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जय शाह: मैदान के बाहर की सबसे बड़ी जीत की कहानी — जिसने महिला क्रिकेट का भाग्य बदल दिया

भारत में क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि एक भावना, एक धर्म, और एक पहचान है। लेकिन हर दौर में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बल्ला या गेंद नहीं, नीति और दृष्टि से इतिहास बदलते हैं। जय शाह — वही नाम, जिसे कभी “सत्ता का वारिस” कहकर खारिज किया गया, लेकिन जिसने दिखा दिया कि असली नेतृत्व मैदान पर नहीं, सोच के मैदान पर तय होता है।

शुरुआत गुजरात से, दृष्टि वैश्विक तक

2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से शुरुआत करने वाले जय शाह ने 2013 में नरेंद्र मोदी स्टेडियम के मेगा प्रोजेक्ट को आकार दिया — जो आज दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है।
2015 में वह BCCI की फाइनेंस और मार्केटिंग कमेटी में आए, और 2019 में बने भारत के इतिहास के सबसे युवा सचिव।
सिर्फ़ 31 साल की उम्र में उन्होंने उस संस्था की कमान संभाली जो दशकों से राजनीति और विवादों में उलझी हुई थी।

संकट में नेतृत्व: कोविड-काल में भी खेल जारी

2020 का साल पूरी दुनिया के लिए ठहराव लेकर आया।
लेकिन जब सब कुछ बंद था, भारत ने IPL कराया — बायो-बबल में, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से।
यह वही फैसला था जिसने BCCI को वित्तीय स्थिरता दी और दुनिया को दिखाया कि “भारतीय क्रिकेट सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, प्रबंधन का मॉडल” है।

महिला क्रिकेट: सहानुभूति से समानता तक

भारत में महिला क्रिकेट लंबे समय तक हाशिए पर रहा।
2005 में जब टीम वर्ल्ड कप रनर-अप बनी थी, खिलाड़ियों को प्रति मैच केवल ₹1000 रुपये मिलते थे।
न कोई कॉन्ट्रैक्ट, न सम्मान।

जय शाह ने यह सोच बदली।
उन्होंने कहा — “महिला क्रिकेट सिर्फ़ भावना नहीं, भविष्य है।”

2022 में उन्होंने लॉन्च किया Women’s Premier League (WPL) — भारत का पहला महिला IPL।
2023 में लागू की Pay Parity Policy — अब महिला और पुरुष खिलाड़ियों को समान मैच फीस मिलती है।
2024 में महिला टीमों के लिए स्वतंत्र सपोर्ट स्टाफ, एनालिस्ट और मीडिया सेल बनाए गए।

2 नवंबर 2025: जब इतिहास लिखा गया

DY Patil Stadium, नवी मुंबई।
भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका — ICC Women’s ODI World Cup Final।

पूरा देश स्क्रीन के सामने था।
आख़िरी विकेट गिरा, और भारत ने इतिहास रच दिया।
पहली बार भारत ने महिला वर्ल्ड कप जीता।

BCCI ने ₹125 करोड़ का इनाम दिया।
ICC ने ₹40 करोड़ की प्राइज मनी घोषित की।

और जय शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा —

“यह सिर्फ़ एक ट्रॉफी नहीं, यह सोच की जीत है।”

भारतीय क्रिकेट का वैश्वीकरण — जय शाह की नीतियाँ

2024 के दिसंबर में जय शाह बने ICC के सबसे युवा चेयरमैन।
उनका एजेंडा स्पष्ट था —

क्रिकेट को लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक तक ले जाना,

महिला क्रिकेट के लिए ग्लोबल फंड बनाना,

टेस्ट क्रिकेट की प्रतिष्ठा बचाना,

और छोटे देशों को वित्तीय सहायता देना।

पहली मीटिंग में उन्होंने कहा —

> “क्रिकेट अब सिर्फ़ पुरुषों का नहीं, इंसानियत का खेल है।”

वारिस नहीं, व्यवस्थापक

आलोचना भी आई —
कहा गया कि जय शाह ने कभी क्रिकेट नहीं खेला, वो सिर्फ़ राजनीतिक विरासत के प्रतीक हैं।
लेकिन सवाल ये भी है —
क्या शरद पवार, राजीव शुक्ला या लालू यादव ने क्रिकेट खेला था?
फर्क बस इतना है —
कुछ ने कुर्सी को शक्ति समझा, जय शाह ने उसे जिम्मेदारी बनाया।

तीन स्तंभों पर खड़ा भारतीय क्रिकेट

1. आयोजन की क्षमता — दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट सफल आयोजन के साथ।

2. वित्तीय पारदर्शिता — BCCI की आय इतिहास के उच्चतम स्तर पर।

3. महिला सशक्तिकरण — समान अवसर, समान सम्मान।

आज भारतीय क्रिकेट सिर्फ़ मैदान पर नहीं, प्रणाली में भी नंबर वन है।

Akhileaks विश्लेषण: यह जीत किसकी है?

यह कहानी सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक दृष्टि की है —
जो कहती है कि अगर नीयत साफ़ हो, दृष्टि बड़ी हो, और इरादा मजबूत हो, तो आलोचनाएँ भी तालियाँ बन जाती हैं।

जय शाह ने दिखाया कि

“क्रिकेट खेलना ज़रूरी नहीं, क्रिकेट को समझना ज़रूरी है।”

उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को खेलने की ताकत दी —
मैदान पर भी, और मानसिकता में भी।

भारत की महिला क्रिकेट टीम का यह स्वर्णिम अध्याय हमें यह सिखाता है कि
खेल की असली जीत मैदान में नहीं, सोच में होती है।

और इस सोच के पीछे खड़ा है एक नाम —
जय शाह,
जिसने साबित किया कि
“वह व्यक्ति जो बदलाव की दिशा तय करे, वही असली खिलाड़ी है।”

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