Exclusive

MP में 30 करोड़ का ‘राजस्व घोटाला’? सोम डिस्टिलरी का जब्त स्टॉक और सिस्टम की चुप्पी

जब खजाना खाली है, तो सरकार अपनी ही संपत्ति क्यों नहीं बेच रही?

भोपाल | Akhileaks Exclusive

मध्य प्रदेश की सत्ता के गलियारों में इस समय एक ऐसा मामला चर्चा में है, जो सिर्फ एक कंपनी या एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर प्रदेश के राजकोष और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ‘अखिलीक्स’ की पड़ताल में सामने आया यह मामला उस तीस करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से जुड़ा है, जो सरकार की नाक के नीचे पड़ा है, लेकिन उसे वसूलने की कोई ठोस कोशिश नजर नहीं आ रही। ऐसे समय में जब प्रदेश की आर्थिक स्थिति दबाव में है और सरकार सामाजिक योजनाओं के लिए भारी कर्ज उठा रही है, यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि आखिर इस ‘फ्री के राजस्व’ को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।

इस पूरी कहानी के केंद्र में है विवादों में घिरी सोम डिस्टिलरी, जिसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग ने सवा दो लाख पेटी बियर का स्टॉक जब्त किया था। नियमों के मुताबिक यह जब्तशुदा माल अब पूरी तरह सरकार की संपत्ति है और इसका निपटारा कर राजस्व अर्जित किया जाना चाहिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी यह स्टॉक न तो नीलाम किया गया है और न ही बाजार में उतारा गया है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर यह देरी प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है।

कानूनी स्तर पर भी इस मामले में सोम डिस्टिलरी को राहत नहीं मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन वहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली और सर्वोच्च अदालत ने उसे वापस हाईकोर्ट जाने को कहा। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि कंपनी का कानूनी पक्ष कमजोर है और अब अंतिम फैसला भी हाईकोर्ट के स्तर पर ही होना है। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई का ठप पड़े रहना कई तरह के संदेह पैदा करता है।

अब अगर इस पूरे मामले के आर्थिक पहलू को समझें, तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली बन जाती है। जब्त की गई बियर के इस स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यदि सरकार इस स्टॉक को बाजार में बेचती है, तो उस पर लगने वाली करीब 130 प्रतिशत आबकारी ड्यूटी से अतिरिक्त 17 करोड़ रुपये का राजस्व भी सीधे सरकारी खजाने में जा सकता है। यानी कुल मिलाकर यह मामला करीब 30 करोड़ रुपये की सीधी आमदनी का है, जिसे एक प्रशासनिक निर्णय से हासिल किया जा सकता है।

यहीं पर सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के वित्त और आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा की भूमिका को लेकर खड़ा होता है, जो दोनों ही विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक तरफ वे वित्त मंत्री के रूप में राज्य के खजाने की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आबकारी मंत्री के रूप में उन्हें इस तरह के मामलों में त्वरित निर्णय लेना चाहिए। लेकिन इस मामले में उनकी चुप्पी और विभागीय निष्क्रियता कई तरह के सवाल खड़े करती है।

नियमों की बात करें तो मध्य प्रदेश विदेशी मदिरा नियम 18(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि जब्त किए गए माल का शीघ्र निपटारा किया जाना चाहिए, ताकि राजस्व का नुकसान न हो। इसके बावजूद यह स्टॉक लंबे समय से गोदामों में पड़ा हुआ है, जिससे न केवल संभावित राजस्व अटका हुआ है, बल्कि माल के खराब होने का खतरा भी बना हुआ है। यह स्थिति प्रशासनिक अक्षमता के साथ-साथ संभावित मिलीभगत की आशंका को भी जन्म देती है।

सोम डिस्टिलरी पर पहले से ही नकली परमिट और टैक्स चोरी जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में जब अदालतों से भी उसे कोई राहत नहीं मिली है, तो फिर विभाग की यह ‘रहस्यमयी चुप्पी’ और भी सवाल खड़े करती है। क्या यह देरी केवल प्रक्रियात्मक है या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का दबाव या लाभ का समीकरण काम कर रहा है? क्या यह संभव है कि इस जब्त माल को निपटाने में जानबूझकर देरी की जा रही हो, ताकि किसी विशेष पक्ष को फायदा पहुंचाया जा सके?

पूरे मामले में अब नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या विभाग नियमों के अनुसार कार्रवाई कर इस 30 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व को खजाने में लाएगा, या फिर यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा? यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय का मामला नहीं है, बल्कि सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा भी है।

‘अखिलीक्स’ इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर उस तथ्य को सामने लाता रहेगा, जो इस मामले की सच्चाई को उजागर करता है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है, जहां राजस्व और नियमों के बीच संतुलन बनाना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

📢 आपकी राय क्या है?

क्या सरकार को तुरंत जब्त स्टॉक बेचकर राजस्व जुटाना चाहिए?
क्या यह मामला सिर्फ लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल है?
कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।
Akhileaks – यहाँ खबर नहीं, खबर के पीछे का सच सामने आता है। जुड़े रहिए—

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button