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​7 फरवरी का सस्पेंस: आखिर क्यों सोशल मीडिया से गायब हुई मुख्यमंत्री मोहन यादव और नितिन नवीन की मुलाकात की फोटो?

जानिए क्यों मुख्यमंत्री मोहन यादव के सोशल मीडिया से गायब हुई राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की फोटो? देखिए 7 फरवरी की मुलाकात का सबसे बड़ा विश्लेषण सिर्फ अखिलेक्स (Akhileaks) पर।

​​राजनीति के गलियारों में सन्नाटा अक्सर किसी बड़े तूफान की दस्तक होता है। लेकिन जब यह सन्नाटा डिजिटल दुनिया के ‘डिलीट’ बटन से पैदा किया जाए, तो समझ लीजिए कि पर्दे के पीछे की कहानी बहुत गहरी है। हम बात कर रहे हैं 7 फरवरी 2026 की उस शाम की, जब दिल्ली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच एक ‘अघोषित’ मुलाकात हुई।
​दावा किया गया कि यह एक शिष्टाचार भेंट थी, मुख्यमंत्री के सोशल हैंडल से तस्वीरें भी साझा की गईं, लेकिन कुछ ही मिनटों में उन तस्वीरों को बिना किसी स्पष्टीकरण के मिटा दिया गया। आखिर उस बंद कमरे में ऐसा क्या हुआ कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया मैनेजरों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े?

​गहन विश्लेषण:
​1. दिल्ली का नया पावर स्ट्रक्चर और ‘बॉस’ का अनुशासन
​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नितिन नवीन को पार्टी संगठन का ‘बॉस’ बताया है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास पर हुई यह मुलाकात महज चाय पर चर्चा नहीं थी। अखिलेक्स के सूत्रों की मानें तो यह मुलाकात ‘प्रचार’ के लिए नहीं, बल्कि ‘परिणामों’ की समीक्षा के लिए थी। आलाकमान अब फोटो-पॉलिटिक्स से हटकर रिपोर्ट कार्ड पर ध्यान दे रहा है। क्या यही वजह है कि इस मुलाकात को पूरी तरह गोपनीय रखने का निर्देश दिया गया?
​2. नियुक्तियों की फाइल और अध्यक्ष का ‘लाल पेन’
​मध्य प्रदेश में निगम-मंडल और मंत्रिमंडल विस्तार की प्रतीक्षा लंबी होती जा रही है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जो सूची लेकर दिल्ली पहुंचे थे, उस पर नए अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। राजनीति का पुराना नियम है—जब तक सहमति नहीं, तब तक कोई जश्न वाली तस्वीर नहीं। फोटो का डिलीट होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि फिलहाल दिल्ली और भोपाल के बीच तालमेल की पटरी अभी सही नहीं बैठ पाई है।
​3. ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ का दौर शुरू
​नितिन नवीन छत्तीसगढ़ के ‘चाणक्य’ रहे हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति की रग-रग से वाकिफ हैं। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री को ‘सौजन्य’ से ज्यादा ‘समीक्षा’ का सामना करना पड़ा। लॉ एंड ऑर्डर से लेकर प्रशासनिक ढर्रे तक, दिल्ली अब मोहन सरकार से जवाब मांग रही है। मुख्यमंत्री की फोटो का गायब होना बताता है कि अब हर फैसले का हिसाब होगा और दिल्ली की ‘तीसरी नजर’ चौबीसों घंटे तैनात है।

​निष्कर्ष :
​तस्वीरें मिटाई जा सकती हैं, डिजिटल फुटप्रिंट मिटाए जा सकते हैं, लेकिन दिल्ली दरबार की वो ‘तल्खी’ अब साफ महसूस की जा रही है। 7 फरवरी की वह रात मुख्यमंत्री मोहन यादव के भविष्य के लिए एक ‘अग्निपरीक्षा’ थी। यह ‘डिलीटेड फोटो’ मध्य प्रदेश की सत्ता में किसी बहुत बड़े ‘कोर्स करेक्शन’ की शुरुआत मात्र है।

​कॉल टू एक्शन (Call to Action):
​क्या आपको लगता है कि मुख्यमंत्री को दिल्ली में वह तवज्जो नहीं मिल रही जिसकी उन्हें उम्मीद थी? क्या यह फोटो डिलीट होना मध्य प्रदेश में किसी बड़े राजनैतिक भूकंप की आहट है?

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​सटीक विश्लेषण। बेबाक अंदाज़। सिर्फ अखिलीक्स पर।

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