टाइगर रिज़र्व में हेलीकॉप्टर — क्या मध्यप्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दे दी?
मध्यप्रदेश सरकार की नई पर्यटन हेली सेवा लॉन्च होते ही सुर्खियों में है—लेकिन कारण पर्यटन नहीं, विवाद है। सरकार इसे “नई उड़ान” कह रही है, जबकि पर्यावरणविद, वन्यजीव विशेषज्ञ और कानूनी जानकार इसे सीधी टक्कर सुप्रीम कोर्ट से बता रहे हैं।
विकास की उड़ान या कानून को चुनौती?
मध्यप्रदेश सरकार की नई पर्यटन हेली सेवा लॉन्च होते ही सुर्खियों में है—लेकिन कारण पर्यटन नहीं, विवाद है। सरकार इसे “नई उड़ान” कह रही है, जबकि पर्यावरणविद, वन्यजीव विशेषज्ञ और कानूनी जानकार इसे सीधी टक्कर सुप्रीम कोर्ट से बता रहे हैं।
चारों प्रमुख टाइगर रिज़र्व—कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ और सतपुड़ा—जिन्हें भारतीय अदालतें “Silence Zones” घोषित कर चुकी हैं, उनके पास हेलीपैड बनाए जाने से यह बहस अब राज्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और कानूनी चुनौती बन चुकी है।
सवाल बड़ा है—
क्या MP ने विकास की जल्दबाज़ी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को खतरे में डाल दिया है?
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: कौन-सी लाइन क्रॉस हुई?
17 नवंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने T.N. Godavarman vs Union of India मामले में अत्यंत स्पष्ट आदेश दिया:
1. सभी Tiger Reserves और Eco-Sensitive Zones (ESZ) को Silence Zone घोषित किया जाए।
2. 1000 फीट से नीचे किसी भी प्रकार की Low-Height Flying—ड्रोन, विमान, हेलीकॉप्टर—पूर्णतः प्रतिबंधित है।
3. Wildlife Areas में हाई-डेसिबल गतिविधियाँ—बैन।
4. Helicopter = Aircraft (दोनों पर समान नियम लागू)।
यह आदेश पूरे भारत के टाइगर रिज़र्व पर लागू है—कोई अपवाद नहीं।
MP में क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट और ज़मीन पर बनी दूरी
Akhileaks की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि:
हेलीपैड टाइगर कोर एरिया से सिर्फ 200–300 मीटर दूरी पर बनाए गए हैं।
कई उड़ानें ESZ की न्यूनतम ऊँचाई 1000 फीट से नीचे संचालित होंगी।
यह सीधे-सीधे SC आदेश के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
जब कोर्ट कहता है—“1000 फीट ऊपर रहो”
MP की हेली सेवा कहती है—“300 मीटर पर भी ठीक है।”
बाघों पर प्रभाव: आवाज़ से नहीं, कंपन से डरते हैं टाइगर
वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की चेतावनियाँ बताती हैं:
1. High-Decibel Noise = Hunting Pattern Disturbed
बाघ शिकार के समय सबसे शांत वातावरण चाहते हैं। हेलीकॉप्टर हवा का दबाव तोड़ देता है।
2. Rotor Vibration = Cubs Under Stress
नवजात शावक कंपन के प्रति सबसे संवेदनशील होते हैं।
वाइब्रेशन उन्हें मां से अलग कर सकता है।
3. Stress → Displacement → Human-Wildlife Conflict
टाइगर अपने कोर क्षेत्र से हटकर गांवों-बस्तियों की ओर बढ़ सकते हैं।
4. Breeding Cycle Impacted
Noise pollution mating season को बाधित करता है।
इसी वजह से कई देशों में wildlife zones के ऊपर उड़ानें पूर्णतः प्रतिबंधित हैं।
एक विशेषज्ञ का बयान
“जहाँ बाघ परेशान होते हैं, वहाँ पर्यटन टिकता नहीं—वह मर जाता है।”
सरकार की योजना: तीन सेक्टर, लेकिन सबसे विवादित टाइगर सर्किट
MP हेली सेवा तीन सेक्टरों में चलेगी—
1. इंदौर–उज्जैन–ओंकारेश्वर (धार्मिक रूट)
2. भोपाल–पचमढ़ी–मढ़ई (सतपुड़ा बायोस्फेयर क्षेत्र)
3. जबलपुर–कान्हा–बांधवगढ़–पेंच–अमरकंटक (सबसे संवेदनशील टाइगर रूट)
यही तीसरा रूट पूरे विवाद का केंद्र है।
क्योंकि यहाँ उड़ानें सीधे Tiger Landscape में प्रवेश करती हैं।
किराया: ₹3000 — ₹6250
फ्लाइट दिन: सप्ताह में 5
सुविधा: तेज़ यात्रा, सुंदर दृश्य
लेकिन—
क्या सुविधा बाघों की सुरक्षा से ऊपर है?
क्या अनुमति ली गई? NTCA, ESZ, Wildlife Board—सभी सवालों के घेरे में
मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजे गए पत्र में विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए—
1. क्या NTCA (National Tiger Conservation Authority) ने Clearance दी?
2. क्या ESZ Notification में यह बदलाव दर्ज है?
3. क्या State Wildlife Board ने हेली सेवा को मंजूरी दी?
4. क्या Environmental Impact Assessment (EIA) किया गया?
5. क्या Cabinet Note में SC आदेश का संदर्भ था?
6. क्या यह Contempt of Court नहीं है?
इन सभी सवालों का जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
क्या सरकार धार्मिक + टाइगर सर्किट को जोड़कर नया नैरेटिव बना रही है?
रूट का पैटर्न देखें—
ओंकारेश्वर → महाकाल → चित्रकूट → अमरकंटक → पचमढ़ी
यानी धार्मिक स्थलों को जोड़कर टाइगर क्षेत्र तक हेलीकॉप्टर पहुँच रहे हैं।
क्या यह सिर्फ पर्यटन मॉडल है?
या राजनीतिक नैरेटिव + टाइगर आकर्षण का मिश्रण है?
यह रणनीति पर्यटन को तेज़ कर सकती है,
लेकिन जंगलों पर इसका दबाव अप्रत्यक्ष नहीं—सीधा और खतरनाक होगा।
Akhileaks के 12 सवाल मुख्यमंत्री मोहन यादव से
1. हेलीपैड टाइगर कोर एरिया से 300 मीटर पर क्यों बनाए गए?
2. SC का 1000 फीट नियम क्यों नहीं लागू किया गया?
3. क्या कोई NTCA Clearance मौजूद है?
4. पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन क्यों नहीं हुआ?
5. ESZ के लिए पब्लिक सुनवाई क्यों नहीं हुई?
6. राज्य वन्यजीव बोर्ड ने क्या तय किया?
7. Low-Height Flying की अनुमति किसने दी?
8. Silence Zone नियम क्यों तोड़े गए?
9. क्या इससे टाइगर-ह्यूमन Conflict नहीं बढ़ेगा?
10. क्या सरकार Contempt जोखिम में है?
11. पर्यटन बाघ संरक्षण से बड़ा कैसे हो गया?
12. क्या MP ‘Tiger State’ का दर्जा खो देगा?
विकास या विनाश?
मध्यप्रदेश की नई हेली सेवा पर्यटन को बढ़ा सकती है,
लेकिन सवाल यह है कि किस कीमत पर?
बाघ सिर्फ एक प्रजाति नहीं,
भारत के पर्यावरणीय तंत्र का स्तंभ हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था
“Silence Zones shall remain uncompromised.”
लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन कह रहा है
“हम वहाँ हेलीकॉप्टर उड़ाएँगे।”
अब फैसला जनता का है—
क्या यह सेवा मध्यप्रदेश की पहचान चमकाएगी,
या टाइगर स्टेट को एक Silent Ecological Disaster की ओर धकेल देगी?



