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MP BJP का ‘संगठन’ महासंग्राम

हितानंद आउट, जामवाल इन… सत्ता और संगठन की नई बिसात!

मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त जो हलचल है, वह महज़ एक पद-परिवर्तन नहीं, बल्कि 2028 की रणनीतिक शतरंज की पहली चाल है। जिस चेहरे को पिछले पाँच वर्षों से भाजपा संगठन का अदृश्य पावर हाउस और साइलेंट चाणक्य माना जाता रहा—हितानंद शर्मा—वह अब संगठन महामंत्री नहीं रहे। यह फैसला संघ–दिल्ली के साझा आकलन का नतीजा है, जिसका असर सरकार, संगठन और आगामी चुनावी गणित—तीनों पर पड़ेगा।
क्यों अहम है हितानंद शर्मा की विदाई?
पाँच साल तक संगठन की कमान संभालने के बाद हितानंद शर्मा की वापसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मुख्यधारा में हुई है। उन्हें क्षेत्रीय सह-बौद्धिक प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है और उनका नया केंद्र जबलपुर होगा।
संघ में बौद्धिक प्रमुख की भूमिका वैचारिक प्रशिक्षण, कैडर के मानसिक–वैचारिक विकास और दीर्घकालीन संगठनात्मक मजबूती से जुड़ी होती है। संघ के शताब्दी वर्ष की तैयारी में ऐसे ‘कैडर मास्टर’ की आवश्यकता संघ को अपने भीतर महसूस हो रही थी—यही इस शिफ्ट का बड़ा संकेत है।
चुनावी रिकॉर्ड: क्यों ‘कैडर मास्टर’ कहलाए?
हितानंद शर्मा के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी ने
2023 विधानसभा और
2024 लोकसभा
में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
खासतौर पर ग्वालियर–चंबल अंचल में संगठनात्मक पकड़ और माइक्रो-मैनेजमेंट को उनकी पहचान माना गया। यही वजह है कि उनका जाना सरकार–संगठन के तालमेल पर सीधे सवाल खड़े करता है।
CM मोहन यादव के लिए क्या बदलेगा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और हितानंद शर्मा के बीच एक स्पष्ट कंफर्ट ज़ोन बन चुका था। सरकार–संगठन के पेचीदा मुद्दों में हितानंद शर्मा फायर-फाइटर की भूमिका निभाते थे।
अब नए संगठन महामंत्री के साथ नई ट्यूनिंग, नई कार्यशैली और नई सीमाएं तय होंगी—यानी मुख्यमंत्री के लिए भी री-सेट मोड।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अग्निपरीक्षा
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए यह बदलाव सबसे संवेदनशील है।
संगठन महामंत्री भाजपा की रीढ़ होता है—जो कैडर और नेतृत्व के बीच सेतु बनता है।
हितानंद शर्मा के जाने के बाद हेमंत खंडेलवाल को
नए साझेदार के साथ तालमेल,
कैडर मैनेजमेंट, और
2028 की ज़मीन तैयार करने
जैसी चुनौतियों से जूझना होगा।
फिलहाल कमान: अजय जामवाल
अभी अंतरिम रूप से कमान अजय जामवाल के हाथों में है।
जामवाल कड़े अनुशासन और स्पष्ट निर्देशों के लिए जाने जाते हैं। सवाल यह है—क्या वे लॉन्ग टर्म में रिमोट कंट्रोल संभालेंगे या यह सिर्फ ट्रांज़िशन पीरियड है?
रेस में चार बड़े नाम: किसे मिलेगी बाज़ी?
सूत्रों के मुताबिक, संघ ऐसा चेहरा चाहता है जो चुनावी दबाव झेल सके और कैडर को एकजुट रखे। चर्चा में ये चार नाम सबसे आगे हैं:
अनिल अग्रवाल — प्रबंधक, भारत भारती (बैतूल)
विमल गुप्ता — प्रांत प्रचारक, मध्य प्रांत
राजमोहन — प्रांत प्रचारक, मालवा
निखिलेश माहेश्वरी — संगठन मंत्री, विद्या भारती
हर नाम के साथ अलग-अलग क्षेत्रीय संतुलन, वैचारिक पकड़ और मैदान का अनुभव जुड़ा है—यही चयन को कठिन बनाता है।
आख़िरी फैसला कब?
खबर है कि अंतिम मुहर मार्च में लग सकती है, जब संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रस्तावित है।
संकेत साफ़ हैं—
सुझाव भले भोपाल से जाएं, लेकिन फैसला दिल्ली से ही आएगा।
बड़ा सवाल: शक्ति-संतुलन किस ओर?
क्या नया संगठन महामंत्री सरकार पर ज्यादा हावी होगा?
क्या संगठन का पलड़ा दिल्ली–संघ की तरफ और झुकेगा?
या फिर अजय जामवाल ही लंबे समय तक रिमोट कंट्रोल संभालेंगे?
राजनीति संभावनाओं का खेल है—और Akhileaks की नज़र हर छोटी हलचल पर है।

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