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लाड़ली बहना योजना में बड़ा मोड़: क्यों अटक गया ₹3000 वाला वादा और कैसे बिहार मॉडल MP की नीति को बदल रहा है?

मध्यप्रदेश की सबसे लोकप्रिय महिलाओं-केंद्रित योजना—लाड़ली बहना—एक अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है।

मध्यप्रदेश की सबसे लोकप्रिय महिलाओं-केंद्रित योजनालाड़ली बहनाएक अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है।

सरकार की ओर से अभी तक 3000 की मासिक किस्त पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन जिन बैठकों, आंतरिक चर्चाओं और नीति-पत्रों की फाइलें Akhileaks ने पढ़ी हैं, वे साफ़ संकेत देती हैं कि योजना का रूप बदलेगालेकिन योजना बंद नहीं होगी।

और दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे परिवर्तन की दिशा में बिहार मॉडल की छाप साफ़ दिखाई दे रही है।

3000 रुपए का वादाराजनीतिक तूफ़ान, आर्थिक हकीकत

चुनावों के दौरान मंचों से कई बार स्पष्ट कहा गया कि लाड़ली बहना की राशि धीरे-धीरे बढ़कर 3000 तक पहुँचेगी।

लेकिन वास्तविकता यह है कि:

  • अभी राज्य 1500/month दे रहा है
  • इस पर मासिक बोझ लगभग 1600 करोड़ है
  • राशि को 3000 करने पर बोझ 40,00045,000 करोड़/वर्ष हो जाएगा
  • राज्य का राजस्व इस वृद्धि को अभी संभाल नहीं सकता

यही कारण है कि न कैबिनेट, न विधानसभा और न ही आधिकारिक प्रेस नोट में इस वादे पर कोई फैसला हुआ है।

सरकार राजनीतिक दबाव और आर्थिक वास्तविकतादोनों के बीच संतुलन तलाश रही है।

तो क्या सरकार योजना बंद करेगी? नहीं। बिल्कुल नहीं।

Akhileaks को उच्चस्तरीय सूत्रों ने बताया है कि

लाड़ली बहना योजना बंद करने का कोई सवाल ही नहीं।”

सरकार यह अच्छी तरह समझती है कि यह योजना सिर्फ एक वेलफेयर स्कीम नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य की धुरी है।

महिलाओं का समर्थन खोना किसी भी सरकार के लिए असंभव जोखिम है।

लेकिन योजना को चलाए रखने के लिए उसे “स्मार्ट रीडिज़ाइन” की ज़रूरत हैऔर यही आने वाले महीनों का असली गेम है।

बिहार मॉडल क्यों चर्चा में है?

बिहार में महिलाओं को मासिक राशि देने के बजाय

एकमुश्त पूँजी (Capital Support) दी जाती है,

ताकि वे अपना कोई छोटा रोजगार शुरू कर सकें।

  • सरकार पर मासिक बोझ नहीं
  • महिलाओं की कमाई स्थायी
  • सरकार के बजट पर नियंत्रण
  • महिलाओं की आर्थिक हैसियत में वास्तविक सुधार

यही मॉडल अब मध्यप्रदेश में भी गंभीरता से विचाराधीन है।

MP का Emerging Model: 1500 + One-Time Capital Option

सूत्रों और उच्चस्तरीय मसौदों के अनुसार आने वाला मॉडल कुछ ऐसा हो सकता है

1. 1500/m की किस्त जारी रहेगी

योजना बंद करने या राशि कम करने का कोई विचार नहीं है।

2. बहनों को 23 साल की राशि एकमुश्त लेने का विकल्प मिलेगा

यानी लगभग 30,00050,000 की पूँजी

जिससे वेव्यवसाय शुरू कर सकें

छोटा व्यापार कर सकें

स्वरोजगार अपनाएँ

या किसी कौशल प्रशिक्षण से जुड़ सकें

3. लाभार्थियों को अन्य सरकारी योजनाओं में ‘अतिरिक्त प्राथमिकता’ मिलेगी

4. योजना को ‘मासिक कैश सपोर्ट’ से हटाकर ‘इकोनॉमिक एम्पावरमेंट मॉडल’ बनाया जाएगा

यानी मदद आय

सब्सिडी पूँजी

किस्त निवेश

यह वही पॉलिसी भाषा है जो देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

मोहन यादव का 2047 विज़नमहिलाएँ होंगी आर्थिक इंजन

विजन डॉक्यूमेंट-2047 में स्पष्ट लिखा है कि MP की अर्थव्यवस्था को:

2029 तक 27.7 लाख करोड़

2047 तक 250 लाख करोड़

तक ले जाना है।

इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को

1.6 लाख से बढ़ाकर 22 लाख करना होगा।

यह संभव तभी है जब

महिलाओं को लाभार्थी नहीं, आर्थिक शक्ति बनाया जाए।

लाड़ली बहना 2.0 इसी अर्थव्यवस्था-केन्द्रित भविष्य की परिभाषा में फिट बैठता है।

क्या 3000 मिलेगा? असली जवाब यह है…

सीधा जवाब

अभी नहीं।

और निकट भविष्य में भी इसकी संभावना बेहद कम है।

लेकिन इसका दूसरा, बड़ा जवाब यह है

3000 नकद नहीं, लेकिन 3000 की क्षमता पूँजी, प्रशिक्षण और उद्यमिता के रूप में दी जाएगी।”

यही मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना का नया अवतार है।

यही नीति का भविष्य है।

और यही वह मॉडल है जिस पर चुपचाप काम चल रहा है।

Akhileaks Verdict

  • योजना बदलेगीराशि नहीं।
  • मॉडल बदलेगालाभ नहीं।
  • दिशा बदलेगीवादा नहीं।

MP लाड़ली बहना योजना अब सिर्फ एक वेलफेयर प्लान नहीं,

बल्कि राज्य की आर्थिक संरचना का हिस्सा बनने जा रही है

बिल्कुल वैसा ही जैसे बिहार ने किया,

लेकिन मध्यप्रदेश के पैमाने पर कहीं बड़े स्तर पर।

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