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धान घोटाला: छत्तीसगढ़ में ‘AI’ की आंखों में धूल झोंककर करोड़ों की डकैती!

छत्तीसगढ़—धान का कटोरा।
लेकिन आज यही कटोरा किसानों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के सिंडिकेट के लिए सोने की खान बन चुका है।
जनवरी 2026 में छत्तीसगढ़ से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी— एक साथ 31 अधिकारी सस्पेंड।
सरकार ने इसे बड़ी कार्रवाई बताया, लेकिन सवाल यह है:
क्या यह असली फिल्म है या सिर्फ ट्रेलर?
‘अखिलीक्स’ आज उसी महा-घोटाले की परतें खोलेगा, जिसमें करोड़ों का धान कागज़ों में खरीदा गया, पैसा निकल गया, लेकिन ज़मीन पर धान का एक दाना तक नहीं मिला—और हैरानी की बात यह कि AI कैमरे और GPS सिस्टम भी इस लूट को रोक नहीं पाए।
जशपुर: ‘मिस्टर इंडिया’ बन गया 20,586 क्विंटल धान
घोटाले की शुरुआत होती है जशपुर से।
कागज़ों में दावा— 20,586 क्विंटल धान की खरीद।
सरकारी रिकॉर्ड— पूरा भुगतान हो चुका।
लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तो सच्चाई चौंकाने वाली थी।
गोदाम खाली
एक दाना धान नहीं
₹6.55 करोड़ हवा में गायब
न धान आसमान निगल गया, न धरती।
इसे निगल गया भ्रष्टाचार का वो सिंडिकेट, जो रायपुर से लेकर जशपुर तक फैला हुआ है।
बलौदाबाजार: भाई बना ‘काग़ज़ी करोड़पति किसान’
अब खेल को और गहराई से समझिए।
बलौदाबाजार में एक समिति प्रबंधक ने अपने ही भाई को रातों-रात ‘करोड़पति किसान’ बना दिया।
कैसे?
MSP तय: ₹3100 प्रति क्विंटल
बाहर से (ओडिशा, मध्य प्रदेश) लाया गया ₹1500 का कचरा धान
छत्तीसगढ़ के खरीदी केंद्रों पर दिखाया गया ‘बंपर पैदावार’
भुगतान सीधे सरकारी रेट पर
यानि असली किसान पीछे, बिचौलिया आगे।
AI कैमरा भी धोखा खा गया? या किसी ने आंख मूंद ली?
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब जांच में सामने आया—
एक ही ट्रक
नंबर प्लेट बदली गई
दिन में चार बार एंट्री
AI कैमरे ने ट्रक की एंट्री दर्ज की,
लेकिन सिस्टम यह नहीं पकड़ पाया कि ट्रक वही है—बस नंबर बदल गया है।
सवाल उठता है:
क्या AI कमजोर है?
या सिस्टम को जानबूझकर कमजोर रखा गया?
कार्रवाई हुई… लेकिन क्या पर्याप्त?
सरकार ने कार्रवाई की।
31 अधिकारी सस्पेंड हुए।
बेमेतरा के गाड़ाडीह में सड़ा हुआ धान पकड़ा गया
कवर्धा और मऊ में FIR दर्ज हुई
AI और GPS सिस्टम की सफलता गिनाई गई
लेकिन ‘अखिलीक्स’ यहां रुकने वाला नहीं है।
Akhileaks के सीधे सवाल
बड़ी मछली कब फंसेगी?
31 लोग तो सिर्फ प्यादे हैं, असली मास्टरमाइंड कौन है?
₹6.55 करोड़ की वसूली कब होगी?
सिर्फ सस्पेंशन क्यों? संपत्ति कुर्की क्यों नहीं?
बॉर्डर पर कौन सोया था?
दूसरे राज्यों का धान ट्रकों में भरकर छत्तीसगढ़ कैसे आया?
चेकपोस्ट और परिवहन विभाग की भूमिका क्या है?
क्या वहां भी ‘जेबें गर्म’ थीं?
AI सिस्टम में छेड़छाड़ किसके आदेश पर हुई?
टेक्नोलॉजी को ढाल बनाकर लूट किसने की?
किसान भोला है, कमजोर नहीं
छत्तीसगढ़ का किसान मेहनती है।
अगर ₹3100 MSP उसका हक है, तो वह पैसा—
किसान को मिलना चाहिए
बिचौलियों को नहीं
यह लड़ाई सिर्फ धान की नहीं है,
यह लड़ाई सिस्टम को साफ़ करने की है।
सरकार के नाम संदेश
31 सस्पेंशन शुरुआत होनी चाहिए, अंजाम नहीं।
हमें ‘क्लीन चिट’ नहीं, ‘क्लीन सिस्टम’ चाहिए।
अगर इस घोटाले पर अब भी लीपापोती हुई,
तो सवाल सिर्फ छत्तीसगढ़ का नहीं रहेगा—
यह पूरे देश की कृषि व्यवस्था पर सवाल होगा।
आपकी राय क्या है?
क्या आपके इलाके में भी धान की खरीद में हेराफेरी हो रही है?
नीचे कमेंट में लिखिए।
इस रिपोर्ट को इतना शेयर करें कि रायपुर के गलियारों तक इसकी गूंज पहुंचे।
आप देख रहे थे Akhileaks —
सच, जो दबने नहीं देंगे।

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