मध्यप्रदेश में आधी रात का ऑपरेशन – 50 आईपीएस और 14 आईएएस तबादले, इंदौर–भोपाल की पूरी तरह बदली भूमिका
मध्यप्रदेश की नौकरशाही और पुलिस महकमे में सोमवार की रात बड़ा भूचाल आया। सरकार ने एक ही दिन में 50 आईपीएस और 14 आईएएस अफसरों के तबादले कर दिए।
15 जिलों के एसपी, 5 जिलों के कलेक्टर और राजधानी भोपाल–इंदौर की पूरी टीम बदल दी गई।
यह सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि राजनीति और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संकेत भी है।
आईपीएस तबादले – 15 जिलों के नए कप्तान
आधी रात को गृह विभाग ने आदेश जारी किया।
जिले बदले: रीवा, झाबुआ, आलीराजपुर, उमरिया, सीधी, नर्मदापुरम, सतना, पन्ना, बैतूल, श्योपुर, मैहर, खरगोन, हरदा, अशोकनगर और धार।
सबसे अहम: धार जिले में बदलाव — जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा होने वाला है।
एसपी मनोज कुमार सिंह हटाए गए।
नए एसपी: मयंक अवस्थी।
🏛 भोपाल–इंदौर कमिश्नरेट की नई तस्वीर
भोपाल:
जोन-1: आशुतोष (पूर्व एसपी, सतना)
जोन-2: विवेक सिंह (पूर्व एसपी, रीवा)
जोन-3: अभिनव चौकसे (पूर्व एसपी, हरदा)
इंदौर:
डीसीपी जोन-2: कुमार प्रतीक
यानि दोनों बड़े शहरों की कानून-व्यवस्था अब नए चेहरों के हाथों में होगी।
डीआईजी स्तर के तबादले
छतरपुर, बालाघाट, इंदौर ग्रामीण, छिंदवाड़ा, भोपाल ग्रामीण, सागर, रतलाम और रीवा रेंज में नए डीआईजी।
खास ध्यान: बालाघाट के डीआईजी मुकेश श्रीवास्तव का तबादला नक्सल समीक्षा बैठक के दो दिन बाद हुआ।
सीधा संकेत — सरकार नक्सल इलाकों पर फोकस करना चाहती है।
📋 आईएएस तबादले – इंदौर में बड़ा फेरबदल
इंदौर संभागायुक्त: सुदाम खाड़े।
इंदौर कलेक्टर: शिवम वर्मा (पहले नगर निगम आयुक्त)।
उज्जैन संभागायुक्त: आशीष सिंह (पहले इंदौर कलेक्टर)।
बड़वानी कलेक्टर: जयति सिंह।
आगर–मालवा कलेक्टर: प्रीति यादव।
खास बात: पहली बार पति–पत्नी दोनों (शिवम वर्मा और जयति सिंह) को कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली है।
राजनीतिक मायने और संदेश
1. प्रधानमंत्री का दौरा: धार में मोदी जी का कार्यक्रम तय। सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए बदलाव।
2. नक्सल प्रभावित जिले: बालाघाट और आसपास नए अधिकारी भेजकर सख्ती का संदेश।
3. चुनावी साल का संतुलन: इंदौर–भोपाल जैसी पावर सेंट्रिक जगहों पर पूरी नई टीम।
4. व्यक्तिगत समीकरण: कुछ तबादले पारिवारिक या राजनीतिक दबाव से जुड़े।
जैसे: रीवा रेंज के डीआईजी राजेश सिंह को भोपाल भेजा गया क्योंकि उनकी ससुराल सीधी में है।
निष्कर्ष
यह “आधी रात का ऑपरेशन” सिर्फ़ कागजी फेरबदल नहीं है।
यह संकेत है कि सरकार किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती।
नक्सल इलाकों से लेकर प्रधानमंत्री के दौरे और राजधानी की सुरक्षा तक — हर पहलू को ध्यान में रखकर यह बड़ा प्रशासनिक reshuffle किया गया है।
अब देखने वाली बात होगी कि नई टीम कितनी तेजी से तालमेल बैठाती है और सरकार की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है।
Akhileaks का विश्लेषण:
यह कदम बताता है कि मध्यप्रदेश में अब हर प्रशासनिक बदलाव सीधे राजनीति से जुड़ा है। आने वाले महीनों में और भी बड़े reshuffle देखने को मिल सकते हैं।
Akhileaks पर बने रहिए — हम आपको दिखाते रहेंगे सत्ता के अंदर की सच्चाई और उन फैसलों के पीछे की कहानी।



