Akhileaks Exclusive — DM मॉडल: दिग्विजय क्यों बचा रहे हैं मोहन को? मध्यप्रदेश की सत्ता विज्ञान की सबसे बड़ी फाइल खुली
मध्यप्रदेश की राजनीति में जो दिखाई देता है, वही सच नहीं होता — और जो सच होता है, वह दिखाई नहीं देता। पोस्टर में BJP बनाम कांग्रेस की लड़ाई दिखाई देती है, पर असली युद्ध BJP बनाम BJP का है, और इस युद्ध में कांग्रेस विपक्ष नहीं — सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। Akhileaks उन पैटर्न्स को जोड़कर आज उस सौदे का सच सामने रख रहा है, जिसे हम नाम दे रहे हैं — DM मॉडल।
D = दिग्विजय सिंह
M = मोहन यादव
दो विचारधाराएँ उलट, दो दल विपरीत, लेकिन संकट की हर घड़ी में विपक्ष ही मुख्यमंत्री को बचाता है — और यह पैटर्न इत्तेफाक़ नहीं, सत्ता विज्ञान का बैकडोर मैकेनिज़्म है।
पहला केस — कफ सिरप कांड: सबसे बड़ा संकट, सबसे सुरक्षित बचाव
पूरा प्रदेश उबल रहा था। मुख्यमंत्री पर राजनीतिक बिजली गिरने का सही मौसम था। उम्मीद थी कि विपक्ष CM के इस्तीफे की माँग करेगा। लेकिन प्रेस के सामने दिग्विजय सिंह आते हैं और मोहन यादव का नाम तक नहीं लेते। हमला मुख्य सचिव और केंद्र पर डाल दिया जाता है। मीडिया शोर में रहा, जनता गुस्से में रही — लेकिन संकट मोहन पर नहीं, सिस्टम पर चढ़ा दिया गया। मुख्यमंत्री बिना एक शब्द बोले बच गए। DM मॉडल एक्टिवेशन — पहली बार।
दूसरा केस — GST कैबिनेट क्लैश: BJP ने BJP को घेरा, विपक्ष ने CM को बचाया
कैबिनेट में कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की संयुक्त चुनौती ने सीधे-सीधे मोहन की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। पूरी सरकार समझ गई कि हमला विपक्ष से नहीं, सरकार के भीतर से शुरू हुआ है। और अगले ही दिन फिर प्रेस के सामने दिग्विजय आते हैं — और हमला उन नेताओं पर करते हैं जिन्होंने मोहन को चुनौती दी थी। CM के खिलाफ जो विमर्श चल रहा था, वह रातों-रात प्रहलाद पर भ्रष्टाचार और 20% कमीशन के आरोप में बदल गया। हमला मोहन पर नहीं — मोहन के विरोधियों पर। DM मॉडल एक्टिवेशन — दूसरी बार।
तीसरी परत — जब कांग्रेस का अध्यक्ष BJP के मुख्यमंत्री की रक्षा करता है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कहते हैं —
“शिवराज और उनका समूह मोहन यादव को अस्थिर करने में जुटा है।”
यहीं से पूरा नेटवर्क खुल जाता है।
BJP के भीतर के CM-प्रतिद्वंद्वी → संकट पैदा करते हैं
कांग्रेस और दिग्विजय → बचाव में आते हैं
अब यह सरकार बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री और उनके अंदरूनी विरोधियों की लड़ाई बन जाती है। विपक्ष प्रतिद्वंद्वी दल नहीं — मुख्यमंत्री का कवच बन जाता है।
दिग्विजय मोहन को क्यों बचा रहे हैं? असली जवाब
राजनीति में कोई दया नहीं होती, सिर्फ गणना होती है।
अगर मोहन हटते हैं तो अगला विकल्प तीन हैं —
कैलाश विजयवर्गीय
प्रहलाद पटेल
शिवराज सिंह चौहान
इनमें से कोई भी मुख्यमंत्री बन जाए तो कांग्रेस के लिए 2028 चुनाव बेहद मुश्किल हो जाएगा।
इसलिए कांग्रेस के लिए सबसे सुविधाजनक BJP वही है —
जहाँ सरकार चलती रहे लेकिन CM मजबूत न हो।
कमज़ोर लेकिन स्थिर मुख्यमंत्री = कांग्रेस का भविष्य निवेश।
RSS और BJP हाईकमान को इससे फायदा या नुकसान?
RSS के वैचारिक नजरिए से दिग्विजय की भूमिका स्वीकार्य नहीं।
लेकिन सत्ता प्रबंधन के नजरिए से समीकरण उल्टा है:
मोहन स्थिर रहें → सरकार सुरक्षित
CM बहुत मजबूत न हों → हाईकमान नियंत्रण में
विपक्ष हमले CM पर नहीं, CM के प्रतिद्वंद्वियों पर करे → पार्टी संघर्ष घटे
नतीजा:
RSS इसे विचारधारा नहीं, क्षणिक राजनीतिक लाभ के आधार पर स्वीकार कर रहा है — क्योंकि इससे नुकसान नहीं, फायदा है।
DM मॉडल का असली सार
सरकार का फायदा कांग्रेस का फायदा
CM बचा रहता है, सरकार स्थिर कमजोर CM, भविष्य में BJP में विखंडन की संभावना
हाईकमान नियंत्रण बना रहता है चुनाव में एंटी-इन्कम्बेंसी मोहन पर नहीं जाएगी
BJP के अंदर की बगावत कंट्रोल में शिवराज/कैलाश/प्रहलाद जैसे मजबूत विकल्प sidelined
और सबसे बड़ा झटका यह है —
जनता को दोनों पार्टियाँ लड़ती दिखाई देती हैं,
जबकि डील पर्दे के पीछे चल रही है।
Akhileaks Verdict — सत्ता विज्ञान का सबसे बड़ा सच
सरकार BJP की है
सुरक्षा कांग्रेस की
हमला विपक्ष से नहीं, BJP के भीतर से
और लाभ दोनों दलों का
नुकसान सिर्फ जनता का
MP की राजनीति पोस्टर से नहीं — डील से चल रही है।
DM मॉडल इस प्रदेश का मौन सत्ता-संरक्षक है।



