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मोहन से ज्यादा मोदी की पसंद: अनुराग जैन को मिला 1 साल का एक्सटेंशन

आज हम बात कर रहे हैं उस ख़बर की, जिसने भोपाल के नौकरशाही गलियारों और दिल्ली दरबार दोनों में हलचल मचा दी है।

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को मिला है एक ऐसा तोहफ़ा, जो अब तक किसी अफसर को सीधे नहीं मिला था — पूरा 1 साल का सेवा विस्तार।
जी हाँ, सिर्फ़ छह महीने का नहीं… बल्कि पूरा एक साल।
यानी अब अगस्त 2026 तक वे मुख्य सचिव बने रहेंगे।

पृष्ठभूमि

31 अगस्त 2025 को अनुराग जैन रिटायर होने वाले थे।
नाम चल रहे थे —

डॉ. राजेश राजौरा

अशोक बर्नवाल

अलका उपाध्याय

लेकिन 28 अगस्त को, प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की यात्रा पर जाने से पहले फाइल पर हरी झंडी दे दी।
शाम को CM मोहन यादव ने X (Twitter) पर बधाई दी और साफ हो गया — अनुराग जैन ही रहेंगे CS।

इतिहास में पहली बार

इकबाल सिंह बैस → 6+6 महीने।

वीरा राणा → 6 महीने।

बी.पी. सिंह → 6 महीने।

लेकिन अनुराग जैन → सीधा 1 साल।
इतिहास में पहली बार।

इसका मतलब साफ है — दिल्ली और भोपाल दोनों एक ही पन्ने पर हैं।
और यह तालमेल 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी है।

पिछली कहानी

याद कीजिए 2024।
वीरा राणा रिटायर हो रही थीं।
सबको लग रहा था — डॉ. राजेश राजौरा बनेंगे नए CS।
अफसरों ने तो बधाई भी दे दी थी।

लेकिन रात 11:30 बजे दिल्ली से मैसेज आया —
“अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाया जाए।”
और रातों-रात आदेश जारी हो गया।

उनकी एंट्री भी अचानक थी… और अब एक्सटेंशन भी ऐन मौके पर।

तीन वजहें

1. दिल्ली कनेक्शन – पीएमओ में जॉइंट सेक्रेटरी, भारतमाला और जन-धन जैसे प्रोजेक्ट्स।

2. फाइनेंस मैनेजमेंट – एक्सिम बैंक चेयरमैन, Zero Budget System लागू।

3. निवेश नीतियाँ – 18 नई पॉलिसी, इन्वेस्टर्स समिट, पब्लिक सर्विस डिलीवरी एक्ट।

 

यही वजह है कि वे मोहन यादव की नहीं, बल्कि मोदी की पसंद बने।

राजनीतिक संकेत

यूपी CS का प्रस्ताव → खारिज।

छत्तीसगढ़ → 3 महीने।

हिमाचल → 6 महीने।

लेकिन मध्यप्रदेश → 1 साल।
साफ संदेश — दिल्ली के लिए MP टॉप प्रायोरिटी है।

चुनौतियाँ

1. सिंहस्थ 2028 – 5 करोड़ लोगों की भीड़, ज़मीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और धर्म–राजनीति।

2. OBC आरक्षण – सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई, चुनावी भविष्य दांव पर।

3. आर्थिक प्रबंधन – कर्ज़, फ्रीबीज़ और Zero Budget System की परीक्षा।

4. नौकरशाही बैलेंस – IAS लॉबी का असंतोष।

निष्कर्ष

यह एक्सटेंशन सिर्फ भरोसा नहीं…
बल्कि दिल्ली–भोपाल की साझा स्ट्रैटेजी का हिस्सा है।
अनुराग जैन मोदी के “Trusted Officer” और मोहन यादव के “Working Partner” हैं।

लेकिन सवाल वही है —
क्या यह भरोसा 2028 तक टिकेगा?
या फिर चुनावी गरमी में यह तालमेल पिघल जाएगा?

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