मप्र भाजपा में ‘जामवाल’ युग की आहट! हितानंद की विदाई के बाद अब कौन?
मप्र भाजपा में बड़े बदलाव की तैयारी! हितानंद शर्मा की विदाई के बाद क्या अजय जामवाल होंगे नए संगठन महामंत्री? जानिए संघ के 'मिशन 2028' और निगम-मंडल नियुक्तियों पर पड़ने वाले असर की पूरी इनसाइड स्टोरी सिर्फ अखिलीक्स पर।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘चुनावी शोर’ तो थमा हुआ है, लेकिन भाजपा संगठन के भीतर चल रही हलचल ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। पिछले चार वर्षों से संगठन की कमान संभाल रहे हितानंद शर्मा की विदाई के बाद अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि—मप्र का अगला संगठन महामंत्री कौन होगा?
हितानंद की रवानगी और संघ की नई बिसात
हाल ही में इंदौर में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विशेष बैठक के बाद मप्र भाजपा के संगठन ढांचे में बड़े बदलाव की पटकथा लिख दी गई है। हितानंद शर्मा को ‘क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख’ जैसी नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई है। लेकिन चर्चा उनकी रवानगी से ज्यादा उनके उत्तराधिकारी को लेकर हो रही है। सूत्रों की मानें तो संघ ने अगले चेहरे का नाम लगभग तय कर लिया है, बस औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
अजय जामवाल: अनुभव और अनुशासन का चेहरा
इस वक्त सियासी गलियारों में सबसे ऊपर जो नाम तैर रहा है, वह है अजय जामवाल का। फिलहाल जामवाल मप्र-छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी देख रहे हैं। संघ के भीतर उनके नाम पर गंभीर मंथन चल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका विशाल संगठनात्मक अनुभव और कड़क अनुशासन है।
बताया जा रहा है कि संघ चाहता है कि जामवाल इस जिम्मेदारी को ‘पूर्णकालिक’ तौर पर स्वीकार करें। यदि वे इसके लिए सहमत हो जाते हैं, तो मध्य प्रदेश भाजपा की कार्यशैली में बड़े बुनियादी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
दावेदारों की उड़ी नींद, बायोडाटा हुए बेकार
संगठन में हो रहे इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन नेताओं पर पड़ने वाला है, जो पिछले कई महीनों से ‘निगम-मंडल’ में नियुक्तियों की आस लगाए बैठे थे। पहले जिन नेताओं को पुराने समीकरणों के आधार पर अपनी सीट पक्की लग रही थी, अब उनके माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
‘अखिलीक्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, नया संगठन महामंत्री आने का मतलब है—नई पसंद और नई कसौटी। अब पुराने दांव-पेंच काम नहीं आएंगे, बल्कि संघ और संगठन के सामने अपनी उपयोगिता फिर से साबित करनी होगी। यही कारण है कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग का दौर नए सिरे से शुरू हो गया है।
मिशन 2028: संघ का ‘क्लीन अप’ ऑपरेशन
संघ की इस पूरी कवायद के पीछे सिर्फ चेहरा बदलना मकसद नहीं है, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव रखना है। संघ चाहता है कि प्रदेश संगठन में उसका प्रभाव और अधिक स्पष्ट और गहरा हो। रणनीति साफ है—2028 से पहले संगठन को पूरी तरह ‘चुस्त-दुरुस्त’ और विवादों से मुक्त किया जाए।
निष्कर्ष: बदलाव की भूमिका तैयार
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश भाजपा में एक बड़े अध्याय का अंत और दूसरे की शुरुआत होने जा रही है। संगठन महामंत्री के चयन के साथ ही सत्ता और संगठन के बीच के समीकरण भी बदलेंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजय जामवाल ही वो ‘अंतिम नाम’ होंगे या संघ किसी ‘सरप्राइज’ चेहरे को मैदान में उतारकर सबको चौंका देगा।
राजनीति की हर ‘इनसाइड स्टोरी’ के लिए बने रहिए अखिलीक्स के साथ फोकस।



