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बहनजी का Comeback Plan: UP की राजनीति में लौट रही है मायावती की सबसे बड़ी चाल

 

18 मंडलों में नाइट कैंप, DM समीकरण सक्रिय… 2027 में MY मॉडल को सीधी चुनौती

 

2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है, लेकिन असली भूंकप वहाँ नहीं दिखता जहाँ कैमरे धरे हैं—वह उठ रहा है वहाँ, जहाँ बहनजी फिर से जमीन नाप रही हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने वर्षों की चुप्पी तोड़ते हुए जिस “Comeback Plan” की शुरुआत की है, वह सिर्फ एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति की सामाजिक संरचना को पूरी तरह बदल देने वाला रोडमैप है। इस बार मायावती न केवल रैली, बयान या प्रेस नोट से लड़ाई लड़ रही हैं… बल्कि उस स्थान पर लौट रही हैं जहाँ बसपा की असली ताकत पैदा हुई थी—गांव, चौपाल, जातीय जनगणना की धड़कन और दलित-मुस्लिम एकजुटता का भावनात्मक मॉडल।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह वापसी साधारण नहीं हो सकती थी। इसलिए बहनजी ने कदम भी साधारण नहीं रखा—एक दशक बाद 18 मंडलों में नाइट कैंपिंग, गांवों में रुकना, कार्यकर्ताओं से रात की बैठकों में खुलकर बातचीत, और जमीनी कार्यकर्ताओं के घरों तक पहुँचना… यह सब बताता है कि मायावती अब सिर्फ राजनीति नहीं कर रहीं, बल्कि अपनी धरोहर पुनर्जीवित कर रही हैं।

 

DM समीकरण: 40% वोट ब्लॉक जो चुनाव उलट सकता है

2011 की जनगणना की मानें तो उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा ‘साइलेंट फोर्स’ है — 21% दलित आबादी, जिसमें अकेले जाटव लगभग 11.25% हैं। यह वही कोर ब्लॉक है जिसने 2007 में बसपा को 206 सीट दिलाने वाली सामाजिक इंजीनियरिंग को जन्म दिया था। दूसरी ओर, यूपी की कुल आबादी में मुसलमान 19.3% हैं—राज्य का दूसरा सबसे बड़ा, और राजनीतिक रूप से सबसे संगठित वोट बैंक।

इन्हीं दो वर्गों के जोड़ से बनता है बहनजी का नया कार्ड—DM समीकरण (Dalit + Muslim)।
यह गठजोड़ लगभग 40% वोट को एक साथ खड़ा कर देता है—जो किसी भी चुनाव को एकतरफा कर देने की क्षमता रखता है।

यही वजह है कि DM मॉडल 2027 की राजनीति का सबसे ठोस हथियार माना जा रहा है—क्योंकि यह समीकरण SP के MY मॉडल की जड़ पर हमला करता है। MY यानी Muslim–Yadav का पारंपरिक ब्लॉक लगभग 29% है। लेकिन DM उससे बड़ा, व्यापक और अधिक सामाजिक रूप से विविध ब्लॉक है।

 

MY मॉडल पर सीधी चोट—सपा के लिए सबसे बड़ा खतरा

समाजवादी पार्टी का MY समीकरण दो स्तंभों पर खड़ा है—
● यादव वोट (लगभग 9–10%)
● मुस्लिम वोट (लगभग 19%)

यह ब्लॉक सपा को मजबूत विपक्ष बनाता रहा है, लेकिन इसमें हमेशा एक मनोवैज्ञानिक असंतुलन रहा—नेतृत्व यादवों का, संख्या मुस्लिमों की। और अब बहनजी इसी असंतुलन पर चोट कर रही हैं।

दलित वोट का भावनात्मक नेतृत्व + मुस्लिम वोट की राजनीतिक सुरक्षा = DM समीकरण।
यह वही बिंदु है जहाँ सपा का MY मॉडल सबसे अधिक संवेदनशील हो जाता है।
अगर “M” यानी मुस्लिम DM ब्लॉक में खिसक गया, तो MY चुनावी रूप से टूट सकता है।

 

बसपा की वापसी का सूत्र: 2007 की याद, 2027 की तैयारी

2007 के बाद बसपा का ग्राफ लगातार गिरा—
● 2012 में 80 सीट
● 2017 में 19 सीट
● 2022 में सिर्फ 1 सीट

लेकिन गिरावट का यह अर्थ नहीं कि दलित समाज बसपा से अलग हो गया। मायावती की अनुपस्थिति ने वह खालीपन पैदा किया जिसे किसी और ने भरने की कोशिश तो की, लेकिन पूरी तरह नहीं कर सके।
2023–24 की रैलियों में रोटियाँ बांधकर आई भीड़ ने यह साफ कर दिया—वोटर बहनजी को भूला नहीं, बस जगाने का इंतजार कर रहा था।

अब वही भीड़ DM समीकरण के साथ मायावती के सामाजिक पुनर्जीवन का आधार बन रही है।

 

18 मंडलों का नाइट कैंप—UP के बूथों में लौट रही नेतृत्व की धमक

बहनजी के Comeback Plan का सबसे बड़ा हिस्सा है—18 मंडलों में नाइट कैंप।
यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि
● कार्यकर्ताओं के घरों में रात गुजारने,
● चौपालों में असली मुद्दों को समझने,
● बूथ स्तर के समीकरणों को पुनर्जीवित करने,
● और दलित–मुस्लिम गठजोड़ को भरोसे की आग से जोड़ने
का अभियान है।

यह रणनीति BJP के बूथ मैनेजमेंट मॉडल की तरह सुनियोजित है, लेकिन भावनात्मक रूप से कांशीराम वाले दौर से प्रेरित है।

 

BJP क्यों असहज है?

● BJP ने 2014 से 2024 तक UP में OBC–Dalit–Non-Yadav वोट का मजबूत गठजोड़ बनाया।
● लेकिन BJP कभी मुस्लिम वोट को आकर्षित नहीं कर सकी।
● DM यदि consolidate होता है, तो BJP की 35–38% स्थिर बढ़त खतरे में आ सकती है।

यही वजह है कि DM मॉडल BJP को भी अंदर से हिला देता है—क्योंकि यह 40% ब्लॉक अगर एक तरफ खड़ा हो गया, तो BJP का गणित बदल सकता है।

2027: निर्णायक लड़ाई DM बनाम MY

यह लड़ाई दो नेताओं की नहीं—दो सामाजिक संरचनाओं की है।
● एक तरफ मायावती का DM ब्लॉक (40%),
● दूसरी तरफ अखिलेश का MY ब्लॉक (29%)।

DM बनाम MY ही असली लड़ाई होगी।
अगर DM मजबूत हुआ, तो बसपा का 2007 वाला अधिराज्य लौट सकता है।
अगर MY बचा रहा, तो SP विपक्ष की धुरी बनी रहेगी।
अगर दोनों टूटे, तो BJP फिर नंबर-1 बन जाएगी।

निष्कर्ष – बहनजी की सबसे बड़ी चाल वापस आ चुकी है

यह Comeback Plan सिर्फ राजनीति नहीं—एक घोषणा है कि मायावती अब फिर उसी फॉर्म में लौटने लगी हैं, जहाँ 2007 की पटकथा लिखी गई थी। दलित–मुस्लिम का नया गठजोड़, नाइट कैंप, बूथ-स्तरीय पुनर्निर्माण और ओवैसी के साथ रणनीतिक संवाद—यह सब संकेत देता है कि 2027 की निर्णायक जंग DM बनाम MY होगी।

और यह जंग तय करेगी कि यूपी की अगली कहानी कौन लिखेगा—
मायावती का पुनरुत्थान या अखिलेश की स्थिरता।

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