मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा हेल्थ स्कैम: साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड का काला कारोबार!
स्कैम का चेहरा: साइंस हाउस मेडिकल
मध्यप्रदेश के हेल्थ सेक्टर में बीते कुछ सालों में जो खेल हुआ है, वह किसी भी आम आदमी की जेब और जान दोनों के साथ धोखा है।
इस खेल का सबसे बड़ा नाम है — साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड।
कंपनी पर आरोप है कि उसने न सिर्फ़ मेडिकल टेस्ट पर 25% ज़्यादा वसूली की, बल्कि बिना NABL मान्यता के पाँच साल से ज़िला अस्पतालों में टेस्टिंग का कॉन्ट्रैक्ट संभाल रखा।
आयकर छापेमारी से खुलासा
24 ठिकानों पर छापे: भोपाल, इंदौर और मुंबई।
सुबह 5 बजे 10 गाड़ियों का काफ़िला कंपनी और उसके डायरेक्टर्स के घरों-दफ़्तरों पर पहुँचा।
जप्ती: प्रॉपर्टी पेपर्स, बैंक लॉकर, शेल कंपनियों के दस्तावेज़, ब्लैक मनी इन्वेस्टमेंट के सबूत।
सबसे बड़ा खुलासा: कंपनी की बुक्स में दिल्ली स्थित एक पूर्व IAS अफसर को ₹4.5 करोड़ भेजने का रिकॉर्ड।
अगर यह सच है, तो कहानी केवल बिज़नेस की नहीं — बल्कि ब्यूरोक्रेसी और राजनीति की गहरी सांठगांठ की है।
पुराने केस: रीवा EOW की जांच
मार्च 2024 में EOW ने केस दर्ज किया था।
ऑक्सीजन सिलेंडर: ₹10,999 का खरीदा गया → ₹16,900 में पास किया गया।
टेस्ट किट: ₹68 की → ₹4,156 में खरीदी दिखाई गई।
770 उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी।
आरोपी सूची में थे: CMHO, ADM, डॉक्टर, क्रय समिति सदस्य और तिवारी परिवार।
पैसों का खेल: 300 करोड़ की लूट
हर दिन 40,000 मेडिकल टेस्ट।
हर टेस्ट पर 25% अतिरिक्त वसूली।
अब तक ₹300 करोड़ का बोझ जनता पर डाला गया।
फिर भी हेल्थ डिपार्टमेंट ने टेंडर एक साल और बढ़ा दिया।
सवाल उठता है — दबाव किसका था?
कंपनी नेटवर्क और कर्ज़दारी
साइंस हाउस मेडिकल सिर्फ़ एक कंपनी नहीं, बल्कि पूरा नेटवर्क है:
Science House Advanced Laboratories Network Ltd
Newberg Supertech Science House
Indus Biosystems
Red Cell Technology
Syndicate Diagnostics
Sure Health Labs
HDFC, Indus और Yes Bank से ₹90 करोड़ का लोन लिया।
जुलाई 2025 में CRISIL ने कंपनी को दिया Negative Outlook।
यानी ऊपर से मुनाफ़ा, लेकिन भीतर से कर्ज़ और काले धंधे का खेल।
आरोपी कौन-कौन?
जितेंद्र तिवारी और शैलेंद्र तिवारी (पहले ही गिरफ्तार)
सुनैना तिवारी और अनुजा तिवारी (डायरेक्टर लिस्ट में)
हेल्थ डिपार्टमेंट के अफसर: CMHO, ADM, डॉक्टर
दिल्ली से जुड़े पूर्व IAS अधिकारी का नाम भी सामने
जनता का नुकसान, सिस्टम का खेल
यह स्कैम सिर्फ़ पैसे का नहीं, बल्कि गरीब मरीज की जान से खिलवाड़ का मामला है।
मरीजों ने टेस्ट और दवाइयों पर ज़्यादा पैसा चुकाया।
टैक्सपेयर्स के पैसे से फर्जी टेंडर पास हुए।
पॉलिटिशियन–IAS–हेल्थ माफिया की त्रिकोणीय सेटिंग ने सिस्टम को खोखला किया।
Akhileaks सवाल पूछता है
1. टेंडर बढ़ाने का फ़ैसला किसके दबाव में हुआ?
2. क्या सिर्फ़ तिवारी परिवार ज़िम्मेदार है या पूरा हेल्थ डिपार्टमेंट इसमें शामिल था?
3. क्या जांच उन अदृश्य हाथों तक पहुँचेगी जो इस पूरे स्कैम को चला रहे थे?
निष्कर्ष
साइंस हाउस मेडिकल का यह केस केवल टैक्स चोरी, फर्जी कंपनियों और ओवरप्राइसिंग का मामला नहीं है। यह मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है।
जनता से वसूले गए 300 करोड़ सिर्फ़ पैसे नहीं हैं — यह मरीज की पीड़ा और टैक्सपेयर की कमाई है।
Akhileaks मानता है:
अगर इस हेल्थ स्कैम का इलाज नहीं हुआ, तो आने वाले सालों में जनता की सेहत और सिस्टम दोनों ICU में होंगे।



