मध्य प्रदेश

चौंकाने वाला खुलासा: स्वास्थ्य विभाग में ₹300 करोड़ की लूट, घोटाला 5 साल से जारी

जनता को झकझोर देने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग में ऐसा सुनियोजित भ्रष्टाचार हुआ, जिसने न सिर्फ सरकारी खजाने को लूटा, बल्कि जनता की जान और सेहत से भी खिलवाड़ किया।

पाँच साल पहले विभाग ने जिला अस्पतालों में 100 से अधिक मेडिकल जांचों की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंप दी। ठेका मिला एम/एस साइंस हाउस मेडिकल्स प्रा. लि. और एम/एस पीओसीटी सर्विसेज प्रा. लि. को। पर दोनों कंपनियों की साख पहले से ही संदिग्ध थी साइंस हाउस के प्रमोटर भ्रष्टाचार मामले में जेल जा चुके हैं और पीओसीटी को कई राज्यों ने घटिया काम व घोटालों के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

फिर भी, चौंकाने वाली बात है कि इस बदनाम गठजोड़ को ठेका दिया गया, वो भी तब जब यह एकमात्र बोलीदाता (sole bidder) था। दूसरी कंपनी एम/एस मॉलिक्यूलर साइंटिफिक को बिना ठोस कारणों के प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया ताकि उनका वित्तीय प्रस्ताव खोला ही न जा सके। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति में टेंडर दोबारा बुलाया जाता है, मगर यहाँ अधिकारी किसी भी हालत में इस संदिग्ध कंसोर्टियम को ही ठेका सौंपने पर आमादा दिखे।

  • साक्ष्य 1 — जिला़ अस्पताल का टेंडर, जिसे साइंस हाउस और पीओसीटी की मिलीभगत से तैयार किया गया, जिसमें एनएबीएल की त्रुटिपूर्ण दर सूची शामिल थी।
  • साक्ष्य 2 — केवल दो बोलीदाता आए और उनकी तकनीकी बोलियों का मूल्यांकन वित्तीय बोलियाँ खोले जाने से पहले ही कर दिया गया।
  • साक्ष्य 3 — जिनमें से केवल साइंस हाउस और पीओसीटी ही योग्य ठहराए गए और उन्हीं की वित्तीय बोलियाँ खोली गईं।
  • साक्ष्य 4 — अंततः साइंस हाउस और पीओसीटी को ही ठेका दे दिया गया।

2. नकली मानक, फुलाए हुए दाम — सीधे-सीधे 25% की लूट

सबसे साहसिक और चौंकाने वाला खेल हुआ जब टेंडर दस्तावेज़ में CGHS की NABL दरें डाली गईं, जबकि किसी भी सरकारी लैब को NABL मान्यता हासिल ही नहीं थी। NABL दरें सामान्य दर से लगभग 25% अधिक होती हैं। यानी पाँच साल तक करोड़ों रुपये इन कंपनियों को ऐसे झूठे मानकों के आधार पर दिये गए सिर्फ़ जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए।
और हैरानी की बात यह है कि कैग (CAG), जिसका काम ही सरकारी खर्चों में गड़बड़ियों को पकड़ना है, उसने इस साफ-साफ घोटाले पर चुप्पी साध ली।

  • साक्ष्य 1 — जिला अस्पताल टेंडर का पृष्ठ 63, जिसे साइंस हाउस और पीओसीटी की मिलीभगत से तैयार किया गया, जिसमें एनएबीएल की त्रुटिपूर्ण दर सूची शामिल थी।
  • 2705101106447Current CGHS-NABL Rate for Pathology Test taken as Base Rate
    00Current CGHS-NABL Rate for Pathology Test taken as Base Rate
  • साक्ष्य 2 — जिला अस्पताल टेंडर का पृष्ठ 64, जिसे साइंस हाउस और पीओसीटी की मिलीभगत से तैयार किया गया, जिसमें एनएबीएल की त्रुटिपूर्ण दर सूची शामिल थी।
  • साक्ष्य 3 — जिला अस्पताल टेंडर का पृष्ठ 65, जिसे साइंस हाउस और पीओसीटी की मिलीभगत से तैयार किया गया, जिसमें एनएबीएल की त्रुटिपूर्ण दर सूची शामिल थी।
  • 2493683595818LIST OF TEST FOR WHICH CGHS-NABL RATES ARE NOT AVAILABLE
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मरीजों के लिए 250 मुफ्त परीक्षणों वाला सस्ता टेंडर रोका गया, जनता के साथ विश्वासघात किया गया

जांच में सामने आया कि बाद में एक अलग टेंडर एक-तिहाई कीमत में पास हुआ था, जिसमें छिंदवाड़ा, खंडवा और दतिया के मेडिकल कॉलेज एवं ज़िला अस्पताल शामिल थे। लेकिन जनता के हित के खिलाफ़, सरकार ने जानबूझकर इसे लागू ही नहीं होने दिया सिर्फ इसीलिए ताकि महंगे ठेकेदारों का खेल चलता रहे।

और अब तो हद ही हो गई जब विभाग ने हाल ही में इसी विवादित ठेके को फिर से बढ़ा दिया, जबकि राज्य व देशभर में ऐसे कॉन्ट्रैक्ट बेहद कम दरों पर उपलब्ध हैं। साफ है कि लालच और मिलीभगत ने जनता का पैसा बहाने का सिलसिला जारी रखा।

  • साक्ष्य 1 — मेडिकल कॉलेज का टेंडर, जो लागत में एक-तिहाई सस्ता है।
  • साक्ष्य 2 — 13 मेडिकल कॉलेज और उनके अस्पताल इस टेंडर के तहत शामिल किए जाने थे; हालांकि, 2 (छिंदवाड़ा और खंडवा) मेडिकल कॉलेज और उनके संबद्ध अस्पतालों को विभाग द्वारा अब तक चालू नहीं किया गया है, और 1 (दतिया) मेडिकल कॉलेज और उसका संबद्ध अस्पताल केवल आंशिक रूप से कार्यात्मक है।
  • साक्ष्य 3 — मेडिकल कॉलेज टेंडर की दर सूची — जिसमें NABL और Non-NABL दोनों दरें दर्शाई गई हैं।
  • साक्ष्य 4 — साइंस हाउस/पीओसीटी टेंडर और बाद में दिए गए मेडिकल कॉलेज टेंडर की दरों में अंतर।

सैकड़ों करोड़ की लूट , जनता का पैसा वापस कौन दिलाएगा?

तथ्य साफ हैं, पिछले पाँच साल में सैकड़ों करोड़ रुपये इन कंपनियों की जेब में डाले गए हैं। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि खुली मिलीभगत और संगठित लूट है।

सबसे बड़ा सवाल है जनता का लूटा हुआ पैसा कौन वापस दिलवाएगा? क्या घोटाले में खुद शामिल अधिकारी निष्पक्ष जांच कर सकते हैं? जवाब साफ है नहीं।

जनता की मांग , तुरंत कार्रवाई ज़रूरी

  • यह सिर्फ़ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और भरोसे पर सीधा हमला है। तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए:
  • कंपनियों और उनके मालिकों को ब्लैकलिस्ट व डिबार किया जाए।
  • मिलीभगत करने वाले अधिकारियों को पहचानकर बर्खास्त और दंडित किया जाए।
  • स्वतंत्र जांच और वसूली की प्रक्रिया शुरू हो, ताकि जनता का पैसा वापस आए।

जनता से छल, खजाने से लूट स्वास्थ्य विभाग बेनकाब

  • यह खुलासा साबित करता है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार किस हद तक अपनी जड़ें जमा चुका है। जनता इलाज और जांचों के लिए तड़पती रही, जबकि अधिकारी और ठेकेदार जनधन की लूट का जश्न मनाते रहे।
  • यह कोई सामान्य घोटाला नहीं। यह जनता की जान और विश्वास से हुआ सबसे बड़ा धोखा है।

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