Exclusive

MP शिक्षा घोटाला: ‘डिजिटल इंडिया’ के नाम पर करोड़ों का खेल? मंत्री–OSD पर कांग्रेस के गंभीर आरोप

नमस्कार, मैं हूँ अखिलेश सोलंकी और आप पढ़ रहे हैं Akhileaks.com, जहां हम खबर नहीं, खबर के पीछे की सच्चाई लेकर आते हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर दीवारें, टाट-पट्टी पर बैठे बच्चे और टूटी छतों के नीचे पढ़ती एक पूरी पीढ़ी… ये तस्वीर सिर्फ गरीबी की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जिसमें ऊपर बैठकर ‘डिजिटल इंडिया’ के नाम पर करोड़ों का खेल खेला जा रहा है। राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन में बैठकर तैयार हुई फाइलों ने अब एक ऐसे कथित ‘डिजिटल डाके’ की कहानी सामने ला दी है, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने स्कूल शिक्षा विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। सीधे तौर पर उंगली उठी है स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उनके OSD वीरेंद्र तिवारी की कार्यप्रणाली पर। आरोप है कि 2023 से 2025 के बीच शिक्षा विभाग के टेंडरों में ऐसा ‘सॉफ्टवेयर’ फिट किया गया, जिसने 60 हजार की मशीन को सरकारी फाइलों में 2 लाख का बना दिया।
कांग्रेस के मुताबिक इस पूरे खेल की शुरुआत होती है साल 2023 में निकाले गए एक बड़े टेंडर से। टेंडर नंबर MPBSE/IT/2023/104… एक ऐसा दस्तावेज, जो अब सवालों के घेरे में है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 42 करोड़ रुपये थी, लेकिन मंत्री कार्यालय के दखल के बाद इसे अचानक बढ़ाकर लगभग 89 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया। सवाल ये है कि आखिर ऐसा कौन सा तकनीकी बदलाव हुआ, जिसने रातों-रात बजट को दोगुना कर दिया? या फिर यह पूरा खेल पहले से ही सेट था?
कांग्रेस का आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह डिजाइन की गईं कि प्रतियोगिता खत्म हो जाए। यानी ‘ओपन बिडिंग’ के नाम पर पहले ही तय कर लिया गया कि कौन जीतेगा और कौन बाहर होगा। इसे ही विपक्ष ‘टेलर-मेड टेंडर’ बता रहा है। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल है।
लेकिन इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ आता है Acer कंपनी के मामले में। कांग्रेस ने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि टेक्निकल इवैल्यूएशन रिपोर्ट में Acer को ‘डिसक्वालिफाई’ कर दिया गया था। यानी वह कंपनी प्रक्रिया से बाहर थी। लेकिन जब स्कूलों में सप्लाई पहुंची, तो वही Acer के CPU और मॉनीटर वहां पाए गए। अब सवाल ये है कि जब कंपनी अयोग्य घोषित हो चुकी थी, तो उसका माल स्कूलों तक कैसे पहुंचा? क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती है या फिर किसी बड़े ‘मैच फिक्सिंग’ का हिस्सा?
विपक्ष का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक ‘पेपर टेंडर’ बनकर रह गई थी, जहां असली खेल फाइलों के बाहर खेला गया। यानी नियम सिर्फ दिखावे के लिए थे और फैसले कहीं और लिए जा रहे थे।
अब आते हैं घोटाले की दूसरी परत पर, जो 2024-25 में इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल यानी स्मार्ट बोर्ड की खरीदी से जुड़ी है। कांग्रेस का दावा है कि जो 75 इंच का स्मार्ट बोर्ड बाजार में 70 से 80 हजार रुपये में उपलब्ध है, उसे विभाग ने 1.80 लाख से 2 लाख रुपये तक में खरीदा। यानी कीमत में करीब 2 से 3 गुना तक का अंतर।
यहां OSD वीरेंद्र तिवारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि स्पेसिफिकेशन में जानबूझकर ऐसे सॉफ्टवेयर लाइसेंस जोड़े गए जिनकी कोई वास्तविक जरूरत नहीं थी। मकसद सिर्फ एक—कीमत बढ़ाना। कांग्रेस इसे ‘250 प्रतिशत का भ्रष्टाचार टैक्स’ बता रही है, जो सीधे जनता की जेब से निकाला गया।
अब सवाल सिर्फ घोटाले का नहीं, बल्कि पैटर्न का है। विपक्ष का कहना है कि जल संसाधन विभाग में फर्जी बैंक गारंटी के बाद अब शिक्षा विभाग में सामने आया यह मामला साबित करता है कि सिस्टम ‘ट्रांसपेरेंट’ नहीं बल्कि ‘परसेंटेज बेस्ड’ हो चुका है। यानी हर टेंडर, हर फाइल, हर मंजूरी का एक ‘रेट’ तय है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले की SIT जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि 2026 में जो ‘सेंट्रलाइज्ड प्रोक्योरमेंट’ का नया मॉडल लाया जा रहा है, वह इसी सिस्टम को और बड़ा बना सकता है। यानी अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह ‘डिजिटल डाका’ और बड़े स्तर पर दोहराया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उनके OSD इन आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे? क्या सरकार इन दस्तावेजी दावों की स्वतंत्र जांच करवाएगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
क्योंकि यह कहानी सिर्फ करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की नहीं है… यह कहानी है उन लाखों बच्चों के भविष्य की, जिनके नाम पर बजट तो पास होता है, लेकिन जमीन पर सिर्फ टूटी कुर्सियां और खाली ब्लैकबोर्ड ही पहुंचते हैं।
और जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते… तब तक ‘Akhileaks’ सवाल पूछता रहेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button