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भोपाल का गटर गठजोड़: ड्रग्स, MMS, लव जिहाद और विधानसभा की शर्मनाक चुप्पी

 Akhileaks रिपोर्ट

भूमिका: अपराध का गटर… और चुप्पी का लोकतंत्र?

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जिसे अक्सर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन का आदर्श माना जाता है, अब एक ऐसे अपराधी गठजोड़ की चपेट में है जो ड्रग्स, अश्लील MMS, लव जिहाद और ब्लैकमेलिंग का संगठित जाल बुन चुका है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये नहीं कि अपराध हुआ…
सबसे बड़ा सवाल ये है — विधानसभा में इस पर कोई हंगामा क्यों नहीं हुआ?

मुख्य आरोपी: शाहवर उर्फ मछली और यासीन मछली

2 जुलाई 2025 को भोपाल पुलिस ने इन दोनों को NDPS एक्ट, POCSO, आर्म्स एक्ट और IT एक्ट के तहत गिरफ्तार किया।

इनके कब्ज़े से भारी मात्रा में MD ड्रग्स, देशी कट्टा, और 20+ लड़कियों के MMS क्लिप्स बरामद हुए।

आरोप है कि ये लोग TIT कॉलेज परिसर में Zara के नाम पर युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर ड्रग पार्टी में ले जाते थे, जहां उनका शोषण कर वीडियो बनाए जाते थे।

 

राजनीतिक संरक्षण के संकेत: विधानसभा पास और नेताओं के साथ कनेक्शन

शाहवर की गाड़ी पर मध्यप्रदेश विधानसभा पास और प्रेस स्टिकर पाया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में इनकी नज़दीकियां सत्ताधारी बीजेपी नेताओं से साफ दिखाई देती हैं।

FIR में NDPS की धाराएं जानबूझकर कमज़ोर की गईं, जिससे भविष्य में आरोपी कानूनी शिकंजे से आसानी से निकल सकें।

 

सबसे बड़ा अपराध: विधानसभा की चुप्पी

भोपाल जैसा मामला अगर किसी और राज्य में होता — तो विधानसभा में

स्थगन प्रस्ताव आता,

विपक्ष वॉकआउट करता,

महिला विधायक सड़क पर प्रदर्शन करतीं।

लेकिन MP विधानसभा में… सब कुछ सामान्य रहा।

सत्ता पक्ष की ओर से न कोई बयान, न कोई जांच कमेटी।
और विपक्ष — खासतौर पर कांग्रेस — भी पूरी तरह मौन।

क्या ये ब्लैकमेल का मामला है या राजनीतिक सौदा?

Akhileaks को मिले इनपुट्स के अनुसार:

कुछ MMS क्लिप्स में विपक्षी नेताओं के करीबी चेहरे संदिग्ध हैं।

सूत्रों का दावा है कि दोनों प्रमुख दलों के नेताओं को इन वीडियो के ज़रिए ब्लैकमेल किया जा सकता है।

इसलिए विधानसभा में एक “सीक्रेट अंडरस्टैंडिंग” के तहत कोई चर्चा नहीं हुई।

 

Akhileaks की मांग: लोकतंत्र का बचाव जरूरी है

1. FIR में NDPS और POCSO की धाराएं दोबारा जोड़ी जाएं।

2. ATS या CBI जांच सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग में हो।

3. विधानसभा पास जारी करने वाले नेताओं की पहचान उजागर हो।

4. आरोपी नेताओं, अफसरों और पत्रकारों की कॉल डिटेल सार्वजनिक हो।

5. पीड़िताओं को सुरक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए।

 

Akhileaks Verdict: ये सिर्फ अपराध नहीं… लोकतंत्र का बलात्कार है

अगर विधायक सदन में चुप हैं…
अगर विपक्ष डर के मारे मौन है…
अगर सरकार अपराध पर पर्दा डाल रही है…

तो समझिए, ये केवल ड्रग्स और MMS का मामला नहीं —
ये उस लोकतंत्र की हत्या है जिसे हमने वोट से बनाया था।
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