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भोजपुरी बनाम बीजेपी: छपरा से खेसारी का सबसे बड़ा इम्तिहान

जब सिनेमा उतरा सियासत के मैदान में

भैंस चराने से लेकर करोड़पति बनने तक — यह कहानी किसी फिल्म की नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के सबसे नए किरदार की है।
नाम है शत्रुध्न यादव, लेकिन जनता उन्हें जानती है — खेसारी लाल यादव के नाम से।

दिल्ली की गलियों में लिट्टी-चोखा बेचने वाला यह लड़का, भोजपुरी सिनेमा का सुपरस्टार बना।
अब वही स्टार छपरा की सियासी ज़मीन पर बीजेपी के गढ़ को चुनौती देने उतरा है।
और सवाल है — क्या स्टारडम वोट में बदल सकता है?

छपरा: जहां जाति का गणित ही जीत की गारंटी है

सारण जिला, यानी बिहार की राजनीति का दिल।
यहां 2000 के बाद से हुए छह विधानसभा चुनावों में 5 बार NDA और सिर्फ 1 बार RJD जीती है।
इसीलिए इसे भाजपा का अभेद्य किला कहा जाता है।

जातीय समीकरण:

यादव + राजपूत = करीब 35%

वैश्य = 15% (BJP का कोर वोट)

मुस्लिम = 10%

बीते दो दशकों में छपरा की लड़ाई हमेशा रही —
राजपूत बनाम वैश्य या राजपूत बनाम राजपूत।
लेकिन 2025 में तस्वीर बदली है —
अब मुकाबला है यादव बनाम वैश्य।

RJD ने इस बार यादव समाज के खेसारी लाल को टिकट देकर नया समीकरण खड़ा कर दिया है।
उनके सामने बीजेपी की छोटी कुमारी हैं, जो वैश्य समुदाय से आती हैं।

तेजस्वी का दांव: तीन निशाने एक साथ

तेजस्वी यादव ने खेसारी को टिकट देकर सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पूरा नैरेटिव बदला है।
RJD की रणनीति तीन परतों में बंटी है —

भोजपुरी बेल्ट को साधना

बिहार की 67 सीटें भोजपुरी बोलने वाले इलाकों में हैं — यानी 27.6% विधानसभा।
2020 में महागठबंधन ने यहां 38 सीटें (56.7%) जीती थीं, जबकि NDA को 28 मिलीं।
तेजस्वी जानते हैं — भोजपुरी बेल्ट जीतना, बिहार का आधा रास्ता जीतना है।

भाजपा के सेलिब्रेटी नेटवर्क का काउंटर

मनोज तिवारी, रविकिशन, निरहुआ और पवन सिंह — ये सब बीजेपी के प्रचारक चेहरे हैं।
तेजस्वी ने इसका जवाब दिया — “संघर्ष बनाम संस्कृति” के फॉर्मूले से।
BJP जहां परंपरा और हिंदुत्व को चेहरे बना रही थी,
RJD ने एक ऐसे चेहरे को उतारा जो “गरीबी और मेहनत” की कहानी कहता है।

युवा यादव वोट की री-एनर्जी

RJD का यादव वोटबैंक स्थायी है, लेकिन युवा यादवों में नई पहचान की तलाश है।
खेसारी का संघर्ष-कथानक इस भावनात्मक गैप को भरता है।
उनकी कहानी — “भूख से उठे, मंच पर छाए, अब मैदान में उतरे” —
युवा वोटरों के लिए एक प्रतीक बन रही है।

NDA की फूट: राखी गुप्ता फैक्टर

छपरा में BJP की बागी ने भी सियासत का ताप बढ़ा दिया है।
राखी गुप्ता, जिन्हें टिकट नहीं मिला, अब निर्दलीय मैदान में हैं।
रिटायर्ड प्रिंसिपल नरेंद्र तिवारी के शब्दों में —

“अगर राखी गुप्ता मजबूती से लड़ीं, तो NDA का वोट बैंक टूटेगा — और खेसारी का रास्ता आसान होगा।”

 

यानी खेसारी की जीत सिर्फ प्रचार या पॉपुलैरिटी नहीं,
बल्कि NDA की आंतरिक फूट पर भी निर्भर है।

भोजपुरी इंडस्ट्री की राजनीति: पवन बनाम खेसारी

भोजपुरी दुनिया की दो सबसे बड़ी आवाज़ें —
पवन सिंह और खेसारी लाल यादव —
अब सिनेमा से ज़्यादा राजनीति के पोस्टरों पर टकरा रही हैं।

पवन सिंह को BJP टिकट देने की चर्चा थी,
लेकिन पत्नी विवाद और पार्टी मतभेदों के कारण वे पीछे हट गए।
खेसारी मैदान में उतरे — और अब सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई।

“पवन बोले — मैं प्रचार करूंगा, खेसारी बोले — मैं जनता से मिलूंगा।”
भोजपुरी का मंच अब सियासी रणभूमि बन चुका है।

क्या सेलिब्रेटी वोट में बदलता है?

इतिहास कहता है — हर स्टार पॉलिटिक्स में सफल नहीं होता।

रविकिशन ने गोरखपुर जीता

मनोज तिवारी दिल्ली में बीजेपी का चेहरा बने

निरहुआ को जीतने में दो चुनाव लगे

एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन के मुताबिक —

“फैन क्लब वोट बैंक नहीं होते।
जीत का रास्ता स्टारडम से नहीं, बूथ एजेंट से होकर गुजरता है।”

तेजस्वी का प्रयोग: नई RJD, नया नैरेटिव

खेसारी सिर्फ उम्मीदवार नहीं — एक प्रयोग हैं।
तेजस्वी यादव RJD को नई पहचान देना चाहते हैं —
जहां पार्टी सिर्फ जाति नहीं, बल्कि संस्कृति और संघर्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करे।

अगर यह प्रयोग सफल हुआ,
तो यह मॉडल उत्तर प्रदेश और झारखंड तक फैल सकता है।

ग्राउंड मूड: छपरा में सिनेमा बनाम सिस्टम

छपरा की गलियों में खेसारी के पोस्टर फिल्मों की तरह लग रहे हैं।
लोग कहते हैं — “हम कलाकार को नहीं, अपना आदमी चुनेंगे।”
यानी जनता उत्सुक है, लेकिन सावधान भी।

अब यह चुनाव सिर्फ जाति बनाम जाति नहीं,
बल्कि सिनेमा बनाम सिस्टम की जंग बन चुका है।

एपिलॉग: जनता है निर्देशक

भैंस चराने वाला लड़का आज बिहार की राजनीति का प्रतीक बन गया है।
अगर वो जीत गया — तो यह RJD के लिए सेलिब्रेटी-राजनीति का नया मॉडल होगा।
अगर हारा — तो यह याद रहेगा कि राजनीति में स्टार नहीं, स्ट्रक्चर जीतता है।

2025 का बिहार चुनाव इस एक लाइन में सिमटता है —

“अब सियासत में भी फिल्म चल रही है — बस स्क्रिप्ट जनता लिख रही है।”

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