावत

2014 के बाद: गणेश सिंह सतना के निर्विवाद नेता।

बड़े प्रोजेक्ट्स का क्रेडिट — डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के खाते में जाता रहा।

मंच पर दोनों की ठंडी बॉडी लैंग्वेज, क्षेत्रीय दखल पर नाराज़गी।

आज मुकुंदपुर विवाद इन पुराने जख्मों को ताज़ा कर रहा है।

 

विपक्ष की चाल

राजेंद्र कुमार सिंह (कांग्रेस विधायक, अमरपाटन): लोकल अस्मिता और बेरोजगारी पर सबको संगठित होने की अपील।

कांग्रेस का फॉर्मूला: क्रॉस-पार्टी सपोर्ट जुटाकर BJP को विंध्य में डिफेंसिव करना।

 

सोशल मीडिया और जनमत

हैशटैग #SaveMukundpur ट्रेंड में।

BJP बनाम BJP मीम्स वायरल।

लोकल पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स की पोस्ट माहौल गरमा रही है।

नारायण त्रिपाठी: “टाइगर सफारी के साथ 10 गांव खींचकर ले जाने की घिनौनी रणनीति।”

 

 

वोट बैंक और जातीय समीकरण

कुल वोटर: ~14,500

जातीय संरचना: यादव ~32%, ब्राह्मण ~20%, ओबीसी ~25%, आदिवासी ~12%, अन्य ~11%

पिछले चुनाव:

2023 विधानसभा: BJP 58%, कांग्रेस 37%

2019 लोकसभा: BJP 64%, कांग्रेस 33%

असर:

रीवा को फायदा → BJP

सतना कमजोर → कांग्रेस को मुद्दा

 

ग्राउंड रिपोर्ट

गाइड्स: “बच्चों की पढ़ाई होटल की कमाई से हो रही है, रीवा गया तो कौन सुनेगा?”

महिला SHG: टूरिज़्म से हैंडीक्राफ्ट बिज़नेस चलता है।

किसान: “टूरिस्ट हमारी सब्ज़ी लेते हैं, मार्केट खत्म हो जाएगा।”

मुकुंदपुर गेट पर बैनर — “हमारा टाइगर नहीं देंगे।”

पंचायत मीटिंग: CM को सामूहिक पत्र भेजने का फैसला।

 

राजनीतिक रियलिटी चेक

डिप्टी सीएम शुक्ल: रीवा का ताकतवर चेहरा।

सतना कैंप: संगठित होकर बैकफुट से हमला।

CM मोहन यादव के लिए डबल रिस्क:

रीवा को खुश किया → सतना विद्रोह

सतना को खुश किया → शुक्ल की पोज़िशन हिलेगी

 

Akhileaks Verdict

“मुकुंदपुर का बाघ अब सिर्फ सफारी में नहीं, सियासत में भी दहाड़ रहा है। यह विवाद तय करेगा कि विंध्य में BJP एकजुट रह पाएगी या दो टुकड़ों में बंट जाएगी। और सबसे बड़ा सवाल — CM मोहन यादव अपने दो किलों के बीच किसे बचाएंगे? क्योंकि यहां शिकार सिर्फ बाघ का नहीं… यहां शिकार है राजनीतिक विरासत का।”

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