GST रिफॉर्म्स और रोजगार योजना: मोदी का 15 अगस्त रोडमैप
क्या यह आर्थिक सुधार है या चुनावी पैकेज?
15 अगस्त की सुबह लाल किले पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया, तो माहौल सिर्फ़ स्वतंत्रता दिवस का नहीं था। भीड़ में उत्साह था, लेकिन पीएम के चेहरे पर आत्मविश्वास और गंभीरता दोनों झलक रहे थे — क्योंकि यह भाषण सिर्फ़ परंपरा नहीं, बल्कि आने वाले महीनों की राजनीतिक और आर्थिक रणनीति का रोडमैप था।
प्रधानमंत्री के दो बड़े ऐलान
1. प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना
1 लाख करोड़ रुपए का पैकेज
3.5 करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा
बेरोज़गारी के नैरेटिव को कंट्रोल करने की कोशिश
2. GST रिफॉर्म्स — दिवाली गिफ्ट
मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ़ दो
टूथपेस्ट, जूते, बर्तन, कपड़े जैसे रोज़मर्रा के सामान 12% से घटकर 5% पर
मिडिल क्लास और लोअर इनकम फैमिली को सीधा फायदा
GST की अब तक की यात्रा
1 जुलाई 2017: GST लागू — 17 टैक्स और 13 उपकर खत्म।
2017 में टैक्सपेयर्स: 65 लाख
2025 में टैक्सपेयर्स: 1.51 करोड़
2020–21 ग्रॉस कलेक्शन: ₹11.37 लाख करोड़
2024–25 ग्रॉस कलेक्शन: ₹22.08 लाख करोड़
मंथली एवरेज: ₹95,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.84 लाख करोड़
ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार का टैक्स बेस दोगुना हुआ, फिस्कल पोजीशन सुधरी, और पारदर्शिता बढ़ी।
नए रिफॉर्म्स से क्या बदलेगा?
1. ढांचागत सुधार: इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर खत्म — यानी कच्चे माल पर ज़्यादा और तैयार माल पर कम टैक्स का असंतुलन हटेगा।
2. टैक्स सरलीकरण:
टू-टियर सिस्टम: एक स्टैंडर्ड स्लैब, एक रियायती स्लैब
रोज़मर्रा की चीज़ों पर टैक्स कम
महंगे इम्पोर्टेड सामान पर फोकस
3. जीवन को आसान बनाना:
छोटे कारोबारियों के लिए टेक-बेस्ड रजिस्ट्रेशन
पहले से भरे हुए रिटर्न
ऑटोमैटिक रिफंड
आम आदमी पर असर
कपड़े, जूते, टूथपेस्ट, बर्तन — सस्ते
छोटे दुकानदारों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का कम बोझ
देशी मैन्युफैक्चरर्स को बढ़त
विदेशी सामान पर निर्भरता कम करने का मौका
त्योहार के सीज़न में खपत बढ़ने का सीधा असर GDP ग्रोथ पर होगा।
चुनौतियाँ और सवाल
क्या स्लैब घटाने से राजस्व नुकसान होगा?
राज्यों को मुआवज़ा चाहिए होगा?
क्या GST काउंसिल इसे तुरंत पास करेगी?
क्या ये सुधार इस वित्त वर्ष में लागू होंगे या सिर्फ़ दिवाली की घोषणाओं तक सीमित रह जाएंगे?
राजनीति का गणित
2017 में GST लागू करने का क्रेडिट बीजेपी लेती है, लेकिन विपक्ष का आरोप रहा — “GST व्यापारी विरोधी है, कॉम्प्लेक्स है, छोटे दुकानदार बर्बाद हुए।”
अब अगर मोदी सरकार स्लैब घटाकर सिस्टम को सरल बनाती है, तो ये नैरेटिव बदल सकता है।
मिडिल क्लास, छोटे व्यापारियों और युवाओं को राहत देना — 2029 के चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक कार्ड होगा।
Akhileaks का विश्लेषण
अगर ये रिफॉर्म्स सही तरीके से लागू हुए तो यह GST लागू होने के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार होगा —
महंगाई कम होगी,
खपत बढ़ेगी,
मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा।
लेकिन अगर यह सिर्फ़ त्योहार का पॉलिटिकल पैकेज है, तो असर चुनावी भाषणों तक ही सीमित रहेगा, आम आदमी की जेब तक नहीं पहुँचेगा।
निष्कर्ष
लाल किले से कैमरा हटता है, लेकिन सवाल हवा में तैरता है —
“टैक्स सिस्टम बदलना सिर्फ़ आंकड़ों का खेल नहीं… ये भरोसा जीतने की राजनीति है। इस दिवाली क्या सच में घर-घर खुशियां आएंगी… या ये भी महंगाई की रोशनी में खो जाएगा?”
लेखक: अखिलेश सोलंकी, एडिटर — Akhileaks.com



