21 साल का वनवास खत्म: डॉ. मोहन यादव के मास्टर स्ट्रोक से कैसे हाई-टेक ‘लेक सिटी’ बनेगा भोपाल?
क्या भोपाल के विकास को किसी की नज़र लग गई थी? या सत्ता के गलियारों में फाइलों को दबाए रखने की कोई रवायत बन गई थी? आज हम मध्य प्रदेश की राजधानी में हो रहे उस बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे दशकों से उलझे और अटके हुए फैसलों को धरातल पर उतारने की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अकेले अपने कंधों पर उठा ली है। जो कड़े और बड़े फैसले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने इतने लंबे कार्यकाल में नहीं ले पाए, उन्हें डॉ. मोहन यादव अपने इस छोटे से कार्यकाल में बेहद तेजी से कर के दिखा रहे हैं। आपको याद होगा, अभी कुछ ही दिन पहले पूरे 21 साल के लंबे और थकाऊ इंतजार के बाद राजधानी को ‘सुगम परिवहन सेवा’ की ऐतिहासिक सौगात मिली थी। और अब, इस मास्टरस्ट्रोक के ठीक बाद 21 साल का एक और बड़ा वनवास खत्म हो गया है। जी हां, पूरे दो दशक बाद भोपाल का नया मास्टर प्लान यानी ‘भोपाल विकास योजना-2047’ का बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट अंततः जनता के सामने आ चुका है।
यह नया मास्टर प्लान सिर्फ कागजों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि हमारी झीलों की नगरी को एक आधुनिक और हाई-टेक ‘लेक सिटी’ बनाने का एक मुकम्मल ब्लूप्रिंट है। विकास की इस आंधी में सबसे अच्छी बात यह है कि भोपाल की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता को दांव पर नहीं लगाया गया है। 2005 के पुराने मास्टर प्लान में जहां विकास के लिए लगभग 25 हजार हेक्टेयर जमीन तय की गई थी, वहीं 2047 के इस नए विजन में इसे बढ़ाकर सीधे 61 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया गया है। लेकिन डॉ. मोहन यादव का विजन देखिए, नए ड्राफ्ट में शहर के ‘ग्रीन कवर’ यानी हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 27 प्रतिशत करने का साहसिक फैसला लिया गया है। इसके तहत न सिर्फ हमारे भोजताल, बाघों के इलाके और जंगलों को सहेजा जाएगा, बल्कि भानपुर खंती जैसी बदबूदार और दूषित जगह को एक खूबसूरत गोल्फ कोर्स में तब्दील करने की शानदार तैयारी भी कर ली गई है।
जनता की सहूलियत, रोजगार और शहर की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए इस नए ड्राफ्ट में कई गेमचेंजर प्रावधान किए गए हैं। इसका सबसे बड़ा आकर्षण 51 किलोमीटर लंबा ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ है। यह कोई आम सड़क नहीं होगी, बल्कि यह भोपाल के विकास का नया एक्सप्रेस-वे साबित होगा, जो एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक हब और एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (EKAI) सिटी को आपस में जोड़ेगा। आम जनता और व्यापारियों को सबसे बड़ी राहत देते हुए सरकार ने शहर में ‘मिक्स लैंड यूज’ लागू करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब आपके मकान और दुकान दोनों एक साथ हो सकेंगे, जिससे घर और दफ्तर की दूरी घटेगी और भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था में अपने आप सुधार आएगा। इसके अलावा, बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए चौड़ी सड़कों पर इमारतों की ऊंचाई वाली पुरानी पाबंदियां हटा ली गई हैं। अब ‘असीमित एफएआर’ (FAR) की सुविधा मिलेगी, जिससे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर आसमान छुएगा।
यह ड्राफ्ट केवल ऊंची इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आम आदमी के हितों और शहर की सुरक्षा का भी पूरा पहरा है। यदि आपकी जमीन किसी नए ग्रीन बेल्ट या आमोद-प्रमोद क्षेत्र की जद में आ जाती है, तो घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है; सरकार आपको ‘हरित टीडीआर’ (Green TDR) देगी ताकि आपका नुकसान न हो और आप दूसरी जगह निर्माण का लाभ ले सकें। अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम और मूक-बधिर स्कूलों जैसे चैरिटी के कामों को एफएआर खरीदने की झंझट से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। वहीं, शहर में अवैध निर्माण और कब्जों पर नकेल कसने के लिए पहली बार ‘डिजिटल ट्विन सिटी’ की आधुनिक तकनीक लाई जा रही है। इसके तहत जगह-जगह लगे प्राइवेट सीसीटीवी कैमरों को एक ही नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, मल्टीलेवल पार्किंग बनेगी और 70 फीसदी रहवासियों की रजामंदी से शहर की पुरानी और जर्जर इमारतों का आसानी से पुनर्विकास (Redevelopment) हो सकेगा।
कुल मिलाकर देखें तो, सुगम परिवहन सेवा की वापसी से लेकर इस शानदार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट तक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने फैसलों से यह साबित कर दिया है कि भोपाल अब सिर्फ एक शांत प्रशासनिक राजधानी बनकर नहीं रहेगा, बल्कि देश का एक तेजी से दौड़ता महानगर बनने को पूरी तरह तैयार है।
अखिलीक्स के इस डीप डाइव में इतना ही। लेकिन हम आपसे जानना चाहते हैं—क्या 21 साल बाद आया डॉ. मोहन यादव का यह मास्टर प्लान भोपाल की ट्रैफिक, पार्किंग और अतिक्रमण जैसी बुनियादी बीमारियों का असली इलाज साबित होगा? अखिलीक्स के कमेंट्स सेक्शन में अपनी बेबाक राय जरूर दें!



