सर क्रीक से कराची तक — दो देशों का एक ही युद्धाभ्यास, क्या आने वाला है कुछ बड़ा?
भारत और पाकिस्तान — दो पड़ोसी देश, जो इतिहास से लेकर भविष्य तक एक-दूसरे के राजनीतिक और सैन्य समीकरण का हिस्सा रहे हैं।
भारत और पाकिस्तान — दो पड़ोसी देश, जो इतिहास से लेकर भविष्य तक एक-दूसरे के राजनीतिक और सैन्य समीकरण का हिस्सा रहे हैं।
लेकिन नवंबर 2025 की शुरुआत में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अरब सागर की लहरों की तरफ खींच लिया।
दोनों देशों ने एक ही समय, एक ही क्षेत्र, और लगभग एक जैसे उद्देश्यों के साथ युद्धाभ्यास शुरू कर दिए —
भारत में “ऑपरेशन त्रिशूल” और पाकिस्तान में “नॉर्दर्न अरब सागर वॉर ड्रिल”।
सवाल उठा — क्या यह केवल संयोग है?
या एक रणनीतिक संकेत… जो बताता है कि उपमहाद्वीप अब “नए युग के सैन्य संवाद” में प्रवेश कर चुका है?
सर क्रीक — दलदल में छिपा बारूद
सर क्रीक — सिर्फ़ एक नदी का नाम नहीं, बल्कि एक 96 किलोमीटर लंबी दलदली सीमा है जो भारत के गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत को अलग करती है।
1947 के विभाजन के बाद से यह इलाका “अनसुलझा विवाद” बना हुआ है।
कभी नक्शे की लकीर बदलती है, तो कभी लहरें।
यहां का हर इंच रणनीतिक है — और हर इंच पर दोनों देशों के दावे हैं।
यही वह इलाका है, जहाँ से कई बार आतंकियों, तस्करों और जासूसों की घुसपैठ हुई।
2008 के मुंबई हमले की शुरुआती गतिविधियाँ भी इसी क्षेत्र से जुड़ी बताई गईं।
अब जब भारत ने इस इलाके में अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया — तो यह सिर्फ़ सैन्य ट्रेनिंग नहीं, बल्कि स्ट्रेटेजिक मैसेज था।
साफ़ संदेश: “अगर सर क्रीक के पानी में हरकत हुई, तो जवाब निर्णायक होगा।”
ऑपरेशन त्रिशूल — भारत की नई रणनीतिक परिभाषा
भारत का यह अभ्यास साधारण नहीं है।
यह एक Tri-Service Integrated Drill है — जिसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों शामिल हैं।
करीब 20,000 सैनिक, 25 युद्धपोत, और 40 एडवांस फाइटर जेट्स इस मिशन का हिस्सा हैं।
इसका उद्देश्य सिर्फ़ युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि तीनों सेनाओं के बीच वास्तविक युद्ध-संचार प्रणाली (Real-Time Data Network) की टेस्टिंग है।
अब युद्ध सिर्फ़ बंदूक या बम से नहीं, बल्कि डेटा और डिसीजन स्पीड से लड़ा जाएगा।
वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने इस अभ्यास को “न्यू नॉर्मल” बताया है —
जहां किसी भी आतंकी कार्रवाई को अब “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।
मतलब, भारत अब सिर्फ़ जवाब नहीं देगा, बल्कि रणनीतिक रूप से पहले से तैयार जवाब रखेगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया — डर, प्रदर्शन और दावा
पाकिस्तान ने भारत की इस गतिविधि के जवाब में
“Northern Arabian Sea War Drill” की घोषणा कर दी।
उसी समुद्री क्षेत्र में — उसी समय सीमा के भीतर।
करीब 6,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र फायरिंग और मिसाइल ड्रिल के लिए आरक्षित किया गया।
यह अभ्यास पाकिस्तान के International Maritime Expo का हिस्सा बताया गया,
लेकिन असल उद्देश्य था — भारत के “ट्रिशूल” को संतुलित करने की कोशिश।
पाक नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने सर क्रीक क्षेत्र का दौरा किया और कहा,
“सर क्रीक से जिवानी तक, पाकिस्तान हर इंच की रक्षा करना जानता है।”
लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है — यह बयान एक प्रतीकात्मक डर का संकेत है।
क्योंकि सर क्रीक और अरब सागर का क्षेत्र अब भारत के सैटेलाइट निगरानी नेटवर्क और कोस्टल रडार ग्रिड से पूरी तरह कवर्ड है।
भारत ने यहां ऐसी 24×7 निगरानी व्यवस्था स्थापित की है, जिससे किसी भी संदिग्ध मूवमेंट को तुरंत ट्रैक किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद का नया अध्याय
पिछले मई में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत अरब सागर में आतंकवादी ठिकानों पर सफल कार्रवाई की थी।
उसने यह दिखा दिया कि भारत अब केवल “रिएक्टिव डिफेंस” नहीं बल्कि “एक्टिव डिटरेंस” की नीति पर काम कर रहा है।
ऑपरेशन त्रिशूल उसी नीति का अगला चरण है —
जहां अभ्यास के ज़रिए तीनों सेनाओं के “मल्टी-डोमेन कॉम्बैट” की तैयारी की जा रही है।
अब अगर भविष्य में कोई आतंकी हमला या सीमा उल्लंघन हुआ —
तो जवाब सिर्फ़ “स्थानीय ऑपरेशन” नहीं होगा, बल्कि “संयुक्त सैन्य प्रतिक्रिया” होगी।
अरब सागर — नया ग्लोबल चेसबोर्ड
यह पूरी कहानी सिर्फ़ भारत-पाक तक सीमित नहीं है।
अरब सागर आज Global Power Game का केंद्र बन चुका है।
चीन जिबूती (Djibouti) में मौजूद है,
रूस मेडागास्कर में अपना नौसैनिक ठिकाना बना रहा है,
अमेरिका की खाड़ी (Gulf) में व्यापक उपस्थिति है,
और ईरान भी अब खुले तौर पर समुद्री उपस्थिति बढ़ा रहा है।
ऐसे माहौल में भारत की पश्चिमी तटरेखा सिर्फ़ “सीमा” नहीं —
बल्कि स्ट्रेटेजिक जियोपॉलिटिकल फ्रंटियर बन चुकी है।
और यह अभ्यास पूरी दुनिया के लिए एक संकेत है —
भारत अब अपनी सुरक्षा सीमाओं को केवल जमीन पर नहीं,
बल्कि समुद्र और आसमान तक विस्तारित कर चुका है।
विश्लेषण: संकेत युद्ध का नहीं, तैयारी का है
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह अभ्यास युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि
“युद्ध की तैयारी की तैयारी” है।
यानी अगर कभी संघर्ष हुआ, तो भारत को
संयुक्त जवाब देने में एक भी सेकंड का विलंब न हो।
इस अभ्यास का दूसरा बड़ा उद्देश्य —
दुश्मन को यह एहसास कराना कि भारत अब डॉमिनेंट प्लेयर है,
रिएक्टिव नहीं।
यह “कोल्ड वॉर” नहीं, बल्कि “कोऑर्डिनेटेड वॉर सिग्नलिंग” है —
जहाँ भारत और पाकिस्तान दोनों बिना गोली चलाए
अपनी तैयारी को संवाद में बदल रहे हैं।
निष्कर्ष: जब तैयारी बोलती है, तो शांति सुनाई नहीं देती
सर क्रीक से कराची तक का यह पूरा भूभाग
अब सिर्फ़ नक्शे की लकीर नहीं, बल्कि साइलेंट डिप्लोमैटिक फ्रंट बन चुका है।
जहाँ बयान, अभ्यास और दौरे — सब कुछ संदेश हैं।
युद्ध हमेशा गोलियों से नहीं शुरू होता।
कभी-कभी वह तब शुरू होता है जब देशों की तैयारी बोलने लगती है।
और आज — भारत और पाकिस्तान, दोनों की तैयारी बोल रही है।
फर्क सिर्फ़ इतना है कि भारत की तैयारी “कंट्रोल्ड पावर” है,
और पाकिस्तान की तैयारी “काउंटर-डर”।



