विदेश

रमजान में पाकिस्तान की बमबारी पर भड़का भारत, UN में आतंक और अहमदियों पर भी उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र (UN) में 'इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की पड़ोसी देशों में 'इस्लामोफोबिया' की 'काल्पनिक कहानियां गढ़ने की आदत है। भारतीय दूत ने सवाल उठाया कि इस्लामाबाद के अपने ही देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन या रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हवाई बमबारी को कैसे देखा जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने महासभा को संबोधित करते हुए भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया।

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और क्रूरता
राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में अहमदियों के क्रूर दमन, असहाय अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों को आखिर क्या नाम दिया जाएगा?

बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को ऐसे समय पर फटकार लगाई है जब पिछली रात ही पाक ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर 400 लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक अस्पताल पर हवाई हमले का बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए और करीब 250 घायल हुए हैं। यह घटना 16 मार्च की रात करीब 9 बजे हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में हमला किया।

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर पोस्ट करके बताया कि हमला काबुल स्थित ओमिद नामक 2000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल (नशामुक्ति केंद्र) पर हुआ, जहां नशेड़ी मरीजों का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बड़े हिस्से तबाह हो गए, आग लग गई और बचाव दल अब भी शव निकालने और आग बुझाने में जुटे हैं। अधिकांश मृतक और घायल नशे की लत से मुक्ति पा रहे मरीज थे। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और कहा कि अस्पताल साफ तौर पर चिह्नित था। उन्होंने पत्रकारों और राजनयिकों को साइट पर आने का न्योता भी दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर नागरिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भारत पहले भी की मौकों पर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन में अफगानिस्तान का साथ देता आया है।

OIC का दुरुपयोग
भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने 'इस्लामिक सहयोग संगठन' (OIC) को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सुनियोजित कोशिश की है और इस मंच से भारत के खिलाफ बार-बार झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय अपने प्रतिनिधि खुद चुनता है जो उनकी आवाज उठाते हैं।

पाकिस्तान की 'असली फोबिया' और आतंकी मानसिकता
भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का असली 'फोबिया' (डर) भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद मुस्लिम समुदाय सहित सभी भारतीय उठाते हैं। पाकिस्तान का नैरेटिव उसकी उस सांप्रदायिक और आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसे उसने अपने जन्म से ही पाला-पोसा है।

संयुक्त राष्ट्र को नसीहत – 'रिलीजिओफोबिया' पर हो बात
भारत ने स्पष्ट किया कि धर्म का राजनीतिकरण कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि यह ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह केवल एक धर्म (इस्लाम) पर केंद्रित ढांचों से बचे और सभी प्रकार के 'रिलीजिओफोबिया' (धर्म-आधारित घृणा) से निपटने पर ध्यान दे।

हरीश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि धर्म का राजनीतिकरण समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर है। इसकी विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता में है। इसलिए हम ऐसे ढांचों से सावधान रहने की अपील करते हैं जो केवल एक धर्म पर केंद्रित हों।'

भारत ने खुद को हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि 'सर्व धर्म समभाव' यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारत की सभ्यतागत जीवन शैली रही है। भारत ने 1981 के उस घोषणापत्र का भी समर्थन किया जो बिना किसी विशेषाधिकार के सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा करता है।

अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव्स के बजाय संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और हर धर्म के व्यक्ति के लिए समानता और गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण में लगाए।

 

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