इंदौर एमवाय अस्पताल: मासूमों की मौत और सिस्टम की हत्या
इंदौर — मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमवाय।
नाम सुनते ही लोगों को भरोसा होता है कि यहां इलाज मिलेगा, जिंदगी बचेगी। लेकिन इस बार यहां जिंदगी नहीं, मौत मिली।
दो मासूम बच्चों की मौत। वजह — अस्पताल में चूहों का हमला।
मासूमों पर चूहों का हमला
नीओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU)… जहां हर सांस सुरक्षित होनी चाहिए थी, वहां चूहों ने कंधे, उंगलियां और पैरों को कुतर डाला।
जिन हाथों को मां ने पहली बार थामा था, वहां दांतों के निशान थे।
जिन पैरों से धरती छूनी थी, वे छलनी हो गए।
जिन कंधों पर मां का आंचल टिकना था, वहां जख्म ही जख्म रह गए।
दो मांएं — खंडवा की लक्ष्मी और देवास की रेहाना। सपने देखे थे कि बच्चों को गोद में खिलाएंगी। लेकिन अब गोद सूनी है और आंचल भीग चुका है।
सरकार और सिस्टम का काला चेहरा
अस्पताल प्रशासन का बयान —
> “बच्चे पहले से बीमार थे, मौत चूहों से नहीं हुई।”
लेकिन सवाल यही है — अगर अस्पताल के वार्ड में चूहा पहुंचा, तो क्या यह अपराध नहीं?
गोली शरीर में मिले तो हत्या, चाहे खून बहे या नहीं।
वैसे ही अस्पताल में चूहा मिला, तो मौत की जिम्मेदारी सिस्टम पर ही है।
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री पर सवाल
मुख्यमंत्री मोहन यादव…
आप इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं।
आपने पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर सिर्फ़ 1 लाख का जुर्माना लगाया।
ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया? क्या इसलिए कि ठेका किसी नेता के रिश्तेदार के पास है?
उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला…
आप कहते हैं — “कार्रवाई हुई।”
कार्रवाई? सिर्फ़ दो नर्सिंग ऑफिसर सस्पेंड, HOD को नोटिस।
क्या इससे मासूम लौट आएंगे?
अगर हिम्मत है, तो उसी वार्ड में तीन दिन रहकर दिखाइए।
यह पहली बार नहीं…
2023, भोपाल हमीदिया अस्पताल — शव का कान चूहों ने कुतरा।
विदिशा जिला अस्पताल — शव की नाक और हाथ चबाए गए।
सागर — शव की आंखें नोची गईं।
छिंदवाड़ा ICU — महिला का पैर कुतर डाला।
लेकिन इस बार तो जिंदा मासूमों को चूहों ने कुतर डाला। यह सिर्फ़ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की हत्या है।
भ्रष्टाचार और लालच की जड़ें
अस्पताल सिर्फ़ चूहों से नहीं भरे हैं। यहां हर जगह कमीशनखोर चूहे घूम रहे हैं —
दवा सप्लाई में कमीशन।
खून और टेस्टिंग में घोटाला।
ठेकों में भ्रष्टाचार।
असल वजह चूहा नहीं, सिस्टम का लालच है।
मासूमों की मौत या इंसानियत की?
प्रशासन के बहाने —
“पेस्ट कंट्रोल सही समय पर नहीं हुआ।”
“बरसात में चूहे बाहर आ गए।”
“बच्चे पहले से बीमार थे।”
लेकिन जनता का जवाब —
> “ये मौत चूहों से नहीं, सरकारी बेशर्मी से हुई है।”
Akhileaks पूछता है…
मोहन यादव जी, आप मुख्यमंत्री हैं, इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं।
क्या आप नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?
क्या स्वास्थ्य मंत्री को हटाएंगे?
क्या जनता को भरोसा दिलाएंगे कि अगली बार कोई मासूम NICU में चूहों का शिकार नहीं होगा?
या फिर यह हादसा भी वही पुरानी कहानी बनेगा —
पहले चीखें, फिर नोटिस, और फिर भूल जाना।
एमवाय अस्पताल में मरे वो बच्चे सिर्फ़ चूहों से नहीं मरे…
वे मरे उस सिस्टम से, जो इंसानियत को कुतर चुका है।
यह स्टोरी Akhileaks की पड़ताल का हिस्सा है। अगर आप मानते हैं कि मासूमों की मौत पर सरकार को जवाब देना चाहिए, तो इस खबर को शेयर कीजिए।



