हेमंत कटारे पर दोबारा जांच: रेप केस, राजनीति और कोर्ट का आदेश
Akhileaks EXPOSE
क्या सत्ता में बैठा नेता सचमुच बेगुनाह है… या फिर सियासत की चादर ने एक बार फिर इंसाफ को ढक दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे पर दर्ज दुष्कर्म मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया — गिरफ्तारी फिलहाल नहीं होगी, अगर जांच में पूरा सहयोग किया गया।
केस की पृष्ठभूमि
जनवरी 2018 — भोपाल में पत्रकारिता की छात्रा ने हेमंत कटारे पर दुष्कर्म, अपहरण और धमकी के गंभीर आरोप लगाए।
एफआईआर में कहा गया: “दोस्ती के नाम पर शारीरिक शोषण… धमकी… और चुप रहने का दबाव”।
मार्च 2018 — कटारे का पलटवार: छात्रा पर ब्लैकमेलिंग और फिरौती की कोशिश का आरोप।
इसके बाद पीड़िता का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने आरोपों को झूठा बताया… लेकिन कुछ दिनों बाद बयान बदल दिया। क्या यह डर था या सियासी दबाव?
कोर्ट की कार्रवाइयाँ
दिसंबर 2024 — मप्र हाईकोर्ट ने कहा: “कटारे जांच में सहयोग करें, तब तक गिरफ्तारी नहीं।”
2025 — राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब — SC का आदेश: “जांच दोबारा हो, DIG स्तर के अधिकारी की निगरानी में।”
गिरफ्तारी से राहत सिर्फ सहयोग की शर्त पर — वरना गिरफ्तारी संभव।
FSL रिपोर्ट विवाद
मप्र के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाया —
“FSL रिपोर्ट बदली गई है”।
उन्होंने DGP और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
अगर FSL (Forensic Science Lab) रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होती है, तो पूरा केस पलट सकता है।
राजनीति बनाम इंसाफ
हेमंत कटारे — अटेर से कांग्रेस विधायक, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष।
भूपेंद्र सिंह — बीजेपी के फायरब्रांड नेता, अब सीधे निशाने पर कटारे।
भूपेंद्र का आरोप — “कटारे ने मेरी सुपारी देने की कोशिश की थी” (अप्रत्यक्ष बयान, लेकिन भारी सियासी वजन)।
अब सवाल — क्या यह निजी दुश्मनी है या राजनीतिक बदले की कार्रवाई?
और सबसे अहम — क्या कांग्रेस ऐसे नेता के बचाव में खड़ी रहेगी?
असली सवाल
क्या पीड़िता को इंसाफ मिलेगा या मामला फिर सियासत में दब जाएगा?
क्या FSL रिपोर्ट में गड़बड़ी करके किसी नेता को बचाया गया?
क्या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सच्चाई सामने आएगी?
Akhileaks की टिप्पणी
“जो नेता सदन में महिला सुरक्षा के भाषण देते हैं… अपने ऊपर आरोप आने पर राजनीतिक साजिश का ढाल बना लेते हैं।”
SC ने 4 हफ्ते में रिपोर्ट देने का समय दिया है — अगली सुनवाई में तय होगा कि कटारे को राहत मिलेगी या गिरफ्तारी।
आपकी राय:
कॉमेंट में लिखिए — “न्याय चाहिए या नेतागिरी?”
और इस खबर को शेयर कीजिए, ताकि सत्ता के चेहरे बेनकाब हों।



