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UGC की काली सूची: 54 निजी विश्वविद्यालयों पर पारदर्शिता की पोल खुली

“शिक्षा या कारोबार?” — देश की यूनिवर्सिटीज़ पर सबसे बड़ा सवाल

भारत में उच्च शिक्षा के नाम पर जो ‘सिस्टम’ चल रहा है, वह अब खुलकर सामने आ रहा है।
UGC (University Grants Commission) ने हाल ही में 54 निजी विश्वविद्यालयों को “नॉन-कंप्लायंट” यानी नियमों का उल्लंघन करने वाला घोषित किया है।
कारण? इन विश्वविद्यालयों ने Public Self-Disclosure Guidelines 2024 का पालन नहीं किया।

क्या है यह नया नियम?

10 जून 2024 को UGC ने आदेश जारी किया था कि भारत के सभी विश्वविद्यालय — चाहे वो सरकारी हों या निजी — अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी सार्वजनिक करें:

कितने शिक्षक हैं और उनकी योग्यताएँ क्या हैं।

कौन-कौन से कोर्स चल रहे हैं और उनकी फीस कितनी है।

संस्थान को कितनी फंडिंग मिली और किन एजेंसियों से।

विश्वविद्यालय का संचालन ढांचा, ट्रस्ट और प्रशासनिक जिम्मेदार व्यक्ति।

यह सब बिना किसी लॉग-इन या पासवर्ड के जनता के लिए खुले रूप में दिखना चाहिए था।

लेकिन 54 विश्वविद्यालयों ने इसे लागू नहीं किया।
UGC के बार-बार मेल और ऑनलाइन मीटिंग्स के बावजूद — किसी ने डेटा नहीं अपलोड किया, किसी ने आधे-अधूरे लिंक दिए, और कई ने वेबसाइट तक अपडेट नहीं की।

किन राज्यों के विश्वविद्यालय हैं लिस्ट में?

राज्य विश्वविद्यालय

असम Krishnaguru Adhyatmik Vishwavidyalaya
बिहार Amity University, Dr. C.V. Raman University, Sandip University
छत्तीसगढ़ Anjaneya University, Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Maharishi University of Management & Technology
गोवा National International University of Legal Education & Research
गुजरात Gandhinagar University, J.G. University, K.N. University, M.K. University, Plastindia International University, Surendranagar University, Team Lease Skills University, Transstadia University
हरियाणा NILM University
झारखंड Amity University, AISECT University, Capital University, Sai Nath University
कर्नाटक Sri Jagadhguru Murugarajendra University
मध्य प्रदेश Azim Premji University, Aryavart University, Dr. Preeti Global University, Gayvaner University, JNCT Professional University, LNCT Vidyapeeth University, Makahausal University, Maharishi Mahesh Yogi Vedic Vishwavidyalaya, Mansarovar Global University, Shubham University
महाराष्ट्र Alard University, Dr. D.Y. Patil Dnyan Prasad University
मणिपुर Alian International University, Bir Tikendrajit University, Manipur International University
पंजाब Amity University
राजस्थान OPJS University
सिक्किम Medhavi Skills University, Sikkim Alpine University, Sikkim Global Technical University, Sikkim International University, Sikkim Skill University
त्रिपुरा Techno India University
उत्तर प्रदेश Agrawan Heritage University, F.S. University, Major S.D. Singh University, Monad University
उत्तराखंड Maya Devi University, Mind Power University, Smt. Manjra Devi University, Surajmal University
पश्चिम बंगाल Swami Vivekananda University

क्यों ज़रूरी है यह पारदर्शिता?

UGC का मकसद सीधा था —
“शिक्षा को कारोबारी राज़ नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा बनाना।”

हर साल लाखों छात्र निजी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं,
जहाँ फीस करोड़ों तक पहुँच जाती है।
पर असली सवाल है — क्या उन्हें शिक्षा मिल रही है या सिर्फ़ सर्टिफ़िकेट?

UGC के इन नियमों से यह पता चल सकता था कि किस विश्वविद्यालय के पास
कितनी फैकल्टी है, किसका एक्रेडिटेशन फर्जी है, और कहाँ एडमिशन सिर्फ़ दिखावा है।

UGC की सख्त चेतावनी

इन विश्वविद्यालयों को अब चेतावनी दी गई है कि
यदि उन्होंने जल्दी ही दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया तो:

उनकी मान्यता पर समीक्षा (review) की जाएगी।

नई एडमिशन अनुमतियाँ रोक दी जा सकती हैं।

और आगे चलकर मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई संभव है।

UGC ने कहा है —

“पारदर्शिता उच्च शिक्षा की आत्मा है।
जो विश्वविद्यालय जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं,
वो शिक्षा नहीं, भ्रम फैला रहे हैं।”

सबसे बड़ा उल्लंघन — मध्य प्रदेश

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
देश में सबसे ज़्यादा गैर-अनुपालन करने वाले विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश में हैं — कुल 10।
यह वही प्रदेश है जहाँ पिछले दो सालों में दर्जनों निजी विश्वविद्यालयों को तेजी से मंजूरी मिली,
लेकिन ज़मीन पर उनका ढांचा अधूरा या शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएँ आम हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविद् डॉ. एस.के. शर्मा का कहना है

“UGC की ये लिस्ट सिर्फ़ शुरुआत है।
आने वाले समय में यह कार्रवाई पूरे उच्च शिक्षा नेटवर्क को हिला देगी।
जो संस्थान अब भी पारदर्शिता से बच रहे हैं,
उन्हें या तो अपने सिस्टम सुधारने होंगे या बंद होना पड़ेगा।”

निष्कर्ष
UGC की यह कार्रवाई सिर्फ़ प्रशासनिक कदम नहीं —
यह भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र की जवाबदेही की पहली सर्जरी है।
अब सवाल यह नहीं कि कितने विश्वविद्यालय खुले,
बल्कि यह कि कितने ईमानदारी से चल रहे हैं।

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