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MP की सत्ता का ‘महा-सर्वे’: 500 कुर्सियां, 1000 दावेदार और ‘खुफिया रिपोर्ट’ का डर

मध्य प्रदेश की सियासत में इस वक्त ठंड भले ही बढ़ रही हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ने वाला है।
आने वाले 100 दिन मध्य प्रदेश के नेताओं के लिए किसी ‘करो या मरो’ से कम नहीं होंगे।
वो नियुक्तियां, जो महीनों से फाइलों में दबकर पड़ी थीं, अब धूल झाड़कर फिर से टेबल पर आ चुकी हैं।
सत्ता और संगठन—दोनों स्तरों पर बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है।
दिल्ली दरबार और ‘नितिन नवीन’ का नया गेम प्लान
सबसे पहले बात दिल्ली की।
बीजेपी के नए संगठनात्मक समीकरणों के केंद्र में हैं नितिन नवीन।
जो लिस्ट उन्होंने पहले वापस भेजी थी, वह अब इतिहास बन चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, उनकी ‘नेशनल टीम’ में इस बार मध्य प्रदेश का ज़बरदस्त प्रभाव देखने को मिलेगा।
राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी पाने वालों में जिन नामों की चर्चा सबसे तेज़ है, वे हैं—
कविता पाटीदार
गजेंद्र पटेल
लाल सिंह आर्य
कमल पटेल
अरविंद भदौरिया
इन नामों के साथ संदेश साफ है—
दिल्ली अब मध्य प्रदेश को सिर्फ राज्य नहीं, रणनीतिक पूल के तौर पर देख रही है।
सबसे बड़ी ब्रेकिंग: वीडी शर्मा का दिल्ली ट्रांसफर!
लेकिन सबसे बड़ी हलचल वीडी शर्मा को लेकर है।
खजुराहो से रिकॉर्ड जीत दर्ज करने वाले वीडी शर्मा का दिल्ली ट्रांसफर लगभग तय माना जा रहा है।
अब सवाल ये नहीं है कि वे जाएंगे या नहीं—
सवाल ये है कि मोदी कैबिनेट में उन्हें कौन सा मंत्रालय मिलेगा?
बीजेपी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यह केवल पद नहीं, बल्कि
2029 की बड़ी राजनीतिक तैयारी का संकेत भी है।
‘लाल बत्ती’ की सबसे बड़ी दौड़: विकास प्राधिकरण
अब आते हैं उन पदों पर, जिन पर कार्यकर्ताओं की सबसे ज्यादा नज़र रहती है—
विकास प्राधिकरण (Development Authorities)।
मुख्यमंत्री मोहन यादव
और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच नामों पर मंथन का दौर लगभग पूरा हो चुका है।
Akhileaks को मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक—
भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA)
यहाँ चेतन सिंह चौहान का नाम पत्थर की लकीर माना जा रहा है।
ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA)
ऊर्जावान चेहरा और मौजूदा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल फ्रंट-रनर हैं।
पचमढ़ी विकास प्राधिकरण
यहाँ संतोष पारीख को कमान सौंपी जा सकती है।
जबलपुर, उज्जैन और इंदौर के लिए भी नामों की लिस्ट लगभग सीलबंद बताई जा रही है—
जहाँ इस बार योग्यता से ज्यादा संगठन के प्रति वफादारी को पैमाना बनाया गया है।
ग्वालियर-चंबल फैक्टर: सिंधिया को नजरअंदाज करना नामुमकिन
मध्य प्रदेश की राजनीति में संतुलन ही सबसे बड़ा खेल है।
और ग्वालियर-चंबल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव को दरकिनार करना असंभव।
चर्चा है कि सिंधिया के करीबी—
ओपीएस भदौरिया
इमरती देवी
रघुराज कंसाना
महेंद्र सिंह सिसोदिया
इन सभी को निगम-मंडलों में सम्मानजनक ‘एडजस्टमेंट’ दिया जाएगा।
खासकर भदौरिया को ‘मंत्री दर्जा’ देकर सियासी बैलेंस बनाने की तैयारी है।
इस बार पर्ची नहीं, ‘खुफिया रिपोर्ट’ तय करेगी कुर्सी
इस बार नियुक्तियां सिर्फ सिफारिश या पर्ची पर नहीं हो रही हैं।
नेतृत्व ने एक नया और सख्त फिल्टर लगा दिया है—
👉 Intelligence Report (खुफिया रिपोर्ट)
हर दावेदार की पूरी कुंडली खंगाली गई है—
राजनीतिक छवि
संगठनात्मक रिकॉर्ड
विवादों का इतिहास
छवि साफ है तो कुर्सी मिलेगी,
वरना नाम कितना भी बड़ा हो—घर बैठना पड़ेगा।
यही वजह है कि कई दावेदारों की नींद उड़ी हुई है।
आदिवासी बेल्ट में बड़ा संदेश देने की तैयारी
आदिवासी अंचलों में भी बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो निर्मला बारेला की जगह किसी नए कद्दावर आदिवासी चेहरे को आगे लाया जा सकता है।
वहीं—
कल सिंह भाबर
वेल सिंह भूरिया
नत्थन शाह
जैसे नेता, जो बहुत कम अंतर से चुनाव हारे थे,
उन्हें ‘लाल बत्ती’ देकर सरकार आदिवासी समाज को मजबूत राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।
निष्कर्ष: 100 दिन, सत्ता की ‘दिवाली’
तो कुल मिलाकर—
आने वाले 100 दिन मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘दिवाली’ लेकर आने वाले हैं।
लेकिन यह दिवाली
सिर्फ उन्हीं की होगी,
जिनका नाम इस ‘पवित्र सूची’ में शामिल होगा।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या ये नियुक्तियां 2029 की राह आसान करेंगी?
या फिर अपनों के बीच नई कलह की शुरुआत करेंगी?
Akhileaks हर चाल पर नजर बनाए हुए है।

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