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मध्यप्रदेश कांग्रेस में ‘जिला लिस्ट’ का धमाका: जयवर्धन का डिमोशन, दिग्विजय की बेइज्ज़ती और पटवारी का पावर-मैप

भोपाल | Akhileaks Exclusive

कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में 71 जिला अध्यक्षों की नई लिस्ट जारी की है।
बाहर से यह एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव नज़र आता है… लेकिन अंदर की कहानी कहीं गहरी है।
यह लिस्ट दरअसल एक पॉलिटिकल विस्फोट है — जिसने साफ कर दिया है कि कांग्रेस में अब असली ताक़त किसके हाथ में है, और किसकी पर पहले ही काट दी गई है।

जयवर्धन सिंह: भविष्य का चेहरा या गुना तक सीमित?

सबसे बड़ा नाम है — जयवर्धन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे।
2018 में कैबिनेट मंत्री रहे जयवर्धन को पार्टी का भविष्य माना जाता था।
कहा जाता था कि वे आगे चलकर प्रदेश अध्यक्ष और यहां तक कि सीएम चेहरे के तौर पर भी उभर सकते हैं।

लेकिन अब?
उन्हें बना दिया गया है सिर्फ़ गुना का जिला अध्यक्ष।

यह इनाम नहीं है, बल्कि सीधा-सीधा डिमोशन है।
जीतू पटवारी ने उनकी पॉलिटिकल उड़ान को ज़िले की सरहद में कैद कर दिया है।

दिग्विजय सिंह: रिश्तों में भी अपमान

यह लिस्ट दिग्विजय सिंह के लिए सिर्फ़ दर्द लेकर आई है।

छोटे भाई लक्ष्मण सिंह पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके हैं।

बेटे जयवर्धन को जिला लेवल तक सीमित कर दिया गया।

और उनके ही रिश्तेदार प्रियव्रत सिंह को ‘असल जिला अध्यक्ष’ बना दिया गया।

यानी यह सीधा संदेश है —
अब कांग्रेस में दिग्विजय की पकड़ काट दी गई है।
उन्हें संगठन में मजबूती नहीं, बल्कि जलील किया गया है।

पटवारी और राहुल की जोड़ी: बाहर संदेश, अंदर मकसद

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को इस खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
लेकिन यह सिर्फ उनका खेल नहीं है।

इसके पीछे राहुल गांधी की सहमति भी है।
याद कीजिए — राहुल ने कहा था कि कांग्रेस अब “बूढ़े घोड़ों” पर नहीं, बल्कि युवाओं पर दांव लगाएगी।

पटवारी ने उसी लाइन को आगे बढ़ाया —

बाहर का मैसेज: “युवाओं को मौका।”

अंदर का मकसद: “चैलेंजर की उड़ान काट दो।”

आदिवासी राजनीति: मरकाम को सीमित करने की रणनीति

इस लिस्ट में एक और बड़ा नाम है — ओंकार सिंह मरकाम।
वे पूर्व मंत्री हैं और कांग्रेस का बड़ा आदिवासी चेहरा।

लेकिन उन्हें भी सिर्फ डिंडौरी का जिला अध्यक्ष बना दिया गया।
यह फैसला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की रणनीति से जुड़ा बताया जा रहा है।

सिंगार नहीं चाहते कि दूसरा बड़ा आदिवासी नेता प्रदेश स्तर पर पनपे।
इसलिए मरकाम को जिला स्तर तक सीमित कर दिया गया।

यानि कांग्रेस में आदिवासी राजनीति भी अब एक ही चेहरे पर टिके रहने वाली है।

तीन बड़े काम: पटवारी का पावर-मैप

इस लिस्ट से पटवारी ने तीन बड़े राजनीतिक काम कर लिए —

1. दिग्विजय सिंह और उनकी विरासत को कमजोर किया।

2. जयवर्धन जैसे भावी सीएम चेहरे को लोकलाइज कर दिया।

3. उमंग सिंगार जैसे सहयोगियों को साधकर अपने लिए सपोर्ट बेस मजबूत कर लिया।

 

यानी यह लिस्ट सिर्फ़ संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि पटवारी का पावर-मैप है।

आगे क्या होगा?

अब सवाल ये है —

क्या दिग्विजय सिंह इस अपमान को चुपचाप झेलेंगे?

क्या जयवर्धन सिंह इस डिमोशन को मानकर चुप रहेंगे, या संगठन के अंदर जवाब देंगे?

क्या मरकाम सचमुच जिला स्तर तक सीमित रह जाएंगे?

आज यह लिस्ट कांग्रेस में शांति का दिखावा कर रही है…
लेकिन सच्चाई यह है कि यही लिस्ट कांग्रेस में अगला भूचाल पैदा करेगी।

Akhileaks Verdict

“कांग्रेस की 71 जिला अध्यक्षों की लिस्ट — बाहर से संगठनात्मक, अंदर से पॉलिटिकल अपमान का चार्जशीट।”

जीतू पटवारी ने राहुल गांधी की सहमति से
दिग्विजय को जलील किया,
जयवर्धन को छोटा किया,
मरकाम को साइडलाइन किया।

यही है कांग्रेस की असली कहानी —
जहाँ पार्टी अपने ही भविष्य के चेहरों को काट रही है…
और अपनी ही विरासत को कमजोर कर रही है।

निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश कांग्रेस में अब भूचाल तय है।

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