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सिंहस्थ भूमि पर सरकार का सबसे बड़ा प्रशासनिक U-Turn — लैंड पुलिंग मॉडल, विज़न या विचलन?

यह सिर्फ एक नीति नहीं, नेतृत्व की परीक्षा थी

आज Akhileaks पर हम कोई आधिकारिक ब्रीफिंग नहीं पढ़ रहे, कोई सरकारी तर्क नहीं सुन रहे और न ही किसी प्रेस-नोट की पंक्तियाँ दोहरा रहे हैं।
आज कटघरे में सवाल है, मामला सिंहस्थ का है और जवाब मुख्यमंत्री से है।

सवाल सरल नहीं — असल में यह शासन-मनोविज्ञान की परीक्षा है।
क्या सरकार ने आस्था-केंद्रित ज़मीन को इन्फ्रास्ट्रक्चर-इंडस्ट्री की रियल एस्टेट इकाई की तरह देखा?
या इस निर्णय की जड़ में था राजनीतिक क्रेडिट, सिस्टम-ड्रिवन प्रोजेक्टिंग और हाई-लेवल अप्रूवल-गेम?

सिंहस्थ — भूमि नहीं, मान्यता है

उज्जैन की भूमि पर विकास योजनाएँ नई नहीं, परंतु सिंहस्थ का क्षेत्र हमेशा शासन की नहीं, सनातन चेतना की सीमा-रेखा में रहा है।
और यहीं पहला टकराव खड़ा होता है —
क्या निर्णय का आधार “टाइटल” था या “ट्रस्ट”?
क्या ज़मीन मालिक किसान थे या संस्कृति?

जब शासन ज़मीन को प्लॉटिंग यूनिट समझे और समाज उसे पवित्र विरासत — टकराव अपरिहार्य हो जाता है।

मुख्यमंत्री की भूमिका – विज़नरी या मिस-कैल्क्युलेटेड?

मुख्यमंत्री की सार्वजनिक पहचान —
• शिक्षक
• शोधकर्ता
• सांस्कृतिक-समाज समझ वाले नेता

इसी कारण यह प्रश्न अधिक संवेदनशील हो जाता है —

> क्या उन्होंने जनता की नब्ज़ पढ़ी, या केवल प्रезेंटेशन-आधारित विकास मॉडल?

क्या किसान की ज़मीन उनके लिए “सामाजिक-मानसिक स्वामित्व” थी
या “डेवलपमेंटल ब्लूप्रिंट का रॉ-मैटीरियल”?

लैंड पुलिंग को इतनी जल्दी “भव्य मॉडल” क्यों कहा गया?

जनता-प्रथम नीति में राज्य को निर्णय लेने से पहले
सहमति → अध्ययन → संवाद → सांस्कृतिक सत्यापन → नीति-क्रियान्वयन
करना होता है।

पर यहां क्रम उल्टा दिखा —
निर्णय → प्रचार → बचाव → विरोध → रोलबैक

विवाद का सबसे बड़ा प्रश्न — यह निर्णय आया कहाँ से?

तीन संभावनाएँ सामने हैं:

स्रोत संभावना जोखिम

नौकरशाही टेक्नो-डेवलपमेंटल मॉडल सांस्कृतिक असंवेदनशीलता
राजनीतिक नेतृत्व तेज़ क्रेडिट-ओरिएंटेड मॉडल जनभावना बैकलैश
बाहरी कंसल्टेंसी आधुनिक मास्टर-प्लान कॉपी-पेस्ट ग्राउंड-रियलिटी इग्नोर

अगर यह योजना इतनी ही जनहितकारी थी, तो
स्वीकार्यता स्वतः होती — विरोध नहीं।

सबसे महत्वपूर्ण — जनता ने विरोध क्यों चुना?

चार संभावित कारण:

विश्वास की कमी (Credibility Gap)
समुदाय-संवाद की अनुपस्थिति
धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं की उपेक्षा
फ़ील्ड-ग्राउंडिंग पर सिस्टम-ओवर-कॉन्फिडेंस

किसान और संत-समाज पोर्टफोलियो नहीं — स्टेकहोल्डर मालिक हैं।

संघ का संकेत — मौन नहीं, संदेश था

संघ की भूमिका यहाँ निर्णायक क्यों मानी गई?
क्योंकि संघ न तो पब्लिक-प्रोटेस्ट करता है
और न ही तत्काल पब्लिक-एप्रूवल देता है।

संकेत ही संदेश होता है।
और अगर संकेत बदल गया —
तो योजना नहीं, नेतृत्व की धारणा बदलती है।

दिल्ली प्रेजेंटेशन — जनमत की जगह पॉवर-कॉरिडोर?

बिना विवादित भाषा इस्तेमाल किए कुछ कठोर प्रश्न पूछना ज़रूरी है:

क्या जनता की मंजूरी से पहले राजधानी को प्रस्तुति देना आवश्यक था?

क्या यह “Public First” था या “Perception First”?

और सबसे गंभीर —
क्या यह प्रचार-मॉडल था या निर्णय-मॉडल?

Amit Shah Angle — तथ्य या संदर्भ परिभाषा?

मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयान में गृहमंत्री की सहमति का संदर्भ लाया गया।
अब सवाल रिकॉर्ड-आधारित है:

क्या इस दावे का कोई Minutes, Email, Note Sheet, Video-Record मौजूद है?

या यह संदर्भ-आधारित पॉलिटिकल एलाइनमेंट स्टेटमेंट था?

 

नीति वापसी – पराजय या परिपक्वता?

Rollback को तीन तरीकों से देखा जा सकता है:

निष्कर्ष व्याख्या राजनीतिक प्रभाव

संवेदनशील नेतृत्व जनता की आवाज़ प्रमुख सकारात्मक
Damage Control Exit जोखिम समय पर रोक न्यूट्रल
निर्णय चूक विज़न-थिंकिंग गैप नकारात्मक–दीर्घकालिक

मुख्यमंत्री से 12 सार्वजनिक जवाबदेही प्रश्न

1. यह विचार सर्वप्रथम किस स्तर पर उत्पन्न हुआ?

2. क्या इसकी डॉक्यूमेंटेड स्टेकहोल्डर कंसेंट मौजूद है?

3. क्या Social & Cultural Impact Assessment कराया गया?

4. क्या संत-समाज औपचारिक रूप से शामिल किया गया?

5. कितने किसानों से Signed Approval लिया गया?

6. क्या निर्णय में कंसल्टेंसी थॉट-प्रोसेस प्रभावी था?

7. विरोध क़दम दर क़दम बढ़ता रहा — क्यों अनसुना किया गया?

8. दिल्ली प्रेजेंटेशन का Record Transparency कहाँ है?

9. अमित शाह सहमति संदर्भ पर अधिकृत दस्तावेज़ क्या है?

10. Rollback का प्राथमिक कारण क्या दर्ज है?

11. क्या जिम्मेदारी-निर्धारण Action Report जारी होगी?

12. भविष्य में क्या Written Multi-Community Consensus Policy अनिवार्य की जाएगी?

शासन की असली परीक्षा अब शुरू

सिंहस्थ लैंड-पुलिंग योजना कागज से हट चुकी है,
पर जन-मनोविज्ञान से नहीं।

यह मामला किसी योजना की विफलता नहीं —
नेतृत्व की Credibility Stress-Test File है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास आवश्यक है,
पर आस्था-भूमि को “कंस्ट्रक्शन-लॉजिक” नहीं,
“संस्कृति-सम्मति” चाहिए।

इतिहास माफ़ नहीं करता — सिस्टम रिकॉर्ड रखता है।

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