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The Bhopal Files: ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के नीचे चल रहा था गौ-तस्करी का सरकारी खेल

यही वो शहर है जहाँ वल्लभ भवन है, मुख्यमंत्री निवास है और सत्ता के तीनों इंजन—केंद्र, राज्य और नगर निगम—एक ही पार्टी के हाथ में हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल. यही वो शहर है जहाँ वल्लभ भवन है, मुख्यमंत्री निवास है और सत्ता के तीनों इंजन—केंद्र, राज्य और नगर निगम—एक ही पार्टी के हाथ में हैं।
इसे भाजपा की भाषा में “ट्रिपल इंजन की सरकार” कहा जाता है।
यही सरकार गौ-रक्षा की कसमें खाती है।
यही सरकार गाय को माता बताकर वोट मांगती है।
लेकिन Akhileaks की इस विशेष जांच में जो सामने आया है, उसने इस पूरे दावे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

35 करोड़ का ‘आधुनिक’ स्लॉटर हाउस और 26 टन गोमांस

भोपाल के जिंसी इलाके में करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से बना एक आधुनिक स्लॉटर हाउस।
कागजों में यह परियोजना स्मार्ट सिटी की पहचान थी, लेकिन हकीकत में यही जगह बन गई—
प्रतिबंधित गोमांस की कटिंग, पैकिंग और तस्करी का केंद्र
17 दिसंबर 2025 की रात,
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने से एक ट्रक गुजरता है।
ट्रक का नंबर उत्तर प्रदेश का है।
अगर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सतर्क न होते, तो शायद पुलिस को भनक भी न लगती।
ट्रक रोका गया।
ड्राइवर नवेद पकड़ा गया।
ट्रक खुला—और अंदर से निकले 26 टन मांस के पैकेट।
जांच में सामने आया—
यह मांस भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस में काटा गया था और इसे मुंबई–हैदराबाद के रास्ते विदेश भेजने की तैयारी थी।

22 दिन का सन्नाटा… फिर फॉरेंसिक रिपोर्ट का धमाका

पुलिस ने सैंपल लिए।
और फिर… 22 दिन तक सन्नाटा।
लेकिन जब लैब रिपोर्ट आई, तो पूरा खेल बेनकाब हो गया।
यह भैंस का मांस नहीं था
यह प्रतिबंधित गोमांस (Beef) था
यानि—
यह कोई चोरी-छिपे गली में चल रहा धंधा नहीं था,
बल्कि सरकारी प्लांट के अंदर चल रहा संगठित अपराध था।

‘डिजिटल इंडिया’ में हाथ से लिखी पर्ची का खेल

अब आते हैं इस पूरे घोटाले के सबसे खतरनाक हिस्से पर।
नगर निगम के पशु चिकित्सक डॉ. बेनीप्रसाद गौर ने 17 दिसंबर को एक प्रमाण पत्र जारी किया।
इसमें दावा किया गया—
“15 वर्ष से अधिक उम्र की 85 भैंसों का वध किया गया।”
लेकिन सवाल यह है—
हम 2026 में हैं
भोपाल ‘स्मार्ट सिटी’ है
हर चाय की दुकान पर QR कोड है
तो फिर 35 करोड़ के हाई-टेक स्लॉटर हाउस का रिकॉर्ड
कंप्यूटर पर क्यों नहीं था?
क्यों पूरा सिस्टम
हाथ से लिखी पर्चियों पर चल रहा था?
जवाब साफ है।
डिजिटल रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलता।
उसमें लॉग बनता है,
टाइम-स्टैम्प होता है,
और उसे बदला नहीं जा सकता।
लेकिन कागज़ की पर्ची?
फाड़ी जा सकती है
बदली जा सकती है
पिछली तारीख डालकर नया झूठ लिखा जा सकता है
यह पिछड़ापन नहीं था।
यह एक सुनियोजित साजिश थी—
ताकि बछड़ों को कागजों में भैंस बनाया जा सके।

असल खिलाड़ी कौन? – 30 साल से जमे ‘ठेकेदार’ का राज

इस पूरे खेल का मुख्य नाम है—
असलम कुरैशी
कंपनी: Live Stock Food Processors Pvt. Ltd.
यह व्यक्ति पिछले 30 वर्षों से
भोपाल नगर निगम में मृत पशु उठाने का ठेका चला रहा है।
सरकारें बदलीं,
मेयर बदले,
कमिश्नर बदले—
लेकिन असलम कुरैशी का एकाधिकार नहीं टूटा।
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता ज़की का आरोप है—
स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव
मेयर-इन-काउंसिल (MIC) में तो पास कराया गया
लेकिन
नगर निगम परिषद (General Body) में कभी लाया ही नहीं गया
सवाल बड़ा है—
शहर के चुने हुए पार्षदों से क्या छुपाया जा रहा था?
क्या यह टेंडर शुरू से ही फिक्स था? मृत पशु उठाने वाला ठेकेदार अचानक 35 करोड़ का प्रोजेक्ट कैसे चला रहा था?

GST चोरी और इंटर-स्टेट माफिया नेटवर्क

यह मामला सिर्फ आस्था का नहीं है,
यह देश के खजाने पर डाका भी है।
कागजों में दिखाया जाता है—
भैंस का मांस (कम टैक्स)
हकीकत में बेचा जाता है—
गोमांस (अलग कीमत, अलग मार्केट)
यह करोड़ों रुपये की GST चोरी है।
मांस भोपाल में कटता है,
ट्रक यूपी का होता है,
सप्लाई मुंबई और हैदराबाद जाती है।
यह एक Interstate Organized Crime Syndicate है।

Akhileaks की सीधी मांग

ED (प्रवर्तन निदेशालय) की एंट्री हो—
ताकि मनी लॉन्ड्रिंग का सच सामने आए
CBI जांच हो—
क्योंकि लोकल सिस्टम पर सवाल खड़े हो चुके हैं
सरकार और ‘हिंदुत्व’ पर सीधा सवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन से सवाल सीधा है—
जब विपक्ष में थे,
तो गौ-रक्षा के नाम पर सड़कें जाम होती थीं।
आज सत्ता आपके हाथ में है—
तो फिर आपकी राजधानी में गौ-कशी कैसे?
जिस गौ-माता के नाम पर वोट मांगे गए,
आज उसी का मांस
सरकारी गाड़ियों में ढोया जा रहा था।
यह सिर्फ अपराध नहीं,
यह विश्वास की हत्या है।

यूपी बनाम एमपी: एक्शन का फर्क

अगर यही मामला उत्तर प्रदेश में होता—
अब तक बुलडोजर चल चुका होता
गैंगस्टर एक्ट लग चुका होता
लेकिन मध्य प्रदेश में?
भाषण बड़े हैं—
“खाल उधेड़ देंगे”,
“NSA लगाएंगे”
लेकिन ज़मीनी एक्शन कहाँ है?

Akhileaks का अल्टीमेटम

स्मार्ट सिटी में
‘पर्ची गैंग’ नहीं चलेगा।
हमें इंतजार है—
उस बुलडोजर का
उस कार्रवाई का
उस न्याय का
जो गौ-माता को मिलना चाहिए।
मैं हूँ अखिलेश सोलंकी।
Akhileaks चुप नहीं बैठेगा।
जय हिन्द। जय भारत।

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